एप्सटीन फाइलों के खुलासे से फिर चर्चा में अर्चना नाग प्रकरण, क्या ओडिशा में भी अधूरी रह गई जांच?

Update: 2026-02-09 06:57 GMT

रिपोर्ट : विजय तिवारी

अमेरिका में जेफ्री एप्सटीन से जुड़ी फाइलों के ताजा खुलासों ने एक बार फिर वैश्विक स्तर पर सत्ता, प्रभाव और अपराध के संभावित गठजोड़ पर बहस छेड़ दी है। इसी अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम के बीच अर्चना नाग से जुड़ा ओडिशा का चर्चित मामला भी दोबारा सार्वजनिक विमर्श में आ गया है, जहां कभी बड़े खुलासों की उम्मीद जगी थी, लेकिन समय के साथ जांच की दिशा सीमित होती चली गई।

गिरफ्तारी के बाद क्यों मचा था भूचाल

सितंबर 2022 में अर्चना नाग की गिरफ्तारी के साथ ही ओडिशा की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई थी। आरोप सामने आए थे कि वह प्रभावशाली व्यक्तियों के आपत्तिजनक वीडियो और तस्वीरों के जरिए ब्लैकमेलिंग कर धन वसूल रही थी। शुरुआती दौर में इस कथित नेटवर्क के संबंध राजनीति, नौकरशाही और कारोबारी वर्ग तक होने की चर्चाएं तेज रहीं, जिसके चलते मामला राज्य से निकलकर राष्ट्रीय बहस का विषय बन गया।

जांच आगे बढ़ी, पर दायरा सिमटा

प्रकरण की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (SIT) ने डिजिटल उपकरण जब्त किए और कई व्यक्तियों से पूछताछ की। शुरुआती संकेतों में जांच का दायरा व्यापक नजर आया, लेकिन जैसे-जैसे प्रक्रिया आगे बढ़ी, मामला मुख्य रूप से ठगी, ब्लैकमेलिंग और अवैध वसूली तक सीमित कर दिया गया। जिन बड़े नामों की चर्चा सार्वजनिक मंचों पर होती रही, वे अंततः चार्जशीट में शामिल नहीं हो सके। इसके साथ ही यह मामला हाई-प्रोफाइल जांच से निकलकर सामान्य आपराधिक मुकदमे की श्रेणी में आ गया।

एप्सटीन प्रकरण से तुलना क्यों हो रही है

अमेरिका में एप्सटीन मामले की शुरुआत भी लंबे समय तक सीमित जांच और दबे हुए तथ्यों के आरोपों के साथ हुई थी। वर्षों बाद दस्तावेज और फाइलें सामने आईं, जिनमें कई प्रभावशाली हस्तियों के नाम उजागर हुए। इसी संदर्भ में अर्चना नाग प्रकरण को लेकर यह सवाल फिर उठ रहा है कि क्या यहां भी कुछ तथ्य ऐसे हैं, जो अभी तक जांच के दायरे से बाहर रह गए हैं।

चार्जशीट के बाद सुस्त पड़ी बहस

आरोपपत्र दाखिल होने के बाद मामला न्यायिक प्रक्रिया में चला गया। इसके साथ ही नए खुलासों और सार्वजनिक चर्चाओं की रफ्तार धीमी होती चली गई। मीडिया और राजनीतिक बहस का फोकस अन्य समसामयिक मुद्दों पर स्थानांतरित हो गया, जिससे यह प्रकरण धीरे-धीरे चर्चा के केंद्र से बाहर होता गया।

अब भी बने हुए हैं सवाल

प्रशासन का दावा है कि मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी और नेटवर्क के विरुद्ध कार्रवाई के साथ जांच पूरी कर ली गई है। इसके बावजूद आम जनमानस के बीच यह प्रश्न बना हुआ है कि क्या जांच सभी संभावित कड़ियों तक पहुंच सकी, या फिर मामला उस मोड़ पर ठहर गया जहां आगे बढ़ना जटिल था।

एप्सटीन फाइलों के हालिया खुलासे यह संकेत देते हैं कि दबा हुआ सच समय के साथ सामने आ सकता है। अर्चना नाग मामला फिलहाल अदालत के विचाराधीन है, लेकिन यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि भविष्य में कोई नया तथ्य या दस्तावेज इस प्रकरण को फिर से व्यापक राष्ट्रीय बहस का विषय बनाता है या नहीं।

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