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भोजपुरी कहानिया - Page 1

  • गाँव, मनोहर- संगीता की शादी और कोरोना माई

    नैसर्ग भले महाराष्ट्र को तबाह कर रही हो, पर गाँव घर के किसानों के जीवन पर मोती बरसा रही है। पछुआ हवा के साथ बारिश की छोटी बूँदें जब किसान की भाग्य रेखा पर गिरती है तो लगता है जैसे मजदूर के माथे पर पसीने की फसल उग आई हो। कोई खेतों में है तो कोई रास्तों में। कोई मक्के की कटाई में व्यस्त है, तो कोई धान ...

  • सहोदर...

    वर्षों छोटी अदालतों में काम करने के बाद अंततः प्रमोशन पाकर जिला जज के यहां पेशकार हो गए डबलू पाँड़े । सो इस बार जब गाँव पधारे तो रंग - ढंग और मोटरसाइकिल नया - नया लग रहा था ।फराकित होकर लौट रहे मास्टर सुरेश पाँड़े की नजर उन पर पड़ी तो पूछ बैठे - ' का रे डबलू ! खूब तरक्की पा गये बचवा ? 'डबलू पाँड़े...

  • मजाकिया : आशीष त्रिपाठी

    बड़े भाई हरिनाथ पढ़े - लिखे विद्वान आदमी थे , उनके पीछे लोगों का हुजूम और उनके द्वारा बड़े भाई की प्रशंसा देख रतिनाथ को कोफ्त होती । रतिनाथ के पास विद्या के नाम पर ऐसा कुछ नहीं था जिसके सहारे वो बड़े भाई को टक्कर दे पाएं लिहाजा उन्होंने एक नुस्खा निकाला , लोगों को हँसा - हँसा कर आकर्षित करने का , हास्य...

  • जेकर पियवा बसे परदेस सखी

    वैसे टाई आज भी सही से बंध तो नहीं पाई थी लेकिन बिल्लू और झिनकी को उनके अँग्रेजी मीडियम वाले स्कूल ड्रेस में देख के धनेसरी का हृदय गर्व से उन्नत हुआ जा रहा था ।दोनों बच्चों की बाहें पकड़े घर से बाहर निकली तो दरवाजे पर कुंडी लगाते हुए , कुएं पर बर्तन मांज रही प्रभावती को सुनाकर बोली - थोड़ा जल्दी जल्दी...

  • आपकी क़सम..!

    एक सुशिक्षित ग्रामीण महिला का गँवारों के बीच पहुंच जाना पता नहीं उसका दुर्भाग्य है या नहीं, किन्तु इतना तो तो सत्य है कि उस समाज का सौभाग्य होता है। ऐसे ही था ' सेखुई गाँव ' और उस गाँव में कुछ माह पूर्व ब्याह के आई ललिता का सम्बंध।राज्य सरकार की घोषणा सुनने के बाद कि , सभी प्रवासी कामगारों को...

  • शराब बंदी, दो फेज का लॉक डाउन खैनी पर काट दिए लेकिन : आशीष त्रिपाठी

    ऑरेंज जोन में पड़े थे चरित्तर बाबू । दो फेज का लॉक डाउन खैनी पर काट दिए लेकिन कभी माथे पर शिकन नहीं आने दिया कि कहीं बाबूजी ताड़ न लें और चार बात न सुना दें । तसल्ली इस बात की भी थी कि दारू बन्द होने के कारण अगर उनका गला सूखा है तो आस - पड़ोस में भी कौन सी हरियाली छाई हुई है ? दर्शन महतो का दामाद...

  • गुंजाइश : आशीष त्रिपाठी

    खाली पेट नींद क्या आनी थी फिर भी किसी तरह से इधर - उधर करवट बदलते हुए सोने का प्रयास कर रहे फोकट के कान में जब बच्चे के रोने की आवाज तीसरी बार पड़ी तो लाइट जलाकर बीबी पर चिल्लाया - ' एक बच्चा नहीं संभलता तुझसे साली ! आधी रात को किसके घर के बच्चे रो रहे होंगे ?'-'जिनके पेट खाली होंगे !!'...बीबी ने...

  • रासबिहारी : आशीष त्रिपाठी

    एक हैं रासबिहारी ,सौंदर्य के परम उपासक । राह चलते श्रृंगार रस से ओत - प्रोत द्विअर्थी पंक्तियां रच देना और किसी महिला को सुना देना उनका नित्य कर्म है । उनकी द्विअर्थी रचनाएँ सुन कुछ महिलाएं ही ही करती हुई घरों में भाग जाती हैं और जिनको बुरा लगता वो गाली दे देती हैं ।गालियों का रासबिहारी ने कभी बुरा ...

  • रब ने बना दी जोड़ी

    तीस की अवस्था पार कर लेने के बाद भी जब दरवाजे पर लड़की वालों का आगमन नहीं हुआ तो मोबाइल पर टिकटोक बना रहे दामोदर को देख उनके बाप ने ताना मारा - ' अरे ससुर अब भी चेत जाओ ! किसी धन्ना सेठ या जमींदार की औलाद नहीं हो जो बाप के नाम पर हल्दी लग जायेगी , कोई नौकरी - चाकरी नहीं पकड़ी तो तुम्हारे साथ ही वंश का ...

  • फिर एक कहानी और श्रीमुख "सारंग"

    झील के तट पर बैठे युवक ने एक कंकड़ उठा कर जल में फेंका, पानी में लहरें उठीं। उसने पास बैठी युवती से पूछा, 'क्या सचमुच आपके हृदय में इतनी ही लहरें उठती हैं?' युवती ने जैसे जल कर कहा, 'आप यूँ ही झील की लहरों से हमारे प्रेम को तौलते रहिये, उधर मेरे पिता मेरा विवाह तय कर रहे हैं।'- 'विवाह तय करने से...

  • हे बबिता! हम टिरेन पकड़ के शनिचर को आ रहे हैं हो

    मदरास से। तुम्हारे लिए आसमानी रंग का सड़िया, दु जोड़ा पायल और बिछिया है। बाहरी दरवाजे के लिए छींटदार पर्दा, दू ठो बेडशीट, एक नया अटैची, बाबा कंपनी का दालमोट और आम-इमली वाला चॉकलेट है। हाथ में भर लोटा पानी और माथा पर अचरा लिये ठीक आठ बजे भोर में तुम मेरा इंतज़ार करना हो। देर होने पर तुम पड़ोस के भगीरथ को ...

  • मुल्ला का बकरा : रिवेश प्रताप सिंह

    मुल्ला जी ने एक बकरा पाल रखा था..आप यूं समझें कि मुल्ला जी ने अपने उम्मीदों का एक बकरा पाल रखा था. बकरा, मुल्ला जी के परिवार का कमाऊँ सदस्य था.. उस बकरे पर ही मुल्ला जी के पूरे परिवार के खर्चे का वजन था. वैसे मुल्ला जी का बकरा पेशेवर था! पेशा कुनबापरस्ती का था लेकिन वो अपने पेशे में ईमानदार था....

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