राज्यसभा चुनाव 2026: BSP साफ, विपक्ष हाफ, दांव पर 6 केंद्रीय मंत्री सहित 71 सांसदों का भविष्य

Update: 2026-01-02 10:58 GMT

संसद के ऊपरी सदन राज्यसभा के लिए यह साल बेहद महत्वपूर्ण है. इस साल राज्यसभा की 71 सीटों पर चुनाव होना है. साथ ही छह केंद्रीय मंत्रियों का कार्यकाल भी इस साल पूरा हो रहा है. लिहाजा इस बात पर भी नजरें लगी रहेंगी कि क्या मोदी मंत्रिपरिषद में फेरबदल होगा. इस प्रस्तावित फेरबदल को भी राज्य सभा चुनावों से जोड़ कर देखा जा रहा है. राज्यसभा में इस साल खाली हो रही 71 सीटों पर चुनाव होने के बाद सबसे शर्मनाक स्थिति मायावती की पार्टी बहुजन समाज पार्टी (BSP) के लिए होगी. क्योंकि लोकसभा के बाद अब राज्यसभा से भी मायवती का सूपड़ा साफ हो जाएगा. दूसरी ओर विपक्ष की ताकत उच्च सदन में और घटेगी.

इन 6 मंत्रियों का राज्यसभा में कार्यकाल होगा पूरा

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी

सहकारी राज्य मंत्री बी एल वर्मा

केंद्रीय संचार एवं उत्तर पूर्व क्षेत्र विकास राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर

रेलवे और खाद्य प्रसंस्करण राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू

अल्पसंख्यक मामलों के राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन

हरदीप पुरी, बीएल वर्मा UP से BJP के राज्यसभा सांसद

इनमें पुरी और वर्मा उत्तर प्रदेश से बीजेपी सांसद हैं और दोनों का राज्य सभा कार्यकाल नवंबर तक है. इस लिहाज से यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इनकी वापसी होती है या नहीं. राज्यसभा से रिटायरमेंट के समय पुरी की उम्र 75 वर्ष के नजदीक भी पहुंच रही होगी. बिट्टू राजस्थान और कुरियन मध्य प्रदेश से सांसद हैं.

रामनाथ ठाकुर बिहार और रामदास आठवले महाराष्ट्र से हैं. माना जा रहा है कि इस साल मोदी मंत्रिपरिषद में फेरबदल हो सकता है. ऐसे में इन छह मंत्रियों के भविष्य का फैसला भी हो सकता है.

रिटायर होने वाले 71 में से 30 सांसद BJP के

अभी के आंकड़ों के हिसाब से इन 71 सीटों में सबसे अधिक 30 सांसद भारतीय जनता पार्टी के हैं. बीजेपी राज्य सभा में इस समय अपने ऐतिहासिक सर्वाधिक स्तर 103 पर है. इस साल के अंत तक राज्य सभा के चुनाव के बाद यह संख्या और बढ़ सकती है.

कांग्रेस के आठ सांसद भी रिटायर हो रहे हैं जिनमें खुद पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे शामिल हैं. इनके अलावा क्षेत्रीय दलों के सांसद रिटायर हो रहे हैं जिनमें बीजेपी के सहयोगी दलों के सांसद भी हैं.पश्चिम बंगाल से 5 सांसद अप्रैल में रिटायर होंगे. ये सभी तृणमूल कांग्रेस के हैं. अन्य चुनावी राज्य तमिलनाडु से भी छह सांसद अप्रैल में रिटायर हो रहे हैं.असम से तीन सांसद इस साल अप्रैल में रिटायर हो रहे हैं. इन तीनों राज्यों में इसी साल विधानसभा का चुनाव होना है.

सबसे अधिक 10 सांसद UP से रिटायर हो रहे हैं. इनमें BJP के 8 और सपा तथा बसपा के एक-एक सांसद हैं. मौजूदा संख्या के हिसाब से BJP के 7 और सहयोगी दलों का एक तथा सपा के दो उम्मीदवार चुने जा सकते हैं.

बदहाल BSP: लोकसभा के बाद अब राज्यसभा में भी जीरो

सबसे चौंकाने वाली बात यह होगी कि बहुजन समाज पार्टी (BSP) का कोई सांसद राज्यसभा में नहीं होगा. लोकसभा में पहले ही बसपा का कोई सांसद नहीं है. यानी दोनों सदनों में बसपा का कोई सांसद नहीं रहेगा. 1984 में बीएसपी की स्थापना के बाद 1989 से लगातार संसद में बीएसपी की नुमाइंदगी रही है. यानी 1989 के बाद से पहली बार ऐसा होगा जब बीएसपी का कोई सांसद नहीं रहेगा. यह पार्टी के लिए ऐतिहासिक संकट माना जा रहा है.

दलबदल और क्रॉस वोटिंग की भी आशंका

विधानसभा चुनाव से ठीक पहले होने वाले उत्तर प्रदेश के इस राज्यसभा चुनाव में बड़े पैमाने पर दलबदल और क्रॉस वोटिंग भी देखने को मिल सकती है.वहीं बिहार में 5 सीटों पर चुनाव होगा और महागठबंधन बिना AIMIM के समर्थन के अपना उम्मीदवार जिताने की स्थिति में नहीं है. अगर AIMIM समर्थन दे तो NDA अपने पांचों उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित कर सकता है. ऐसे में बिहार का राज्य सभा चुनाव भी काफी दिलचस्प होगा.

कांग्रेस से खरगे, दिग्विजय, सिंघवी जैसे नेता मैदान में

कांग्रेस के लिए अपने दिग्गज नेताओं जैसे मल्लिकार्जुन खरगे, दिग्विजय सिंह, अभिषेक मनु सिंघवी आदि को फिर से राज्यसभा भेजने के बारे में विचार करना होगा. वहीं यह भी देखना होगा कि जेडीयू राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश को फिर मौका देगी या नहीं?

अभी राज्यसभा में NDA के 126 सांसद, कांग्रेस के 27

फिलहाल राज्यसभा में एनडीए के 126 सांसद हैं. ऐसे में इस साल एनडीए की यह संख्या और बढ़ने की संभावना है. वहीं कांग्रेस के अभी 27 सांसद हैं और ऐसा लगता है कि इस साल के राज्यसभा चुनावों के बाद भी कांग्रेस ऊपरी सदन में नेता विपक्ष की कुर्सी अपने पास रखने में कामयाब रहेगी. एक मनोनीत सांसद सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई का कार्यकाल भी इस साल पूरा हो रहा है.

पूर्व पीएम देवेगौड़ा का कार्यकाल भी हो रहा समाप्त

पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवेगौड़ा का कार्यकाल भी इस साल पूरा हो रहा है. कर्नाटक की मौजूदा स्थिति के अनुसार उनकी पार्टी JDS राज्यसभा की कोई सीट जीतने की स्थिति में नहीं है. BJP जरूर एक सीट जीत सकती है. पर क्या बीजेपी 92 वर्ष के देवेगौड़ा को गठबंधन धर्म का सम्मान रखते हुए फिर राज्य सभा भेजेगी. या वे खुद अपनी उम्र को देखते हुए फिर राज्यसभा आने के बारे में विचार करेंगे.

अगर ऐसा नहीं होता है तो संसद में लंबे समय बाद ऐसा होगा जब दोनों सदनों में से किसी में भी कोई पूर्व प्रधानमंत्री सदस्य नहीं होगा. 

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