NIOS बना “छोटा व्यापमं” का अड्डा? समाजवादी पार्टी ने संसद की शिक्षा समिति के अध्यक्ष से CBI जांच की निगरानी व कठोर कार्रवाई की मांग की

Update: 2026-02-23 10:24 GMT

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री यश भारतीय ने राज्यसभा सदस्य एवं संसद की शिक्षा समिति के अध्यक्ष माननीय दिग्विजय सिंह से भेंट कर एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा, जिसमें भारत सरकार के अधीन संचालित राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (NIOS) में व्याप्त कथित घोटालों, नकल माफिया और प्रशासनिक संरक्षण के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

ज्ञापन में कहा गया है कि शिक्षा मंत्रालय के अधीन संचालित यह राष्ट्रीय संस्था मध्य प्रदेश में “छोटा व्यापमं” मॉडल पर संचालित होती दिखाई दे रही है। यदि केंद्र सरकार का संस्थान ही भ्रष्टाचार से ग्रस्त होगा, तो देश के गरीब और ड्रॉप-आउट छात्रों का भविष्य कौन सुरक्षित करेगा?

चौंकाने वाले आरोप

1️⃣ 1,200 अनुपस्थित छात्र पास कैसे?

वर्ष 2017 में सीहोर, रतलाम और उमरिया में लगभग 1,200 अनुपस्थित छात्रों को पास घोषित किए जाने का मामला सामने आया। सीबीआई चार्जशीट में उत्तर पुस्तिकाएं तक जलाए जाने का उल्लेख बताया गया है। सवाल यह है कि बिना प्रशासनिक संरक्षण के इतना बड़ा खेल कैसे संभव हुआ?

2️⃣ “गारंटी पास” का रैकेट

मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों में बाहरी राज्यों के छात्रों से ₹25,000–30,000 लेकर पास कराने का कथित खेल चल रहा है। क्या NIOS शिक्षा का मंच है या दलालों का अड्डा?

3️⃣ भोपाल ODES केंद्र बंद – छात्रों से अन्याय

कोविड के बाद से भोपाल में ‘ऑन डिमांड एग्जामिनेशन सिस्टम’ (ODES) केंद्र बंद पड़ा है। केंद्र सरकार का संस्थान होने के बावजूद इसे पुनः शुरू न करना प्रशासनिक विफलता का प्रमाण है।

4️⃣ स्टडी सेंटरों का आर्थिक गला घोंटा गया

वर्षों से भुगतान लंबित होने के कारण अध्ययन केंद्र बंदी की कगार पर हैं। यही केंद्र गरीब, ग्रामीण और ड्रॉप-आउट छात्रों की शिक्षा की रीढ़ हैं। क्या सरकार इन छात्रों को शिक्षा से वंचित करना चाहती है?

5️⃣ प्रमाणपत्र की साख पर संकट

यदि नियमित कक्षाएं और प्रायोगिक कार्य ही प्रभावित हैं, तो व्यावसायिक परिषदों में NIOS प्रमाणपत्र की मान्यता पर गंभीर प्रश्न खड़े हो सकते हैं। इससे लाखों छात्रों का भविष्य अधर में लटक सकता है।

समाजवादी पार्टी की स्पष्ट मांग

मध्य प्रदेश में पिछले पाँच वर्षों के परिणामों का उच्चस्तरीय थर्ड-पार्टी ऑडिट

भ्रष्टाचार को संरक्षण देने वाले अधिकारियों की पहचान और तत्काल निलंबन

भोपाल ODES केंद्र की तुरंत बहाली

सभी लंबित भुगतान तत्काल जारी किए जाएं

CBI जांच की प्रगति सार्वजनिक की जाए

 

“यह केवल परीक्षा घोटाले का मामला नहीं है, यह गरीब और पिछड़े छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ है। यदि शिक्षा मंत्रालय के अधीन संचालित संस्थान में ही भ्रष्टाचार पनपेगा, तो यह लोकतंत्र और शिक्षा व्यवस्था दोनों के लिए शर्मनाक है। दोषियों को हर हाल में सजा मिलनी चाहिए।”

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