प्रभावशाली अफसर पर मेहरबान शाहगंज पुलिस?
शाहगंज (जौनपुर)।
उत्तर प्रदेश में “महिला सुरक्षा” के सरकारी दावों की पोल खोलता एक गंभीर मामला शाहगंज कोतवाली क्षेत्र से सामने आया है, जहाँ महिला से मारपीट और दुष्कर्म के प्रयास जैसे संगीन आरोपों के बावजूद पुलिस ने अब तक एफआईआर दर्ज करना मुनासिब नहीं समझा।
ग्राम रसूलपुर निवासी रोहित गौतम ने आरोप लगाया है कि 28 जनवरी 2026 को बिजली विभाग के अवर अभियंता (जेई) संतोष कुमार यादव अपने 5–6 कर्मचारियों के साथ उनके घर में जबरन घुस आए। उस समय घर में केवल उनकी पत्नी मौजूद थीं।
पीड़ित का आरोप है कि बिजली चोरी का आरोप लगाकर महिला के साथ अभद्रता, मारपीट और दुष्कर्म का प्रयास किया गया। महिला के चीख-पुकार मचाने पर आरोपी फरार हो गए। पड़ोसियों के समय पर पहुँचने से एक बड़ी अनहोनी टल सकी।
सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि इतनी गंभीर घटना के बावजूद शाहगंज पुलिस ने पीड़ित की कोई सुनवाई नहीं की। रोहित गौतम का कहना है कि उन्होंने घटना के दिन ही कोतवाली शाहगंज में प्रार्थना पत्र दिया, लेकिन थाना प्रभारी (क्राइम) वीरेंद्र यादव ने उन्हें डाँट-फटकार कर भगा दिया।
घटना को दो दिन से अधिक समय बीत चुका है, फिर भी न तो एफआईआर दर्ज हुई और न ही किसी आरोपी से पूछताछ। सवाल यह है कि
क्या महिला के साथ दुष्कर्म के प्रयास का आरोप भी एफआईआर के लिए काफी नहीं है?
या फिर आरोपी का “विभागीय रसूख” कानून से बड़ा हो गया है?
पुलिस की बेरुखी से हताश होकर पीड़ित ने उत्तर प्रदेश सरकार के जनसुनवाई पोर्टल (आईजीआरएस) पर शिकायत दर्ज कराई है, जिसकी संदर्भ संख्या 40019426006397 है। पीड़ित परिवार का कहना है कि वे लगातार डर और दबाव में जी रहे हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि मामला बिजली विभाग के एक प्रभावशाली अधिकारी से जुड़ा होने के कारण पुलिस जानबूझकर कार्रवाई से बच रही है। यदि आरोपी आम नागरिक होता, तो क्या अब तक गिरफ्तारी नहीं हो चुकी होती?
अब सवाल सीधे पुलिस प्रशासन और जिला अधिकारियों से है—
क्या शाहगंज में कानून सबके लिए बराबर है?
या फिर रसूखदारों के लिए न्याय के दरवाज़े बंद हैं?
पीड़ित ने उच्चाधिकारियों से मांग की है कि मामले में तत्काल एफआईआर दर्ज कराई जाए, पीड़िता को सुरक्षा दी जाए और दोषियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।