नेहरू व नेताजी पर झूठ न बोलें सुधांशु - दीपक

Update: 2026-01-27 14:18 GMT

 

समाजवादी चिंतक और बौद्धिक सभा के अध्यक्ष दीपक मिश्र ने भाजपा प्रवक्ता व राज्य सदस्य सुधांशु त्रिवेदी को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि श्री त्रिवेदी पंडित जवाहरलाल नेहरू एवं नेताजी सुभाषचंद्र बोस के सन्दर्भ में लगातार झूठ बोल रहे हैं l वे दोनों महापुरुषों के मध्य व्याप्त आत्मीय व अंतरसम्बन्ध के परिप्रेक्ष्य में अनवरत अनर्गल, अतिरंजित, अनावश्यक और एकांगी बातें फैला रहे हैं जिसके लिए दोनों महान विभूतियों की आत्मा उन्हें अपराधी व कृतघ्न समझेंगी और इस वाचिक विषवमन के लिए राष्ट्रमन कभी माफ नहीं करेगा l वे कभी नेताजी के समावेशी राष्ट्रवाद और समाजवादी संकल्पना पर ज्ञान नहीं देते l उन शाहनवाज,आबिद हसन, कैप्टेन अब्बास अली जैसे देशभक्त मुसलमानों का नाम नहीं लेते जिन्होंने नेताजी के साथ आजादी की लड़ाई में खुद को होम कर दिया l एक चिट्ठी के वाक्यांश के आधार पर वे कहते हैं कि पंडित नेहरू ने नेताजी को लांक्षित व अपमानित किया l मेरे पास दर्जनों ऐसी चिट्ठियां हैं नेहरू - सुभाष द्वारा एक दूसरे को लिखी गईं हैं, जिनसे स्वतः स्पष्ट है कि दोनों का सम्बन्ध सयुजा सखाया द्विपर्णा अर्थात एक ही वृक्ष की पत्तियों की भांति बड़ा स्नेहिल और सम्मानपूर्ण था l 30 जून 1936 और 19 अक्टूबर 1938 को नेताजी द्वारा पंडित नेहरू को सम्बोधित पत्रों को सुधांशु जी पढ़ें जिससे पता चलता है नेताजी पंडित नेहरू की स्नेह-वर्षा से अभिसिंचित थे l यूरोप में निर्वासन का दंश झेल रहे नेताजी को पंडित नेहरू ही वापस लाए, लखनऊ अधिवेशन 1936 में नेहरू के कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद ही सुभाष बाबू मुख्यधारा में वापस लौटे l नेहरू ने सुभाष की गिरफ़्तारी के प्रतिकार और उनकी रिहाई के लिए 10 मई 1936 को देशव्यापी हड़ताल आहुत किया l उनकी रिहाई पर 6 अप्रेल 1937 को नेहरू के नेतृत्व में पूरे राष्ट्र ने राष्ट्रीय स्तर पर सुभाष दिवस मनाया था l तत्कालीन राष्ट्रीय सेवक संघ ने इन कार्यक्रमों से अपने को दूर रखा था, इसी नेहरू ने अपने उत्तराधिकारी के रूप में कांग्रेस के दक्षिपंथी नेताओं की आपत्ति के बावजूद सुभाष बाबू के नाम की सहमति जता दी थी l 19 फ़रवरी 1938 को हरिपुरा अधिवेशन में नेताजी नेहरू के बाद कांग्रेस के अध्यक्ष बने l उन्होंने पंडित नेहरू के लिए राष्ट्रीय योजना समिति बनाई ताकि " बड़े भाई' नेहरू का आशीर्वाद मिलता रहे l अगर नेताजी और पंडित नेहरू में दुश्मनी होती तो वे आज़ाद हिन्द फौज के एक बिग्रेड का नाम नेहरू के नाम पर कदापि नहीं रखते l यह इतिहास सुधांशुजी समेत हर भारतीय को जानना चाहिए कि आज़ाद हिन्द फौज के सेनानियों का मुकदमा लड़ने के अधिवक्ता पंडित नेहरू ने आखिरी बार काला कोट पहना था l आज़ाद हिन्द फौज के मेजर जनरल शाहनवाज खान की लिखी पुस्तक 'नेताजी और आज़ाद हिन्द फौज " सभी को पढ़नी चाहिए जिसकी भूमिका 10 अक्टूबर 1946 को पंडित नेहरू ने लिखी l नेताजी और आज़ाद हिन्द के शाहनवाज खान से ज्यादा अधिकृत प्रवक्ता श्रीमान सुधांशुजी नहीं हो सकते l यह पुस्तक उनके पास नहीं होगी, यदि होगी भी तो पढे नहीं होंगे l वे चाहें तो सादर भेंट कर सकता हूँ, शर्त यही है कि भारत के महापुरुषों पर अनावश्यक विषवमन बंद करें l

दीपक ने राहुल गाँधी और कांग्रेस से सम्बद्ध प्रवक्ताओं की ऐसे संवेदनशील विचारधारा पर आधारित विषयों को हलके में न लेने की सलाह दी है l राष्ट्र हित में संकीर्ण षणयंत्रकारी सोच से निर्णायक संघर्ष अब जरूरी हो गया, यह काम बौद्धिक सभा प्रतिबद्धता से करेगी l

(समाजवादी बौद्धिक सभा )

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