IPL 2026 विवाद : बांग्लादेशी खिलाड़ी को हटाने पर कथावाचक अनिरुद्धाचार्य के तीखे बयान, खेल, धर्म और बॉलीवुड पर उठे गंभीर सवाल

Update: 2026-01-04 16:25 GMT

रिपोर्ट : विजय तिवारी

नई दिल्ली/कोलकाता।

आईपीएल 2026 की नीलामी के बाद बांग्लादेशी तेज गेंदबाज मुस्तफिजुर रहमान को कोलकाता नाइट राइडर्स (केकेआर) द्वारा खरीदे जाने के फैसले ने देशभर में तीखी बहस को जन्म दे दिया। सोशल मीडिया से लेकर सार्वजनिक मंचों तक इस निर्णय पर सवाल उठे। बढ़ते विवाद और जनभावनाओं को देखते हुए भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने केकेआर को बांग्लादेशी खिलाड़ी को टीम से बाहर करने का निर्देश दिया, जिसके बाद यह मामला और अधिक सुर्खियों में आ गया।

बीसीसीआई के निर्देश के बाद बढ़ा सियासी और सामाजिक विमर्श

सूत्रों के अनुसार, बीसीसीआई ने यह कदम मौजूदा परिस्थितियों, जनआक्रोश और खेल से जुड़े व्यापक सामाजिक प्रभावों को ध्यान में रखते हुए उठाया। केकेआर द्वारा खिलाड़ी को बाहर किए जाने के बाद यह मुद्दा केवल खेल तक सीमित न रहकर धर्म, राजनीति और समाज से जुड़ी बहस में तब्दील हो गया।

कथावाचक अनिरुद्धाचार्य का कड़ा रुख

इस पूरे प्रकरण पर कथावाचक अनिरुद्धाचार्य ने रविवार, 4 जनवरी 2026 को खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि खेल को मित्रता और सौहार्द का माध्यम माना जाता है, लेकिन जब किसी देश में एक विशेष समुदाय के खिलाफ हिंसा और अत्याचार की खबरें लगातार सामने आती हों, तब ऐसे देश के खिलाड़ियों के साथ खेलना नैतिक सवाल खड़े करता है।

उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग भारत से नाम, पहचान और आर्थिक लाभ प्राप्त करते हैं, उन्हें भारतीय समाज की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए।

शाहरुख खान और बॉलीवुड पर टिप्पणी

केकेआर के सह-मालिक और अभिनेता शाहरुख खान को लेकर अनिरुद्धाचार्य ने कहा कि फिल्म उद्योग के कुछ प्रभावशाली लोग खुद को समाज से ऊपर मानने लगते हैं। उनके अनुसार, अपार धन और लोकप्रियता के कारण उनमें यह धारणा बन जाती है कि उनके फैसलों पर कोई सवाल नहीं उठेगा।

उन्होंने कहा कि जब जनता ने विरोध दर्ज कराया, तभी यह स्पष्ट हुआ कि किसी भी बड़े नाम को जनभावनाओं की अनदेखी नहीं करनी चाहिए।

बांग्लादेश में हिंदुओं पर कथित अत्याचार का मुद्दा

अनिरुद्धाचार्य ने अपने बयान में बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के खिलाफ कथित हिंसा, हमलों और उत्पीड़न का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में चुप्पी साधना या केवल खेल को अलग बताकर नजरअंदाज करना उचित नहीं है। उनका मानना है कि धर्म और मानवता के मूल्यों के आधार पर हर प्रकार की हिंसा का विरोध होना चाहिए।

मुस्लिम समुदाय और विचारधारा पर स्पष्ट रुख

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका विरोध किसी समुदाय विशेष से नहीं, बल्कि उन विचारधाराओं और कृत्यों से है जो नफरत और हिंसा को बढ़ावा देती हैं। उन्होंने कहा कि आम हिंदू मुसलमानों से घृणा नहीं करते, बल्कि उन कृत्यों का विरोध करते हैं जिनमें निर्दोष लोगों की जान ली जाती है।

मंदिर–मस्जिद विवाद और सामाजिक सौहार्द

बाबरी मस्जिद और उससे जुड़े नए राजनीतिक बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए अनिरुद्धाचार्य ने कहा कि धार्मिक स्थलों को लेकर टकराव की राजनीति से देश का सामाजिक ताना-बाना कमजोर होता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि मंदिर और मस्जिद दोनों का अस्तित्व शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के साथ संभव है और टकराव की कीमत हमेशा आम जनता को चुकानी पड़ती है।

मनुस्मृति जलाने की घटनाओं पर टिप्पणी

हाल के दिनों में मनुस्मृति जलाने की घटनाओं पर उन्होंने कहा कि बिना किसी ग्रंथ को पढ़े या समझे उसका विरोध करना अज्ञानता को दर्शाता है। उनके अनुसार, किसी भी धार्मिक या ऐतिहासिक ग्रंथ पर राय बनाने से पहले उसका अध्ययन आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि समाज के कुछ वर्गों को जानबूझकर गुमराह किया जा रहा है, जिससे सामाजिक विभाजन बढ़ रहा है।

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