लखनऊ: मिनर्वा अस्पताल में 3 किलो की गांठ निकालकर बचाई गई युवती की बच्चेदानी, मातृत्व का सपना सुरक्षित!
लखनऊ. राजधानी के गोमतीनगर स्थित मिनर्वा सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में 26 वर्षीय एक युवती को उसके परिजन उस समय अस्पताल लेकर पहुँचे, जब उसका पेट असामान्य रूप से बाहर की ओर निकल आया था और उसे लगातार असहजता महसूस हो रही थी। शुरुआत में परिजनों को लगा कि यह कोई सामान्य समस्या होगी, लेकिन जब डॉ. प्रज्ञा गुप्ता की सलाह पर एमआरआई (MRI) जांच कराई गई तो चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई। युवती की बच्चेदानी (यूट्रस) में बड़ी गांठ पाई गई थी, जो पेट निकलने की मुख्य वजह थी।
डॉ. प्रज्ञा गुप्ता के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि गांठ को पूरी तरह निकाला जाए, लेकिन बच्चेदानी को किसी भी तरह का नुकसान न पहुँचे। युवती अभी अविवाहित थी और भविष्य में माँ बनने की उसकी संभावना को सुरक्षित रखना बेहद ज़रूरी था।
करीब दो घंटे तक चले इस जटिल ऑपरेशन को डॉ. प्रज्ञा गुप्ता, एमडी (प्रसूति एवं स्त्रीरोग विशेषज्ञ) ने पूरी सावधानी और कुशलता से अंजाम दिया। ऑपरेशन के दौरान बच्चेदानी में मौजूद बड़ी गांठ (फाइब्रॉइड) को सफलतापूर्वक निकाल दिया गया। हॉस्पिटल से मिली जानकारी के अनुसार गांठ का वजन करीब ढाई से तीन किलो के बीच बताया जा रहा है। ऑपरेशन में बच्चेदानी को पूरी तरह सुरक्षित रखा गया।
ऑपरेशन के बाद युवती की हालत अब स्थिर है और वह तेजी से स्वस्थ हो रही है। डॉ. प्रज्ञा गुप्ता के मुताबिक अगर समय रहते जांच और इलाज न होता, तो स्थिति और भी गंभीर हो सकती थी।
डॉ. प्रज्ञा गुप्ता ने बताया कि आजकल कई युवतियों में हार्मोनल बदलाव और बिगड़ी जीवनशैली के कारण बच्चेदानी में गांठ (फाइब्रॉइड) की समस्या बढ़ रही है। उन्होंने सलाह दी कि पेट में असामान्य सूजन, दर्द, भारीपन या मासिक धर्म में गड़बड़ी जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।
मिनर्वा सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में हुई यह सर्जरी न सिर्फ एक सफल चिकित्सा उपलब्धि है, बल्कि एक युवती के भविष्य और उसके मातृत्व के सपने को बचाने की मिसाल भी है। युवती के पिता ने डॉ. प्रज्ञा गुप्ता को धन्यवाद देते हुए बताया कि उनकी बेटी को नया जीवनदान मिला है और डॉ. प्रज्ञा की कुशलता के चलते उसकी बच्चेदानी भी पूरी तरह सुरक्षित रह सकी।