2027 में 2007 वाला फॉर्मूला- मायावती ने ब्राह्मण नेता को दिया सबसे पहला टिकट

Update: 2026-02-25 06:03 GMT

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने में अभी एक साल का वक्त रह गया है और सभी प्रमुख दल अभी से सियासी समीकरण सेट करने में लग गए हैं. लंबे समय से सत्ता से दूर मायावती इस बार काफी सक्रिय दिख रही हैं. अकेले ही यूपी में विधानसभा चुनाव लड़ने का ऐलान करने वाली मायावती ने पार्टी प्रत्याशियों के नाम की घोषणा शुरू कर दी है. चुनाव में ब्राह्मण की भूमिका को देखते हुए मायावती ने पहला टिकट ब्राह्मण बिरादरी के नेता को थमाया है.

मायावती की अगुवाई वाली बहुजन समाज पार्टी (BSP) ने यूपी चुनाव के लिए पहला टिकट आशीष पांडेय को दिया है. उन्हें जालौन जिले की माधौगढ़ सीट से पार्टी का प्रत्याशी बनाया गया है. साथ ही उन्हें माधौगढ़ सीट का प्रभारी भी बनाया गया है. माधौगढ़ बीएसपी का गढ़ माना जाता है. पार्टी जल्द ही चुनाव के लिए कई अन्य प्रभारियों के नाम का भी ऐलान करेगी. पार्टी 2017 के चुनाव में यहां पर दूसरे स्थान पर रही थी. पार्टी सूत्रों का कहना है कि बीएसपी होली के बाद कानपुर मंडल की 5 और सीटों पर प्रभारियों की घोषणा करेगी. चुनाव तारीख के ऐलान से पहले घोषित प्रभारियों को ही पार्टी अपना प्रत्याशी बनाती है.

यूपी चुनाव के लिए पहला टिकट ब्राह्मण को देकर मायावती ने वर्तमान में खुद को उपेक्षित समझने वाली इस बिरादरी को साधने की कोशिश की है. वह पहले भी ब्राह्मण समाज की उपेक्षा पर चिंता जता चुकी हैं. पिछले कुछ समय से मायावती फिर से ब्राह्मण समाज को साधने में जुटी हुई हैं. 7 फरवरी को पार्टी की अहम बैठक के बाद मायावती ने कहा था कि बीजेपी सरकार में सभी वर्गों के लोग त्रस्त हैं लेकिन उपेक्षा और असम्मान के खिलाफ ब्राह्मण समाज अधिक मुखर है.

मायावती ने तब कहा था, “यहां सोचने की असल बात यह है कि उच्च जातियों खासकर ब्राह्मण बिरादरी को जितना आदर-सम्मान, पद और सुरक्षा सभी कुछ बीएसपी प्रमुख की ओर से पार्टी और सरकार के स्तर पर दिया गया क्या उतना कोई दूसरी पार्टी अथवा सरकार उन्हें दे पायी है?

‘घूसखोर पंडत’ पर भी साधा था निशाना

पिछले दिनों अपने नाम को लेकर चर्चा में आई फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ में ब्राह्मण समाज के कथित अपमान को लेकर मायावती ने नाराजगी जताई और इसकी तीखी आलोचना की थी, साथ ही यह मांग भी की कि इस जातिसूचक फिल्म पर केंद्र सरकार की ओर से तुरंत बैन लगा देना चाहिए.

बीएसपी प्रमुख मायावती ने 6 फरवरी को अपने आधिकारिक X पर अपने एक पोस्ट में कहा, “यह बड़े दुख और चिंता की बात है कि पिछले कुछ समय से अकेले उत्तर प्रदेश में ही नहीं बल्कि अब तो फिल्मों में भी पंडत को घूसखोर आदि बताकर पूरे देश में इनका अपमान तथा अनादर किया जा रहा है. इस वजह से समूचे ब्राह्मण समाज में खासा रोष व्याप्त है, इसकी हमारी पार्टी भी कड़े शब्दों में निंदा करती है.”

जन्मदिन पर भी बयां किया ब्राह्मणों का दर्द

इससे पहले पिछले महीने 15 जनवरी को अपने 70वें जन्मदिन के अवसर पर मायावती ने कहा था कि बीएसपी ने हमेशा से ही ब्राह्मण बिरादरी को पूरा सम्मान और प्रतिनिधित्व दिया है. इस बिरादरी को साधने के मकसद से मायावती ने तब बताया था कि शीतकालीन सत्र के दौरान भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी), समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस से जुड़े ब्राह्मण बिरादरी के कई नेताओं ने उनसे मुलाकात की और अपने समुदाय की उपेक्षा पर नाराजगी जताई थी. तब मायावती ने यूपी में बीएसपी के शासनकाल का जिक्र किया और याद दिलाया कि बीएसपी सरकार में दलित समुदाय के साथ-साथ अन्य समुदायों के लिए भी काफी काम किया गया.

मायावती ने पहले ही ऐलान कर रखा है कि उनकी बहुजन समाज पार्टी (BSP) उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में अकेले ही मैदान में उतरेगी. मायावती और उनकी पार्टी का ब्राह्मण बिरादरी से प्रेम कोई नया नहीं है. इससे पहले साल 2007 में बीएसपी ने ब्राह्मण बिरादरी के प्रति प्रेम और स्नेह दिखाया था. तब पार्टी ने “हाथी नहीं गणेश है, ब्रह्मा-विष्णु महेश है” जैसे कई नारों के जरिए ब्राह्मणों को लुभाया था.


साल 2007 के चुनाव में मायावती ने शानदार सोशल इंजीनियरिंग के जरिए यूपी की सत्ता पर अकेले कब्जा जमाया था. वह परंपरागत दलित वोटों के साथ-साथ ब्राह्मण वोटरों को लेकर मैदान में उतरीं और इससे विपक्षी दलों को करारी हार का सामना करना पड़ा. तब मायावती पहली बार पूर्ण बहुमत के साथ यूपी की सत्ता में आई थीं. अब मायावती उसी ब्राह्मण और दलित सोशल इंजीनियरिंग के फॉर्मूले को आजमाना चाह रही हैं.

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