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Janta Ki Awaz

भोजपुरी कहानिया

फिर एक कहानी और श्रीमुख "प्रतिहार"

17 Dec 2020 9:31 AM GMT
सन ७३२ ई. , भारत का पश्चिमोत्तर सीमांत। सिंध में अरबों का शासन स्थापित होने के बाद खलीफा ने मोहम्मद बिन कासिम को मार कर यजीद को सिंध का सूबेदार बना...

फिर एक कहानी... "बन्दूक"

15 Dec 2020 10:51 AM GMT
उसके सारे साथी पीछे छूट गए थे। वह लगभग घण्टे भर से इस घने जंगल में भटक रहा था। अब उसे दिशा भी समझ में नहीं आ रही थी, वह यूँ ही इधर उधर भटक रहा था। ...

फिर एक कहानी और श्रीमुख "कसम"

28 Nov 2020 3:10 AM GMT
अपनी दाढ़ी के नीचे जब उसने सेल्फ लोडेड राइफल की नली सटाई तो जाने क्यों उसके होठ मुस्कुरा उठे। उसने एक बार भय से थर थर कांपती लड़की की तरफ निगाह उठाई और...

(कहानी ) प्रतिफल : आशीष त्रिपाठी

7 Nov 2020 5:30 AM GMT
उस दिन रविवार को दूध लेने रजत खुद ही चल पड़ा । नौकरी ऐसी थी कि सुबह आठ बजे मोटरसाइकिल उठाता तो घर आते रात के आठ बज जाते , ज्यादातर रविवार भी इस...

(कहानी ) छाप..... : आशीष त्रिपाठी

2 Nov 2020 5:18 AM GMT
रात के दो बज रहे थे लेकिन बाहर ओसारे में सोए कुशल को नींद नहीं आ रही थी । आज दिन में मन को बहलाने की लाख कोशिशें की उसने लेकिन न तो किसी खेल में मन...

फिर एक कहानी और श्रीमुख "छड़ी"

20 Oct 2020 1:15 PM GMT
आज बड़े दिनों बाद मिसिराइन खुश थीं। अलमारी से अपने कपड़े निकाल कर सूटकेस में रखती मिसिराइन को लग रहा था जैसे हवा में उड़ी जा रही हों। गाँव की...

' विदाई '

28 Sep 2020 11:35 AM GMT
आज से 90-95 वर्ष पूर्व।तमकुही राज के राजमहल की नृत्यशाला।तकधिकधिनाकधिनक तिर्किट तकधा किट तकधा........छम छमक छम.........तबले की थाप के साथ थिरकते...

शारदा बाबू की गर्जना

28 Sep 2020 11:34 AM GMT
'कैसी व्यवस्था है इनकी ये?' शारदा बाबू की गर्जना सुनकर अनवरत चलने वाला समय भी जैसे रुक गया। ' कैसे असभ्य लोगों के यहां रिश्ता करवा दिया तुमने...

बरखा बहार आई

25 Sep 2020 10:15 AM GMT
धान के दो पौधे बारी-बारी से घुटनों से मेरा पैर छूआ तो न चाहते हुए भी मैं मेड़ पर बैठ गया। वे दोनों पहले तो थोड़ा झिझके, शर्माए फिर मुझे देखता देखकर...

बोरी, आखिर है किसकी! इनकी या मेरी....

17 Sep 2020 9:59 AM GMT
माह में दो-तीन बार गेहूँ पिसवाने जाता हूँ. कल भी चक्की पर गया था (आम बोलचाल में आटा ही पिसवाता हूँ लेकिन यहाँ इतना पेंचकश लगाने वाले हैं इसलिए यहाँ...

बहे पुरवइया रे ननदी....

24 Aug 2020 12:50 PM GMT
पिछले सप्ताह भर से पुरुवा हवा चलने लगी है। हवा के साथ एक-आध औछार बारिश भी रोज हो ही जाती है। मेरे जैसे किसी ठेठ देहाती के लिए हवा के साथ नाचते...

सावन के रंग और गांव...

22 July 2020 3:48 PM GMT
पहले सावन का महीना कौवों के उचरने का महीना होता था। आंगन की मुंडेर पर बैठे कौवे से महिलाएं पूछतीं, 'कोई आ रहा है?' और यदि कौवे ने उड़ कर हामी भर...
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