प्रयागराज : तीर्थराज की पावन भूमि पर 3 जनवरी से माघ मेला, अव्यवस्थाओं पर साधु-संतों का विरोध

Update: 2026-01-02 02:11 GMT

रिपोर्ट : विजय तिवारी

प्रयागराज।

तीर्थराज प्रयाग : गंगा-यमुना के पावन तट पर 3 जनवरी से आरंभ होने जा रहा माघ मेले से पहले व्यवस्थाओं की पोल खुलती नजर आई। अखाड़ों, संत-समाज और विभिन्न धार्मिक संस्थाओं से जुड़े साधु-संतों ने मेले की तैयारियों में गंभीर खामियों का आरोप लगाते हुए सेक्टर कार्यालय के सामने धरना-प्रदर्शन किया और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

संतों का कहना है कि माघ मेले में कल्पवास शुरू होने वाला है, लेकिन अब तक कई सेक्टरों में शिविरों की मूलभूत सुविधाएं अधूरी हैं। बिजली कनेक्शन समय से नहीं दिए गए, कई स्थानों पर नल से पानी नहीं आ रहा और शौचालयों की व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं है। संतों ने आरोप लगाया कि वे पिछले कई दिनों से सेक्टर कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं किया गया।

‘कल्पवासियों को हो रही परेशानी’

धरने पर बैठे साधु-संतों ने कहा कि माघ मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सनातन परंपरा का जीवंत प्रतीक है। ऐसे में यदि साधु-संतों और कल्पवासियों को ही मूलभूत सुविधाओं के लिए भटकना पड़े, तो यह मेले की गरिमा के अनुरूप नहीं है। संतों ने चेताया कि इन अव्यवस्थाओं का सीधा असर देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं पर पड़ेगा।

सेक्टर कार्यालय के बाहर प्रदर्शन

प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में साधु-संत सेक्टर कार्यालय के सामने धरने पर बैठ गए। “बिजली-पानी दो”, “व्यवस्था दुरुस्त करो” जैसे नारों से पूरा इलाका गूंज उठा। संतों ने यह भी कहा कि शिविरों में अंधेरा रहने से सुरक्षा को लेकर भी खतरा बना हुआ है, वहीं सफाई व्यवस्था कमजोर होने से संक्रामक बीमारियों का डर भी सता रहा है।

प्रशासन से तीखी नोकझोंक

धरने के दौरान कुछ समय के लिए प्रशासन और संतों के बीच तीखी बहस भी देखने को मिली। संतों ने स्पष्ट कहा कि वे केवल आश्वासन नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर तत्काल कार्रवाई चाहते हैं। उनका कहना था कि हर साल माघ मेले से पहले ऐसे ही वादे किए जाते हैं, लेकिन समस्याएं जस की तस बनी रहती हैं।

मान-मनौव्वल के बाद खत्म हुआ धरना

काफी देर तक चले प्रदर्शन और मान-मनौव्वल के बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर संतों से वार्ता की। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि बिजली, पानी, शौचालय और सफाई से जुड़ी सभी समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर कराया जाएगा। इसके बाद साधु-संत धरने से उठे, हालांकि उन्होंने चेतावनी दी कि यदि तय समय में व्यवस्थाएं दुरुस्त नहीं हुईं, तो आंदोलन दोबारा किया जाएगा।

मेले की तैयारियों पर सवाल

माघ मेला प्रशासन जहां तैयारियों को अंतिम चरण में बता रहा है, वहीं संत-समाज के इस विरोध ने व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब प्रशासन के लिए चुनौती है कि 3 जनवरी से पहले सभी सुविधाएं पूरी कर श्रद्धालुओं और कल्पवासियों को निर्बाध मेला अनुभव दिया जा सके।

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