संभल की शाही जामा मस्जिद की सर्वे रिपोर्ट क्या है ? 45 पेज में खुली हर कहानी...

Update: 2025-01-03 02:42 GMT

संभल। वाद दायर होने का 45वां दिन। 45 पेज की रिपोर्ट। इसमें जामा मस्जिद की हर कहानी सामने लाने का प्रयास किया गया है। एडवोकेट कमिश्नर रमेश राघव ने मस्जिद की भौगोलिक और ऐतिहासिक तथ्यों का भी संज्ञान लिया है। उनके प्रमुख बिंदुओं का रिपोर्ट में भी उल्लेख किया है। वादी और प्रतिवादी पक्ष के तर्कों का भी जवाब तलाशने की कोशिश की गई है।

सर्वे के दौरान नापजोख के साथ जरूरत पड़ने पर खोदा्ई भी कराई गई है। साथ ही ऐतिहासिक पुस्तकों का भी अध्ययन किया गया है।

करीब दो बीघा भूमि में बनी जामा मस्जिद की 19 नवंबर की शाम वीडियोग्राफी कराई गई। अंधेरा होने और कुछ लोगों के शोरशराबा करने पर उस दिन टीम लौट गई थी। इसके बाद 24 नवंबर को तड़के दोबारा वीडियोग्रा्फी कराई गई। खोदाई कराने के भी इंतजाम रहे।

मुख्य गेट की सीढ़िया हैं जगजाहिर

जामा मस्जिद के मुख्य गेट पर सीढ़ियां जगजाहिर हैं। सीढ़ियों के बराबर कुएं को ढक दिया गया। इसके कुछ हिस्से को लोहे की चादर हटाकर देखा गया तो अंदर पानी था। गुंबद वाला कक्ष 20 फीट वर्गाकार से अधिक माना गया है। इसमें पंख भी लगे हैं। एडवोकेट कमिश्नर कहते हैं कि उन्होंने खुद ही रिपोर्ट तैयार की है। अस्वस्थ होने की वजह से देरी हुई है। लेकिन, गंभीरता के साथ रिपोर्ट तैयार की है।

सर्वे का सच

मुख्य गेट के पीछे व आला (ताख) बना है। उसे सीमेंट से बंद किया गया है। उसे देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा है, कुछ दबाया गया है।

मेहराबनुमा स्थान पर आले भी मिले हैं। इनमें कई खाली हैं। कई को बंद कर दिया गया है।

मुख्य कक्ष के दो दरवाजों को बंद भी बंद कर दिया गया है। माना जा रहा है पहले यह बिना दरवाजे के थे।

बजु स्थल के पास बने फव्वारे को भी सर्वे के दौरान खाली कराया गया। उसमें काई जमी थी। इसके नीचे टैंक बताया जा रहा है।

फूल भी मिले हैं। इन्हें तीन पत्ती का माना गया है। इसके अलावा कई स्थानों पर पत्तियां भी बताई गई हैं।

गुंबद पर कुछ दिनों पहले ही रंग कराया प्रतीत होता है। उसमें भी कुछ आकृति सी नजर आती है।

इतिहास में भी उल्लेख

जामा मस्जिद में हरि हर मंदिर होने का उल्लेख इतिहास में भी मिलता है। मंडलीय गजेटियर के मुताबिक अबुल फजल द्वारा रचित 'आइन-ए-अकबरी' में संभल में भगवान विष्णु के प्रसिद्ध हरि हर मंदिर का उल्लेख है। संभल में पुराने शहर के मध्य में स्थित विशाल टीले, जिसे कोट, अर्थात किला कहा जाता है पर भगवान विष्णु का प्रसिद्ध मंदिर होने का प्रमाण है। इस मंदिर के निर्माण का श्रेय पृथ्वीराज चौहान अथवा राजा जगत सिंह अथवा बरन के डोड राजा विक्रम सिंह के परपोते नाहर सिंह को दिया जाता है।

एचआर नेविल ने मुरादाबाद गजेटियर (1911) में लिखा है, 'मंदिर अब अस्तित्व में नहीं है। इसका स्थान एक मस्जिद ने ले लिया है। पूरे मस्जिद भवन पर प्लास्टर किया हुआ है। इससे निर्माण सामग्री के विषय में सुनिश्चित मत असंभव है। प्रखंडों को खंभो की कतार के माध्यम से दो गलियारों में बांटा गया है। प्रत्येक गलियारा तीन मेहराबदार निकासों के माध्यम से प्रांगण में खुलता है।

यह था वादकारियों का दावा

वादकारों ने कोर्ट को 26 बिंदुओं में संभल की भौगोलिक, ऐतिहासिक तथ्यों के साथ बाबरनामा की डायरी का भी उल्लेख किया है। लिखा कि बाबरनामा की डायरी के पेज संख्या 687 पर उल्लेख है कि बाबर जुलाई 1529 में संभल आया था। बाबर की सेना के लेफ्टिनेंट ने बाबर के कहने पर श्री हरि हर मंदिर को आंशिक रूप से ध्वस्त कराया फिर उस पर कब्जा करके मस्जिद के रूप में इस्तेमाल करना शुरू कर दिया।

वादकारों ने 24वें बिंदु पर पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) को घेरा है। वाद में लिखा है कि एएसआइ का कर्तव्य है कि वह सार्वजनिक को उक्त संपत्ति में प्रवेश की व्यवस्था प्रदान करे। जैसा कि अधिनियम की धारा 18 और 1959 के नियमों के तहत कहा गया है। वाद में एएसआइ पर भी सवाल उठाया गया है। उसने अपनी वैधानिक जिम्मेदारी का पालन नहीं किया, क्योंकि उक्त संपत्ति में जनता के प्रवेश के लिए कोई प्रावधान नहीं किया गया है। इसके अलावा कई अन्य पुस्तकों का भी उल्लेख किया गया है। 

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