रिपोर्ट : विजय तिवारी
लखनऊ ।
देश की राजनीति में उत्तर प्रदेश की भूमिका हमेशा निर्णायक रही है। 80 लोकसभा सीटों वाले इस राज्य में राजनीतिक हवा किस ओर बह रही है, इसे लेकर हालिया दिनों में सामने आए सर्वेक्षणों ने अहम संकेत दिए हैं। इन सर्वे रिपोर्ट्स के मुताबिक, यदि मौजूदा समय में लोकसभा चुनाव कराए जाएं, तो उत्तर प्रदेश में सत्तारूढ़ गठबंधन को बढ़त मिलने की संभावना जताई जा रही है, हालांकि विपक्ष की मौजूदगी को भी पूरी तरह कमजोर नहीं माना जा रहा।
सरकार के कामकाज पर मतदाताओं की राय
सर्वेक्षणों में यह बात उभरकर सामने आई है कि राज्य सरकार के कामकाज को लेकर मतदाताओं के एक बड़े वर्ग में संतोष है। कानून-व्यवस्था, एक्सप्रेसवे और सड़क परियोजनाएं, धार्मिक पर्यटन का विस्तार, अयोध्या-काशी-मथुरा से जुड़े विकास कार्य और गरीब कल्याण योजनाएं ऐसे मुद्दे हैं, जिन्हें सरकार की उपलब्धियों के रूप में देखा जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में आवास, राशन और स्वास्थ्य योजनाओं को लेकर भी सकारात्मक प्रतिक्रिया दर्ज की गई है।
विपक्ष के मुद्दे और सीमाएं
दूसरी ओर, विपक्षी दल बेरोज़गारी, महंगाई, किसानों की आय और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों को केंद्र में रखकर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहे हैं। समाजवादी पार्टी और उसके सहयोगी दलों का दावा है कि युवाओं और कुछ पिछड़े वर्गों में असंतोष मौजूद है। हालांकि, सर्वे संकेत देते हैं कि यह असंतोष अभी इतनी मजबूत लहर में नहीं बदला है, जो सत्ता संतुलन को पूरी तरह पलट सके।
सीटों को लेकर संभावित रुझान
सूत्रों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में सत्तारूढ़ गठबंधन को विपक्ष की तुलना में अधिक सीटें मिलने का अनुमान जताया गया है। कई क्षेत्रों में मुकाबला करीबी बताया गया है, खासकर शहरी सीटों और कुछ जातीय समीकरणों वाले इलाकों में। इसके बावजूद, कुल मिलाकर सत्ता पक्ष की स्थिति मजबूत मानी जा रही है।
नेतृत्व का प्रभाव
सर्वे में नेतृत्व एक बड़ा कारक बनकर सामने आया है। राष्ट्रीय स्तर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राज्य स्तर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की लोकप्रियता को सत्तारूढ़ दल की ताकत माना गया है। वहीं विपक्ष की ओर से अखिलेश यादव को प्रमुख चेहरे के तौर पर देखा जा रहा है, लेकिन नेतृत्व को लेकर मतदाताओं की राय एकरूप नहीं दिखती।
जातीय और क्षेत्रीय समीकरण
उत्तर प्रदेश में जातीय समीकरण हमेशा चुनावी नतीजों को प्रभावित करते हैं। हालिया सर्वे बताते हैं कि कुछ वर्गों में मतदान रुझान स्थिर है, जबकि कुछ समूहों में हल्का बदलाव देखने को मिल रहा है। हालांकि, यह बदलाव फिलहाल निर्णायक साबित होता नहीं दिख रहा।
कुल मिलाकर, विभिन्न प्रिंट और डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रकाशित सर्वेक्षणों से यह संकेत मिलता है कि उत्तर प्रदेश में सत्तारूढ़ गठबंधन फिलहाल बढ़त की स्थिति में है। विपक्ष के पास मुद्दे मौजूद हैं, लेकिन उन्हें एक मजबूत और व्यापक चुनावी लहर में बदलने की चुनौती बनी हुई है। अंतिम नतीजा हमेशा की तरह मतदाताओं के फैसले पर निर्भर करेगा, और चुनाव नज़दीक आते ही राजनीतिक समीकरणों में बदलाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।