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Janta Ki Awaz

भोजपुरी कहानिया - Page 2

आपकी क़सम..!

3 May 2020 3:46 AM GMT
एक सुशिक्षित ग्रामीण महिला का गँवारों के बीच पहुंच जाना पता नहीं उसका दुर्भाग्य है या नहीं, किन्तु इतना तो तो सत्य है कि उस समाज का सौभाग्य होता ...

शराब बंदी, दो फेज का लॉक डाउन खैनी पर काट दिए लेकिन : आशीष त्रिपाठी

2 May 2020 4:44 PM GMT
ऑरेंज जोन में पड़े थे चरित्तर बाबू । दो फेज का लॉक डाउन खैनी पर काट दिए लेकिन कभी माथे पर शिकन नहीं आने दिया कि कहीं बाबूजी ताड़ न लें और चार बात न सुना ...

गुंजाइश : आशीष त्रिपाठी

28 April 2020 2:59 PM GMT
खाली पेट नींद क्या आनी थी फिर भी किसी तरह से इधर - उधर करवट बदलते हुए सोने का प्रयास कर रहे फोकट के कान में जब बच्चे के रोने की आवाज तीसरी बार पड़ी तो...

रासबिहारी : आशीष त्रिपाठी

24 April 2020 4:54 AM GMT
एक हैं रासबिहारी ,सौंदर्य के परम उपासक । राह चलते श्रृंगार रस से ओत - प्रोत द्विअर्थी पंक्तियां रच देना और किसी महिला को सुना देना उनका नित्य कर्म है ...

रब ने बना दी जोड़ी

17 April 2020 5:09 AM GMT
तीस की अवस्था पार कर लेने के बाद भी जब दरवाजे पर लड़की वालों का आगमन नहीं हुआ तो मोबाइल पर टिकटोक बना रहे दामोदर को देख उनके बाप ने ताना मारा - ' अरे...

फिर एक कहानी और श्रीमुख "सारंग"

9 April 2020 2:47 PM GMT
झील के तट पर बैठे युवक ने एक कंकड़ उठा कर जल में फेंका, पानी में लहरें उठीं। उसने पास बैठी युवती से पूछा, 'क्या सचमुच आपके हृदय में इतनी ही लहरें उठती...

हे बबिता! हम टिरेन पकड़ के शनिचर को आ रहे हैं हो

5 March 2020 5:58 AM GMT
मदरास से। तुम्हारे लिए आसमानी रंग का सड़िया, दु जोड़ा पायल और बिछिया है। बाहरी दरवाजे के लिए छींटदार पर्दा, दू ठो बेडशीट, एक नया अटैची, बाबा कंपनी का...

मुल्ला का बकरा : रिवेश प्रताप सिंह

26 Feb 2020 2:38 AM GMT
मुल्ला जी ने एक बकरा पाल रखा था..आप यूं समझें कि मुल्ला जी ने अपने उम्मीदों का एक बकरा पाल रखा था. बकरा, मुल्ला जी के परिवार का कमाऊँ सदस्य था.. उस...

फगुनहट जिन्दाबाद... देश में बड़ी बवाल है रे भाया!

23 Feb 2020 1:13 PM GMT
आधा देश सोनभद्र में सोना चाहता है, आधा देश......... यह जनता जगना क्यों नहीं चाहती भाई? फागुन के महीने में डोनाल्ड भाई भउजाई के साथ पधार तो रहे...

सलाम तेरी पहली नज़र को सलाम! (लघुकथा)

14 Feb 2020 3:43 AM GMT
साँझ के बेर की बहती फागुनी हवाएँ अथाह दायित्वों के बोझ तले दबे मानव को भी उसके युवावस्था में व्यतीत किये गए वसन्त की याद दिला ही देती हैं।बड़े ही...

हग डे (लघुकथा)

12 Feb 2020 6:19 AM GMT
बहुत देर से अपने कम्प्यूटर के की - बोर्ड को उलट - पलट कर देख रही तृप्ति ने आस - पास नजरें दौड़ाईं तो दिवाकर को अपनी ही तरफ देखता पाया । झट से नजरें...

हार नहीं मानूँगा...

8 Feb 2020 10:58 AM GMT
गुलबदन बाबू अभी - अभी आये । आते ही किसी अनाम को बद्दुआएं देने लगे । कारण पूछे जाने पर रुंआसे होकर बोले - ' आपको तो मालूम है न कि घर से निकाल दिए जाने...
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