70वें जन्मदिन पर मायावती का बड़ा राजनीतिक संदेश, ब्राह्मणों को साधने की कोशिश, गठबंधन पर साफ रुख और सपा-बीजेपी पर तीखा हमला
लखनऊ।
बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) सुप्रीमो और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने अपने 70वें जन्मदिन के अवसर पर एक बार फिर सक्रिय राजनीति में मजबूत वापसी के संकेत दिए हैं। पूरे देश में उनके जन्मदिन को जनकल्याणकारी दिवस के रूप में मनाया गया। इस मौके पर मायावती ने जहां ब्राह्मण समाज को साधने की खुली कोशिश की, वहीं बीजेपी, सपा और कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा।
मायावती ने कहा कि बीएसपी सरकार द्वारा शुरू की गई जनकल्याणकारी योजनाओं से समाज के सभी वर्गों को लाभ मिला है और इसी वजह से आज भी जनता के दिल में बीएसपी की जगह बनी हुई है।
ब्राह्मण समाज को संदेश: बहकावे में न आएं
अपने संबोधन में मायावती ने कहा कि ब्राह्मण समाज की लगातार उपेक्षा हो रही है। उन्होंने दावा किया कि पिछले महीने 2025 के विधानसभा शीतकालीन सत्र के दौरान विभिन्न दलों के ब्राह्मण विधायकों ने खुद अपनी उपेक्षा को लेकर चिंता जताई थी।
उन्होंने कहा,
“बीएसपी ने हमेशा ब्राह्मण समाज को सम्मान और भागीदारी दी है। उन्हें बीजेपी, सपा और कांग्रेस के बहकावे में नहीं आना चाहिए।”
मायावती ने यह भी कहा कि ब्राह्मण समाज को किसी का बाटी-चोखा नहीं चाहिए, बल्कि सम्मानजनक हिस्सेदारी चाहिए, जिसे बीएसपी सरकार बनने पर पूरा किया जाएगा।
क्षत्रिय और अन्य समाज की सुरक्षा का भरोसा
बीएसपी सुप्रीमो ने कहा कि सिर्फ ब्राह्मण ही नहीं, बल्कि क्षत्रिय और अन्य सभी समाजों की सुरक्षा और सम्मान का भी उनकी सरकार में पूरा ध्यान रखा जाएगा।
उन्होंने यह भी दावा किया कि बीएसपी सरकार के दौरान मंदिर, मस्जिद और चर्च सहित किसी भी धार्मिक स्थल को नुकसान नहीं पहुंचने दिया गया।
सपा पर सीधा हमला: गुंडाराज और हमला करने का आरोप
मायावती ने समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला करते हुए कहा कि सपा के शासनकाल में माफिया और गुंडों का राज रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि दलित वर्ग पर सबसे ज्यादा अत्याचार उसी दौर में हुआ।
उन्होंने कहा,
“2 जून को सपा के गुंडों और बदमाशों ने मुझ पर हमला करने का प्रयास किया था, यह बात किसी से छिपी नहीं है।”
मायावती ने यह भी आरोप लगाया कि सपा सरकार में मुस्लिम समाज भी उपेक्षित रहा और यही उनकी तथाकथित पीडीए राजनीति की सच्चाई है।
कानून-व्यवस्था और दंगों पर दावा
पूर्व मुख्यमंत्री ने दावा किया कि बीएसपी सरकार के कार्यकाल में एक भी बड़ा दंगा नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने कानून-व्यवस्था को निष्पक्ष और सख्ती से लागू किया, जिससे प्रदेश में सामाजिक सौहार्द बना रहा।
विकास कार्यों पर केंद्र और राज्य सरकार को घेरा
मायावती ने कहा कि वर्तमान सरकार जिन एक्सप्रेसवे और एयरपोर्ट परियोजनाओं का श्रेय ले रही है, उनकी शुरुआत बीएसपी सरकार के दौरान ही हुई थी।
उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार के विरोधी रवैये के कारण कई योजनाएं आगे नहीं बढ़ पाईं।
दलित और उपेक्षित वर्ग बीजेपी सरकार से परेशान
मायावती ने कहा कि आज दलित, पिछड़े और अन्य उपेक्षित वर्ग बीजेपी सरकार से बेहद नाराज हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता में आने के बाद बीजेपी ने इन वर्गों के हितों की अनदेखी की है।
EVM, SIR और गठबंधन पर साफ रुख
मायावती ने ईवीएम में गड़बड़ी और एसआईआर (Special Intensive Revision) को लेकर गंभीर शिकायतों का जिक्र किया और पार्टी कार्यकर्ताओं से सतर्क रहने की अपील की।
गठबंधन पर उन्होंने स्पष्ट किया कि:
बीएसपी विधानसभा और लोकसभा चुनाव अकेले लड़ेगी
छोटे-बड़े सभी चुनावों में पार्टी का रुख स्पष्ट है
भविष्य में गठबंधन तभी होगा, जब उससे बीएसपी को अपर कास्ट वोटों का ठोस लाभ मिले
उन्होंने कहा,
“गठबंधन करने से लाभ हमेशा दूसरी पार्टी को होता है, इसलिए बीएसपी के हित सर्वोपरि हैं।”
राजनीतिक संदेश साफ
मायावती के इस पूरे संबोधन से यह साफ संकेत मिलता है कि:
बीएसपी 2027 को ध्यान में रखकर सर्वजन राजनीति को फिर से मजबूत करना चाहती है
ब्राह्मण, दलित और अल्पसंख्यक वोट बैंक को एक साथ जोड़ने की कोशिश हो रही है
पार्टी किसी भी कीमत पर अपनी स्वतंत्र पहचान से समझौता नहीं करेगी