पूजा-पाठ के नाम पर अब नहीं चलेगा भ्रम..., विद्वत परिषद ने दी चेतावनी; आचार्य बोले- होगी कानूनी कार्रवाई

Update: 2024-12-30 10:26 GMT

पूजा-पाठ के नाम पर भ्रम फैलाने के मामलों को लेकर काशी विद्वत कर्मकांड परिषद अलर्ट हो गया है। अब ऐसे कृत्य करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। बाबा काशी विश्वनाथ को रजाई ओढ़ाने के मामले को लेकर उन्होंने कहा कि अफवाह पर ध्यान नहीं देना चाहिए।

काशी विद्वत कर्मकांड परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष आचार्य अशोक द्विवेदी ने कहा कि राग-भोग और पूजा के नाम पर भ्रम फैलाने वालों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। सनातन धर्म ही वैदिक धर्म है।

हमारी पूजा पद्धति ऋषि-मुनियों और शास्त्रों से संचालित होती है। पूजा-पाठ में आडंबर और दिखावा के जरिये आम जनता में भ्रम फैलाना गलत है। देवाधिदेव महादेव स्वयं कैलाश के वासी हैं, उनको ठंड लगने की बात कहना गलत है। कैलाशवासी को रजाई ओढ़ाने की क्षमता तो पूरे ब्रह्मांड में किसी की नहीं है। ऐसा करने और कहने वाले दोषी हैं।

राष्ट्रीय अध्यक्ष ने पत्रकारों से बात की। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म और देवाधिदेव महादेव के नाम पर भ्रम फैलाने वालों को कर्मकांड परिषद विधिक कार्रवाई की चेतावनी देता है। सोशल मीडिया के जरिये अफवाह फैलाई जा रही है कि बाबा विश्वनाथ को ठंड लग गई और हम उनको रजाई ओढ़ा रहे हैं, ऐसा नहीं कहना चाहिए। हम ऋतु के अनुसार अपने देवी-देवताओं की पूजा पद्धति का अनुसरण करते हैं। धूप, दीप, नैवेद्य का ऋतु के अनुसार चढ़ाने का विधान है।

जो लोग पूजा पद्धति के नाम पर जनता में भ्रम फैलाते हैं उनको उपासना पद्धति का ज्ञान नहीं है। अखिल भारतीय विद्वत परिषद के राष्ट्रीय महासचिव कामेश्वर उपाध्याय ने कहा कि बाबा बर्फानी को ठंड लगने वाली बात तो हास्यास्पद है। रजाई शब्द ही संस्कृत का नहीं है। हमारे यहां भगवान को सौम्य वस्त्र अर्पित करने का वर्णन है।

मौसम के अनुसार बदलता है बाबा का शृंगार

श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विश्वभूषण मिश्र ने बताया कि बाबा विश्वनाथ के शृंगार की परंपरा है। यह केवल भक्तिभाव से किया जाने वाला भावपूर्ण कार्य है। इससे भक्त अपनी अनुभूतियों के सापेक्ष आराध्य की सेवा करते हैं। इसका कदापि आशय महादेव के किसी प्राकृतिक अथवा अन्य परिवेश से प्रभावित होने का नहीं होता है। मामले का संज्ञान लेकर कार्रवाई की जाएगी। 

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