AI, डेटा संप्रभुता और ट्रेड डील पर सियासत तेज: राहुल गांधी के आरोपों से गरमाई बहस, AI समिट से पहले सरकार-विपक्ष आमने-सामने

Update: 2026-02-12 17:18 GMT

रिपोर्ट : विजय तिवारी

नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता Rahul Gandhi के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डेटा संप्रभुता और संभावित भारत-अमेरिका डिजिटल ट्रेड समझौते को लेकर दिए गए बयान के बाद राजनीतिक और तकनीकी हलकों में बहस तेज हो गई है। विभिन्न प्रिंट और डिजिटल मीडिया रिपोर्ट्स में सामने आए मुख्य तथ्यों के अनुसार, राहुल गांधी ने सरकार की डेटा नीति, आईटी सेक्टर के भविष्य और विदेशी टेक कंपनियों के बढ़ते प्रभाव पर गंभीर सवाल उठाए हैं, जबकि सरकार और सत्तारूढ़ पक्ष ने उनके आरोपों को खारिज करते हुए समझौते को देशहित में बताया है।

AI क्रांति पर चेतावनी और अवसर की बात

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि AI क्रांति भारत के लिए अवसर और खतरे दोनों लेकर आई है। उन्होंने दावा किया कि यदि देश समय रहते रणनीति नहीं बनाता है तो आईटी और सर्विस सेक्टर, जो भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत कड़ी माना जाता है, उस पर दबाव बढ़ सकता है और बड़ी संख्या में सॉफ्टवेयर इंजीनियर तथा प्रोफेशनल्स की नौकरियां प्रभावित हो सकती हैं।

उन्होंने डेटा को “AI इंजन का पेट्रोल” बताते हुए कहा कि भारत की विशाल आबादी और उससे पैदा होने वाला डेटा ही देश की सबसे बड़ी ताकत है, जिसे राष्ट्रीय हितों के मुताबिक इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

AI समिट और डिजिटल ट्रेड डील पर उठाए सवाल

राहुल गांधी ने आगामी AI समिट का जिक्र करते हुए कहा कि यह भारत के लिए वैश्विक नेतृत्व दिखाने का अवसर हो सकता था, लेकिन डिजिटल ट्रेड से जुड़े संभावित समझौते के कारण देश की डेटा नीति पर दबाव पड़ सकता है। उनके अनुसार “डिजिटल ट्रेड बाधाओं को हटाने” के नाम पर विदेशी कंपनियों को ज्यादा फायदा मिल सकता है, जिससे भारत के लिए डेटा लोकलाइजेशन, एल्गोरिदम पारदर्शिता और डिजिटल टैक्स जैसे मुद्दे मुश्किल हो सकते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि बड़ी विदेशी टेक कंपनियां पहले से ही सोशल मीडिया, ई-कॉमर्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए भारतीय डेटा पर मजबूत पकड़ बना चुकी हैं।

सरकार और बीजेपी की प्रतिक्रिया

राहुल गांधी के आरोपों के बाद केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने पलटवार करते हुए कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता संतुलित और देशहित में है। वित्त मंत्रालय और सरकार के अन्य प्रतिनिधियों का कहना है कि किसी भी समझौते में राष्ट्रीय हितों और डेटा सुरक्षा से समझौता नहीं किया जाएगा।

सरकार की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया कि भारत वैश्विक तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देने के साथ-साथ अपनी डिजिटल संप्रभुता और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।

विदेश मंत्रालय का आधिकारिक रुख

विदेश मंत्रालय ने मीडिया रिपोर्ट्स में कहा कि प्रस्तावित अंतरिम व्यापार समझौते को लेकर बातचीत जारी है और तथ्यों से जुड़ी जानकारी दोनों देशों की साझा समझ के आधार पर जारी की जाती है। सरकार का कहना है कि वार्ता का उद्देश्य व्यापार और तकनीकी सहयोग को मजबूत करना है, न कि किसी एक पक्ष को अनुचित लाभ देना।

डेटा संप्रभुता बनाम वैश्विक सहयोग – बहस तेज

विशेषज्ञों के मुताबिक, AI और डिजिटल ट्रेड पर चल रही यह बहस भारत की डेटा संप्रभुता, रोजगार और तकनीकी आत्मनिर्भरता से जुड़ी बड़ी नीति चर्चा का हिस्सा बन गई है। विपक्ष जहां डेटा पर राष्ट्रीय नियंत्रण और रोजगार सुरक्षा की चिंता जता रहा है, वहीं सरकार इसे वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की भूमिका मजबूत करने की दिशा में जरूरी कदम बता रही है।

AI, डेटा और डिजिटल ट्रेड को लेकर राहुल गांधी के बयान के बाद राजनीतिक बयानबाज़ी तेज हो गई है। आने वाले समय में AI समिट और भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता के नतीजे तय करेंगे कि डेटा नीति और तकनीकी सहयोग पर देश किस दिशा में आगे बढ़ता है।

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