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व्यंग ही व्यंग - Page 1

  • अंदरूनी तकरार घिर गयी गहलोत सरकार : अभय सिंह

    आखिर खुलकर आयी ।अंदरूनी तकरार ।।घिर गयी मुश्किलों में ।गहलोत सरकार ।।बन नही पायी ।आपसी तालमेल ।।शह-मात का खूब।चल रहा है खेल ।।प्रदेश की जनता ।सबकुछ रही झेल ।।चल रहा मान-मनुहार ।बगावत का दिखा आसार ?शंकित आलाकमान ।वो भी हैं लाचार ?मनमुटाव के खबरें ।आये दिन आम ।।कौन कर रहा है ?गड़बड़ ये काम ।।

  • बजता था डंका .... जल गयी लंका : अभय सिंह

    बजता था डंका ।जल गयी लंका ।।खुलेंगे कई राज ।दायरे में अब जाँच ।।काम हुआ तमाम ।होगा अब हिसाब ।।अर्जित अकूत संपत्ति ।आपराध से कमाई ।।अनगिनत दौलत ।कितनी है बनायी ?आये दिन हो रहे ।हर चीज उजागर ।।किनकी है संलिप्तता ।आयेगी अब बाहर ।।बच न पायेंगे अब ।कोई भी राजदार ।।मिले गर सुराग ।कठिन होगा डगर ।।

  • सम्राज्य का खात्मा ... बच गई लाज ? .. अभय सिंह

    आतंक का अंत ।दफ़न कई राज ।।सम्राज्य का खात्मा ।बच गई लाज ?किया जो करनी ।खबर गयी फैल ।।समस्त विभागों में ।खुशी गयी दौड़ ।।क्या है अर्धसत्य ?होगा आगे खोज ।।पर यही है यथार्थ ।अनभिग है लोग ।।आ ना रहे बाज ।दे रहे हैं बयान ।।एक-दूसरों पर ।बाँट रहे हैं ज्ञान ।।

  • दुनिया में है चर्चा ...ड्रैगन बना सवाल : अभय सिंह

    गुस्से में बौखलाया ।सुनकर अपना नाम ।।लेह जाकर पीएम ।स्पष्ट दिये पैगाम ।।नाम लिए बगैर ।उडा दिए होश ।।सेना,देशवासियों में ।भर दिये हैं जोश ।।विस्तारवादी सोंच हो रहे है खत्म ।।बासुरी हमारे पूज्य ।चक्र सुदर्शन की बात।।हम शांति के पक्षधर ।इतना रखो याद ।।दे रहा चाईना ।बयान अनेक ।।घेर रहे है हम ।फेक करके...

  • घात लगाकर हमला...लचर क्यों कमान ? अभय सिंह

    स्तब्ध हुआ प्रदेश । वीरगति को जवान ।।घात लगाकर हमला ।लचर क्यों कमान ?बेखौफ़ अपराधी ।वक्त पड़ी ये आन ।।कोई था भेदिया ?यूं चली गई जान ।।कठोर मिले दंड ।जो भी जिम्मेदार ।।कैसे होगा बर्दाश्त?छल से प्रहार ।।गमगीन हुए लोग ।शोक किये व्यक्त ।।सरकार से अनुरोध ।सजा हो सख्त ।।

  • बच्चा समझ नहीं पाया कि नाना अब खेलने की चीज नहीं रहे, उनकी छाती में जिहाद ठोक दिया गया है

    तस्वीर कश्मीर के सोपौर की है। तीन साल का बच्चा अपने नाना के साथ जा रहा था। एक मस्जिद में छिप कर बैठे आतंकवादियों ने राह चलते बुजुर्ग को गोली मार दी। बच्चा बिलखता हुआ बूढ़े की मृत देह को झकझोरता रहा। कभी हाथ खींचता, कभी पैर... कभी पेट पर बैठ जाता... नाना के पेट पर चढ़ कर खेलने की आदत रही होगी, बच्चा...

  • स्कूल टाइम लभ, बोले तो लभ वाला प्रेम...

    इक्कीसवीं शताब्दी का पहला दशक शायद इसलिए भी जाना जाएगा, कि इसी समय भारत के गाँवों का प्रेम धीरे धीरे लभ में बदल गया। अहा! कितने सीधे होते थे हम ग्रामीण लड़के... 3 रुपये के टिकट पर चलने वाले वीडियो हॉल में बैठ कर 21 इंच वाली कलर टीवी पर यदि 'मैंने प्यार किया' नहीं देखी होती, तो पता भी नहीं चलता कि...

  • कोरोनिल पर किच-किच :अभय सिंह

    कोरोनिल पर किच-किच । आजमाये काढा ।।मंत्रालय और बाबा ।ठन गया अखाड़ा ।।समर्थक और विरोधी में लगी है होड़ ।।हो रही है बहस ।कोरोना अब गौण ?मिली ना अनुमति ।कैसे बना डाला ?दिया ना लाईसेंस ।सरकार पल्ला झाड़ा ।।नही था आवेदन में ।कोरोनावारस का जिक्र ।।रिपोर्ट होगा अध्ययन ।तभी होगा साफ रुख ।।

  • बिखर रहा राजद.... अभय सिंह

    बिखर रहा राजद ।हो गया दो फाड़ ।।पार्टी के सदस्यों ने ।तोड़ डाला नाता ।लिया जदयू सदस्यता ।।नया हुआ ठिकाना ।।रघुवंश दिए इस्तीफ़ा ।वरिष्ठ थे वो नेता ।।वर्तमान नेतृत्व पर ।बरस पड़े खूब ।।किया था मना ।हो ना रहा पूछ ।।जदयू है गदगद ।समर्थन भरपूर ।।

  • हरकत करे उल्टी-सीधी । अभय सिंह

    हरकत करे उलटी-सीधी।अपनाता है वो हर विधि ।।पाल रखा है ससुरा ख्वाब।दे दिया बीमारी यह नायाब ।दिया आज तक डुप्लीकेट ।कोरोना दिया एकदम परफेक्ट ।।अपनाया है हर वो ढब ।नम्बर वन का है तुम ठग ।।दिया एक भयावह महामारी ।त्रस्त है लगभग दुनिया सारी ।।देते है पूरा आदर-सत्कार ।दो गज की दूरी से नमस्कार ।।चपटी...

  • बैठक सर्वदलीय ... हमें ना बुलाया : अभय सिंह

    दिल गया टूट ।हमें ना बुलाया ।।बैठक सर्वदलीय ।। न्योता ना भिजवाया ।।देते हम सुझाव ।और भी सलाह ।।मिलकर करतें बातें ।पल होता गवाह ।।करके दरकिनार ।होगा ना स्वीकार ।।हमें भी बतायें ।क्या था आधार ?हमारा भी है सदस्य ।रखा गया दूर ।।सीमा पर है दुशमन ।घुसने को आतुर ।।

  • शत्रु बदला लेने के लिए कोई भी रास्ता चुन सकता है..

    गुस्से या बदले की भावना में बदला लेना या नुकसान पहुंचाना इंसानी फितरत है. बच्चे, बाप का कुछ नहीं बिगाड़ पायेंगे तो उनके मोटरसाइकिल की चाबी ही बेड के पीछे गिरा देंगे.. और पूछने पर घाघ की तरह चुप्प मार जायेंगे. मम्मी से नाराज हों तो नेलपॉलिश की शीशी खोलकर चलते बनगें.. बड़े भाई की मोटी किताब से कोई आठ...

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