75 साल में हम जातिगत भेदभाव खत्म नहीं कर पाए, शर्म की बात... UGC पर सुप्रीम कोर्ट की 10 बड़ी बातें

Update: 2026-01-29 08:35 GMT

सुप्रीम कोर्ट ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यानी UGC के नियमों और कैंपस में बढ़ते भेदभाव को लेकर बेहद तल्ख टिप्पणी की है. मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने सुनवाई के दौरान समाज में बढ़ती वर्गीय खाई और पहचान आधारित राजनीति पर गंभीर सवाल उठाए हैं. शीर्ष अदालत ने कहा कि यूजीसी के नए नियम अस्पष्ट हैं और इसके दुरुपयोग का खतरा है. इसके बाद कोर्ट ने यूजीसी के नए नियमों पर स्टे लगा दिया है. इस मामले की अगली सुनवाई अब 19 मार्च को होगी. पढ़ें सुप्रीम कोर्ट की बड़ी बातें

75 साल बाद पीछे लौटने का डर: CJI सूर्य कांत ने देश के सामाजिक ताने-बाने पर सवाल उठाते हुए कहा, "आजादी के 75 साल बाद क्या हम एक वर्गहीन समाज बनने के अपने लक्ष्य से पीछे हटकर एक प्रतिगामी (Regressive) समाज बनते जा रहे हैं?

क्षेत्रीय पहचान और रैगिंग का नया रूप: अदालत ने रैगिंग के बढ़ते मामलों पर चिंता जताते हुए कहा कि दक्षिण भारत या पूर्वोत्तर से आने वाले छात्रों की संस्कृति का उपहास उड़ाना सबसे खतरनाक है. जो लोग दूसरों की संस्कृति से परिचित नहीं हैं, वे अक्सर इसे निशाना बनाते हैं.

'शरारती तत्वों' द्वारा नियमों के दुरुपयोग की आशंका: सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी के रेगुलेशन में इस्तेमाल की गई भाषा पर आपत्ति जताई. कोर्ट का मानना है कि इन शब्दों का इस्तेमाल शरारती तत्वों द्वारा समाज में विभाजन पैदा करने के लिए किया जा सकता है.

अमेरिका के 'नस्लभेद' वाले दौर का जिक्र: जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि भारत को उस स्थिति में नहीं जाना चाहिए, जहां अमेरिका की तरह अश्वेत और श्वेत बच्चों के लिए अलग-अलग स्कूल हुआ करते थे. समावेशिता ही शिक्षा का आधार होनी चाहिए.

अंतर-जातीय विवाह और सामाजिक प्रगति: हॉस्टल लाइफ का उदाहरण देते हुए CJI ने कहा, "भगवान के लिए! आज हमारे समाज में अंतर-जातीय शादियां हो रही हैं. हम खुद हॉस्टल में रहे हैं जहां सब साथ रहते थे." उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आधुनिक संस्थानों में विभाजन की कोई जगह नहीं होनी चाहिए.

प्रतिष्ठित लोगों की कमेटी का सुझाव: कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि एक उच्च-स्तरीय कमेटी बनाने पर विचार किया जाए. इस कमेटी में समाज के प्रतिष्ठित लोग शामिल हों जो इस मुद्दे की समीक्षा करें ताकि देश बिना किसी विभाजन के विकास कर सके.

3E बनाम 2C का कानूनी पेंच: जस्टिस बागची ने नियमों की वैधता पर सवाल उठाते हुए पूछा कि जब शिक्षा व्यवस्था में पहले से ही 3E मौजूद है, तो नए 2C मानकों की क्या प्रासंगिकता है?

वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह से संवाद: यूजीसी के नियमों का बचाव कर रहीं वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह से मुख्य न्यायाधीश ने दो-टूक कहा कि समाज और शिक्षा के क्षेत्र में हम पीछे नहीं जा सकते. प्रगति का रास्ता केवल समावेशिता से होकर गुजरता है.

2012 के नियम फिर होंगे लागू: मामले की गंभीरता को देखते हुए CJI ने तत्काल आदेश जारी किया कि 2012 के पुराने नियम फिर से प्रभावी होंगे. कोर्ट का मानना है कि नए रेगुलेशन की तुलना में पुराने नियम अधिक संतुलित थे.

19 मार्च को अगली बड़ी सुनवाई: सुप्रीम कोर्ट ने इस पूरे मामले पर नोटिस जारी कर दिया है. अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी, जब कोर्ट कमेटी के गठन और नियमों की व्याख्या पर आगे का फैसला सुनाएगा.

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