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Janta Ki Awaz

प्रतिशोध : आशीष त्रिपाठी

प्रतिशोध : आशीष त्रिपाठी
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ऑफिस के लोग इस बात को लेकर सकते में थे कि गाज किस पर गिरेगी । बॉस आये , एक - एक करके सबसे पूछताछ हुई । निष्कर्ष यह निकला कि सबसे ज्यादा दोषी वह वाचमैन है जिसने प्रतिद्वंदी कंपनी के लोगों को ऑफिस में घुसने और गोपनीय जानकारियां लेने दिया , अतः उसी की छुट्टी होनी चाहिए । वाचमैन का पक्ष जाने बिना कह दिया गया कि आज शाम को वह अपना हिसाब कर ले और कल से काम पर न आये ।

उसी शाम ऑफिस का एक कर्मचारी रामसखा , पैंट्री की तरफ गया तो देखा वाचमैन अंदर खड़ा है । उसे उसकी पीठ दिख रही थी । बोला -" हाँ अब काहें का डर? नौकरी से तो लोग निकाल ही चुके हैं , इससे ज्यादा क्या कर सकते हैं ?"

वाचमैन तेजी से पलटा , उसके हाथ में शक्कर का मर्तबान था । रामसखा को आश्चर्य हुआ , वाचमैन के चेहरे पर जितना भय इस वक्त था , नौकरी से निकाले जाने का फरमान सुनते वक्त नहीं था । कुछ कहने के लिए मुँह हिलाया तो मुँह से चीनी गिरने लगी ।

रामसखा अवाक सा उसका मुँह देख रहा था । वाचमैन ने जल्दी-जल्दी चीनी खत्म की और एक गिलास पानी पी लेने के बाद बोला -" रामसखा भाई एकाउंट में यह बात मत कहना वरना पैसा काट लेंगे साले ।"

-"कौन सी बात ?"

-"यही कि मैंने चीनी चुराकर खाई है ।"

रामसखा को हँसी आई -" अरे यार ये भी कहने की बात है ? मगर इतनी चीनी क्यों खाये जा रहे थे ?"

वाचमैन संजीदा था -" इन लोगों ने मेरे पेट पर लात मारकर मेरा बहुत बड़ा नुकसान किया है , जाते - जाते इनका भी कुछ नुकसान कर देना चाहता हूँ ।"

रामसखा इसे चुहलबाजी समझ रहा था मगर वाचमैन का चेहरा बता रहा था कि यह मजाक नहीं है । पूछा -"पागल हो गए हो ? इतनी बड़ी फर्म को तुम कुछ ग्राम चीनी खा कर नुकसान पहुँचाने चले हो ?"

वाचमैन पैंट्री से बाहर निकलने लगा -" इनके लिए छोटी बात होगी , मेरे घर एक दिन में कोई आधा किलो चीनी खा ले तो महीने का बजट डिस्टर्ब हो जाता है । मैंने बदला ले लिया है ।"

आशीष त्रिपाठी

गोरखपुर

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