संभल रिपोर्ट के बाद CM योगी का बयान- डेमोग्राफी बदलने की कोशिश करने वालों को करना होगा पलायन

Update: 2025-08-29 11:44 GMT

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संभल में हुई घटनाओं के बाद सख्त प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि “जो लोग प्रदेश की डेमोग्राफी बदलने की कोशिश करेंगे, उन्हें अंततः पलायन करना ही पड़ेगा।”

CM योगी ने स्पष्ट किया कि सरकार किसी भी कीमत पर सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने और जनसांख्यिकीय बदलाव की कोशिश करने वालों को बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्होंने प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि ऐसे तत्वों पर सख्त कार्रवाई की जाए और कानून-व्यवस्था को चुनौती देने वालों पर कठोरतम दंड सुनिश्चित किया जाए।

योगी ने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश में शांति, सुरक्षा और विकास के माहौल से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी सूरत में संरक्षण नहीं मिलेगा।

संभल न्यायिक रिपोर्ट (2025)

1. रिपोर्ट का स्वरूप

यह एक 450 पृष्ठों की न्यायिक आयोग रिपोर्ट है, जो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को गुरुवार 28 अगस्त 2025 को सौंपी गई। आयोग में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश देवेंद्र कुमार अरोड़ा, रिटायर्ड IAS अमित मोहन और रिटायर्ड IPS अरविंद कुमार जैन शामिल थे।

2. डेमोग्राफिक बदलाव

स्वतंत्रता (1947) के समय संभल नगर पालिका में मुस्लिम आबादी लगभग 55% और हिंदू आबादी लगभग 45% थी। वर्तमान में यह बदलकर मुस्लिम आबादी लगभग 80–85% तथा हिंदू आबादी केवल 15–20% रह गई है।

रिपोर्ट इसे “जनसांख्यिकीय असंतुलन” बताती है, जो कई सामाजिक और सांप्रदायिक तनावों का कारण बना।

3. हिंसा और साजिश

रिपोर्ट ने 24 नवंबर 2024 की हिंसा — जो एक ASI सर्वे के दौरान जामा मस्जिद और हरिहर मंदिर विवाद पर हुई — को केवल एक घटना नहीं बल्कि सुनियोजित साजिश बताया है। इसमें हिंदुओं को निशाना बनाने के लिए बाहरी उपद्रवियों को लाने और राजनीतिक तुष्टिकरण का आरोप लगाया गया है।

सांसद जिया-उर-रहमान बर्क के 22 नवंबर 2024 के विवादित भाषण को हिंसा की नींव माना गया:

“हम इस देश के मालिक हैं, नौकर-गुलाम नहीं… मस्जिद थी, मस्जिद है और कयामत तक रहेगी…”

इसके बाद 24 नवंबर को तुर्क और पठान समुदायों के बीच हिंसक संघर्ष भड़क उठा।

4. आतंकवाद, अवैध कारोबार और असुरक्षा

रिपोर्ट में अल-कायदा और हरकत-उल-मुजाहिदीन जैसे आतंकवादी संगठनों की सक्रियता का उल्लेख है।

अवैध हथियारों व नशे के कारोबार तथा अपराधमय गतिविधियों में भी वृद्धि दर्ज की गई है, जिसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से गंभीर माना गया है

5. राजनीतिक और प्रशासनिक विफलताएँ

रिपोर्ट में समाजवादी पार्टी (SP) पर आरोप लगाया गया है कि उनकी तथाकथित तुष्टिकरण की नीतियों ने जनसांख्यिकीय असंतुलन को बढ़ावा दिया।

प्रशासनिक विफलताओं और राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण हिंसा को समय पर रोका नहीं जा सका।


रिपोर्ट की बड़ी बातें हैं:

डेमोग्राफिक बदलाव: आजादी के समय की तुलना में हिंदू आबादी में भारी गिरावट।

निहित साजिश: साजिश के रूप में हिंसा का भनापन, राजनीतिक और क्षेत्रीय खेल।

सुरक्षा की चिंताएँ: आतंकवाद, अवैध व्यापार, और असुरक्षा का बढ़ता माहौल।

राजनीतिक विवाद: रिपोर्ट के लीक और उसका इस्तेमाल सियासी लड़ाई में।

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