भारत-EU डील से वैश्विक व्यापार की धुरी बदली, अमेरिका की चिंता बढ़ी; भारत को रणनीतिक, आर्थिक और कूटनीतिक बढ़त
रिपोर्ट : विजय तिवारी
भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच प्रस्तावित व्यापार एवं रणनीतिक समझौते को लेकर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है। विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह डील केवल आर्थिक साझेदारी तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन को प्रभावित करने वाली एक अहम कड़ी बनती जा रही है। इसी कारण अमेरिका में इस समझौते को लेकर असहजता और चिंता के संकेत सामने आ रहे हैं।
भारत-EU डील का दायरा क्या है
भारत और यूरोपीय संघ के बीच चल रही बातचीत में मुक्त व्यापार समझौता (FTA), निवेश संरक्षण, डिजिटल ट्रेड, सप्लाई चेन सुरक्षा, ग्रीन एनर्जी, क्लाइमेट एक्शन और टेक्नोलॉजी सहयोग जैसे अहम बिंदु शामिल हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दोनों पक्ष इस डील को दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी के रूप में देख रहे हैं, जिससे वैश्विक व्यापार में स्थिरता और विविधता लाई जा सके।
भारत को मिलने वाले ठोस फायदे
विशेषज्ञों और सरकारी सूत्रों के मुताबिक, इस समझौते से भारत को कई स्तरों पर सीधा लाभ मिल सकता है—
भारतीय उत्पादों और सेवाओं को यूरोप के बड़े बाजार में बेहतर पहुंच
मैन्युफैक्चरिंग, ऑटोमोबाइल, फार्मा, टेक्सटाइल और आईटी सेक्टर को मजबूती
विदेशी निवेश (FDI) में वृद्धि
रोजगार सृजन और तकनीकी सहयोग
ग्रीन एनर्जी और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में साझेदारी
यही वजह है कि सरकार से जुड़े मंत्रियों और अधिकारियों ने संकेत दिया है कि इस डील में भारत के हितों को प्राथमिकता दी जा रही है।
अमेरिका की बेचैनी क्यों बढ़ी
अंतरराष्ट्रीय मीडिया
विश्लेषणों के अनुसार, भारत-EU नजदीकी से अमेरिका को यह आशंका है कि वैश्विक व्यापार में उसकी पारंपरिक बढ़त को चुनौती मिल सकती है। यदि भारत और EU के बीच टैरिफ में छूट और व्यापार नियमों में सहूलियत मिलती है, तो अमेरिकी कंपनियों की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति कमजोर पड़ सकती है। इसी कारण अमेरिका की ओर से अप्रत्यक्ष रूप से असंतोष के संकेत सामने आ रहे हैं।
ट्रंप टैरिफ और संरक्षणवादी नीतियों पर असर
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि भविष्य में अमेरिका में फिर से संरक्षणवादी नीतियां या ऊंचे टैरिफ लागू होते हैं, तो भारत-EU डील भारत के लिए एक मजबूत वैकल्पिक रास्ता साबित हो सकती है। इससे भारत को अमेरिकी बाजार पर अत्यधिक निर्भरता कम करने और अपने निर्यात को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी।
भारत की बदलती कूटनीतिक रणनीति
भारत अब किसी एक वैश्विक शक्ति पर निर्भर रहने के बजाय बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था में संतुलित साझेदारियां बना रहा है। EU के साथ गहराता सहयोग भारत की उसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें वह अपने राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखते हुए वैश्विक मंच पर स्वतंत्र भूमिका निभा रहा है।
यूरोप के लिए भारत क्यों अहम
EU के लिए भी भारत एक बड़ा और भरोसेमंद भागीदार बनकर उभरा है। चीन पर निर्भरता घटाने, सप्लाई चेन को सुरक्षित करने और एशिया में स्थिर साझेदारी बनाने के लिहाज से भारत को यूरोपीय देश एक दीर्घकालिक विकल्प के रूप में देख रहे हैं।
भारत-EU डील केवल व्यापारिक समझौता नहीं, बल्कि भारत की बढ़ती वैश्विक हैसियत और कूटनीतिक आत्मविश्वास का संकेत है। अमेरिका की चिंता इस बात को रेखांकित करती है कि भारत अब अंतरराष्ट्रीय समीकरणों में एक निर्णायक और स्वतंत्र शक्ति के रूप में उभर चुका है।