ITR Refund : 31 दिसंबर की समय-सीमा चूकने पर भी नहीं टूटेगी उम्मीद, अब भी मिल सकता है अटका हुआ टैक्स रिफंड
रिपोर्ट : विजय तिवारी
नई दिल्ली।
आयकर रिटर्न (ITR) और टैक्स रिफंड को लेकर 31 दिसंबर की समय-सीमा समाप्त होने के बाद देशभर के लाखों करदाता असमंजस में हैं। कई लोगों को आशंका है कि डेडलाइन निकलते ही उनका रिफंड हमेशा के लिए अटक गया है। हालांकि, आयकर कानून, विभागीय प्रक्रियाओं और ताजा अपडेट्स को समग्र रूप से देखने पर यह साफ हो जाता है कि अधिकांश मामलों में रिफंड का रास्ता पूरी तरह बंद नहीं हुआ है। सही प्रक्रिया और जरूरी सुधार के जरिए अब भी अटका हुआ टैक्स रिफंड प्राप्त किया जा सकता है।
31 दिसंबर की डेडलाइन क्यों थी महत्वपूर्ण
आयकर विभाग ने आकलन वर्ष से जुड़े कई मामलों में 31 दिसंबर तक की समय-सीमा तय की थी, जिसमें—
ITR में हुई त्रुटियों का सुधार (Rectification)
डिफेक्टिव घोषित रिटर्न का निस्तारण
सिस्टम या विभाग द्वारा भेजे गए नोटिस का जवाब
लंबित अपडेट या स्पष्टीकरण
शामिल थे।
जो करदाता तय समय तक ये प्रक्रियाएं पूरी नहीं कर पाए, उनके रिफंड की प्रक्रिया पर असर जरूर पड़ा, लेकिन इससे रिफंड पूरी तरह समाप्त नहीं हो जाता।
अब तक सामने आई वास्तविक स्थिति
ताजा आंकड़ों और करदाताओं के मामलों से यह सामने आया है कि—
बड़ी संख्या में रिफंड केवल ITR के ई-वेरिफिकेशन न होने के कारण रुके हुए हैं
कई मामलों में बैंक खाता प्री-वैलिडेशन या IFSC त्रुटि के चलते रिफंड फेल हुआ
AIS और फॉर्म 26AS से आय या TDS का मिलान न होने पर रिफंड होल्ड कर दिया गया
कुछ रिफंड सिस्टम जनरेटेड एडजस्टमेंट या ऑटोमैटिक कैल्कुलेशन सुधार के कारण अटके हैं
आधार–पैन लिंकिंग में गड़बड़ी भी रिफंड अटकने की बड़ी वजह बनी
टैक्स रिफंड अटकने के मुख्य कारण
रिफंड आमतौर पर इन कारणों से अटकता है—
ITR में आय, टैक्स या बैंक विवरण की गलती
ई-वेरिफिकेशन अधूरा रहना
नोटिस या डिफेक्टिव रिटर्न का समय पर जवाब न देना
TDS डेटा का AIS/26AS से मेल न खाना
बैंक खाता बंद होना या गलत विवरण
डेडलाइन चूकने के बाद भी क्या विकल्प हैं?
आयकर अधिनियम के तहत करदाताओं के पास अब भी कई वैधानिक विकल्प मौजूद हैं—
सेक्शन 154 के तहत रेक्टिफिकेशन
यदि रिफंड की गणना में गलती, डेटा मिसमैच या तकनीकी त्रुटि है, तो करदाता ऑनलाइन रेक्टिफिकेशन एप्लीकेशन फाइल कर सकते हैं। इसके जरिए पुराने रिटर्न में सुधार संभव है।
डिफेक्टिव ITR का समाधान
कुछ मामलों में, यदि रिटर्न को पहले डिफेक्टिव घोषित किया गया था, तो परिस्थितियों के आधार पर सुधार का अवसर अब भी मिल सकता है।
ई-वेरिफिकेशन और बैंक वेरिफिकेशन पूरा करना
कई रिफंड केवल औपचारिक कारणों से अटके हैं।
ITR ई-वेरिफाई करते ही
बैंक खाता प्री-वैलिडेट करते ही
रिफंड प्रक्रिया दोबारा सक्रिय हो सकती है।
ग्रिवेंस (शिकायत) दर्ज करने का अधिकार
सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद भी यदि रिफंड जारी नहीं हुआ है, तो करदाता आयकर पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर सकते हैं।
किन परिस्थितियों में रिफंड मिलने में देरी या अड़चन संभव
रिटर्न पूरी तरह अमान्य (Invalid) घोषित हो चुका हो
गंभीर आय छुपाने या गलत जानकारी के कारण मामला जांच में हो
असेसमेंट, स्क्रूटनी या कानूनी विवाद लंबित हो
ऐसे मामलों में रिफंड अंतिम निपटारे के बाद ही जारी होता है।
करदाताओं के लिए जरूरी सलाह
आयकर पोर्टल पर नियमित रूप से Refund Status और Pending Actions जांचें
AIS, 26AS और ITR का आपसी मिलान अवश्य करें
बैंक खाता, IFSC और आधार–पैन लिंकिंग की पुष्टि करें
किसी भी नोटिस या अलर्ट को नजरअंदाज न करें
जरूरी सुधार जल्द से जल्द ऑनलाइन माध्यम से करें
31 दिसंबर की समय-सीमा निकल जाने के बावजूद टैक्स रिफंड को लेकर निराश होने की जरूरत नहीं है। आयकर कानून में दिए गए प्रावधान, रेक्टिफिकेशन और ऑनलाइन प्रक्रियाओं के जरिए आज भी बड़ी संख्या में करदाता अपना अटका हुआ रिफंड प्राप्त कर सकते हैं। सही जानकारी, सतर्कता और समय पर कार्रवाई ही रिफंड पाने की सबसे मजबूत कुंजी है।