देशभर में मतदाता सूची शुद्धिकरण पर फोकस - यूपी में SIR के बाद ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से 2.89 करोड़ नाम हटे, 18.70% कटौती

Update: 2026-01-06 14:35 GMT

रिपोर्ट : विजय तिवारी

नई दिल्ली/लखनऊ।

देश में निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने की दिशा में भारत निर्वाचन आयोग द्वारा चलाए जा रहे मतदाता सूची शुद्धिकरण अभियान के तहत उत्तर प्रदेश से जुड़े अहम और दूरगामी असर वाले आंकड़े सामने आए हैं। स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के बाद राज्य की ड्राफ्ट मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर संशोधन किया गया है, जिसमें करीब 2.89 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। यह संख्या राज्य की कुल मतदाता आबादी का लगभग 18.70 प्रतिशत है।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने बताया कि SIR प्रक्रिया पूरी होने के बाद उत्तर प्रदेश में अब कुल मतदाता संख्या लगभग 12 करोड़ 55 लाख दर्ज की गई है। यह संशोधन ड्राफ्ट सूची के स्तर पर किया गया है, जिस पर दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया अभी शेष है।

किन कारणों से हटे इतने बड़े पैमाने पर नाम?

निर्वाचन विभाग के अनुसार, ड्राफ्ट सूची से हटाए गए नामों के पीछे स्पष्ट और तकनीकी आधार हैं। इनमें मुख्य रूप से—

मृत मतदाताओं के नाम

स्थायी रूप से अन्य स्थानों पर स्थानांतरित हो चुके मतदाता

एक से अधिक जगह पंजीकरण (डुप्लीकेट एंट्री)

अपात्र या अप्रमाणित प्रविष्टियाँ शामिल हैं।

अधिकारियों का कहना है कि यह कदम किसी भी तरह से मताधिकार सीमित करने के लिए नहीं, बल्कि सूची को यथार्थ, अद्यतन और विश्वसनीय बनाने के लिए उठाया गया है।

SIR अभियान का राष्ट्रीय महत्व

स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन को निर्वाचन आयोग देशभर में मतदाता सूची की गुणवत्ता सुधारने का एक अहम औजार मानता है। इस प्रक्रिया के तहत—

बूथ लेवल ऑफिसरों द्वारा घर-घर सत्यापन,

मतदाताओं के दस्तावेजों का भौतिक और डिजिटल मिलान,

मृतक रिकॉर्ड, माइग्रेशन डेटा और डुप्लीकेट एंट्री का क्रॉस-चेक,

और संदिग्ध प्रविष्टियों का फील्ड वेरिफिकेशन किया जाता है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, बड़े राज्यों में इस तरह का व्यापक सत्यापन फर्जी मतदान की संभावना को काफी हद तक कम करता है।

ड्राफ्ट सूची अंतिम नहीं, नागरिकों को मिलेगा पूरा मौका

निर्वाचन आयोग और राज्य निर्वाचन कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि यह सूची ड्राफ्ट है। जिन मतदाताओं का नाम—

गलती से हट गया हो,

नाम, पता या अन्य विवरण में त्रुटि हो,

या नया नाम जुड़वाना हो,

उन्हें दावे-आपत्तियाँ दर्ज कराने का पूरा अवसर दिया जाएगा। सभी दावों और आपत्तियों के निस्तारण के बाद ही अंतिम मतदाता सूची जारी की जाएगी।

राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल

उत्तर प्रदेश जैसे देश के सबसे बड़े राज्य में मतदाता सूची से करोड़ों नाम हटने के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इस प्रक्रिया पर खास नजर रखी जा रही है। विभिन्न दलों और नागरिक संगठनों ने यह मांग भी दोहराई है कि कोई भी पात्र मतदाता तकनीकी कारणों से वंचित न रहे, और दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता से हो।

मतदाताओं से अपील

निर्वाचन अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की है कि वे—

ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में अपना नाम जरूर जांचें,

किसी भी त्रुटि या नाम कटने की स्थिति में समयसीमा के भीतर आवेदन करें,

और आवश्यक दस्तावेजों के साथ संबंधित निर्वाचन कार्यालय या BLO से संपर्क करें।

उत्तर प्रदेश में SIR के बाद सामने आए आंकड़े यह संकेत देते हैं कि मतदाता सूची को शुद्ध और भरोसेमंद बनाने की दिशा में प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। हालांकि, असली परीक्षा दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया और उसके बाद जारी होने वाली अंतिम मतदाता सूची होगी। चुनाव आयोग का दावा है कि इस पूरी कवायद का लक्ष्य केवल एक है—

हर पात्र नागरिक का नाम सूची में रहे और लोकतंत्र की नींव और मजबूत हो।

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