प्रयागराज | मौनी अमावस्या पर संगम मार्ग बना रणक्षेत्र, शंकराचार्य का रथ रोके जाने से तनाव

Update: 2026-01-18 06:33 GMT

रिपोर्ट : विजय तिवारी

मौनी अमावस्या के पावन स्नान पर्व पर प्रयागराज में उस समय गंभीर तनाव की स्थिति बन गई, जब ज्योतिष पीठाधीश्वर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के रथ और उनके साथ चल रहे जुलूस को पुलिस एवं मेला प्रशासन ने संगम क्षेत्र से पहले ही रोक दिया। करोड़ों श्रद्धालुओं की मौजूदगी, सख्त सुरक्षा प्रबंध और भीड़ नियंत्रण को लेकर लागू दिशा-निर्देशों के बीच की गई इस कार्रवाई के बाद संगम मार्ग और आसपास के इलाकों में अफरातफरी फैल गई।

घटनाक्रम

मौनी अमावस्या पर तड़के से ही संगम तट पर स्नान के लिए भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचने लगे थे। इसी दौरान शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद अपने समर्थक साधु-संतों और भक्तों के साथ रथ पर सवार होकर संगम स्नान के लिए निकले। संगम मार्ग पर पहुंचते ही पुलिस ने रथ और जुलूस को आगे बढ़ने से रोक दिया। प्रशासन की ओर से स्पष्ट किया गया कि संगम क्षेत्र में रथ, राजसी जुलूस या बड़े काफिलों की अनुमति नहीं है और केवल सीमित संख्या में लोगों के साथ पैदल स्नान की व्यवस्था तय की गई है।

पुलिस ने शंकराचार्य से आग्रह किया कि वे रथ से उतरकर कुछ लोगों के साथ पैदल संगम जाकर स्नान करें। इस पर शंकराचार्य और उनके समर्थकों ने आपत्ति जताई और प्रशासनिक रवैये को मनमाना बताया।

टकराव और हिरासत

रथ रोके जाने के बाद समर्थकों और साधु-संतों में नाराजगी फैल गई। देखते ही देखते पुलिस और समर्थकों के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई, जो धक्का-मुक्की और हल्की झड़प में बदल गई। हालात बिगड़ने की आशंका को देखते हुए पुलिस ने 20 से अधिक साधु-संतों को हिरासत में ले लिया। इसके बाद संगम क्षेत्र में सुरक्षा और कड़ी कर दी गई।

बैरिकेडिंग को नुकसान

तनाव के दौरान शंकराचार्य के समर्थकों ने पांटून पुल संख्या चार के पास बैरिकेडिंग को नुकसान पहुंचाया। सूचना वायरलेस पर प्रसारित होते ही भारी संख्या में पुलिस बल और वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। कुछ ही देर में पूरा संगम क्षेत्र पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया।

वरिष्ठ अधिकारी मौके पर

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए गृह सचिव, मंडलायुक्त, पुलिस आयुक्त और मेला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने शंकराचार्य और उनके प्रतिनिधियों से बातचीत कर हालात शांत करने का प्रयास किया। प्रशासनिक स्तर पर शासन से दिशा-निर्देश लेने की प्रक्रिया भी शुरू की गई।

शंकराचार्य के आरोप

घटना के बाद शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने पुलिस और मेला प्रशासन पर मनमानी, तानाशाही और संतों के अपमान के आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि उनके साथ आए साधु-संतों के साथ अभद्रता और मारपीट की गई, जिसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। इसी विरोध में उन्होंने संगम स्नान करने से इन्कार कर दिया और समर्थकों के साथ संगम से पहले ही बैठ गए। उनका कहना था कि संत-समाज के सम्मान से जुड़े मामलों में किसी भी तरह का समझौता संभव नहीं है।

प्रशासन का पक्ष

प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि मौनी अमावस्या पर संगम क्षेत्र में अभूतपूर्व भीड़ थी और किसी भी प्रकार के जुलूस या रथ की अनुमति देने से भगदड़ जैसी स्थिति बन सकती थी। इसी कारण पूर्व निर्धारित नियमों के तहत कार्रवाई की गई। अधिकारियों के अनुसार, प्राथमिकता श्रद्धालुओं की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की है।

मौजूदा हालात

घटना के बावजूद संगम घाटों पर स्नान सुरक्षा व्यवस्था के बीच जारी रहा। अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती के साथ स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। फिलहाल कानून-व्यवस्था नियंत्रण में बताई जा रही है, हालांकि यह घटनाक्रम बड़े स्नान पर्वों के दौरान धार्मिक आयोजनों और प्रशासनिक प्रबंधन के बीच समन्वय की कमी को एक बार फिर उजागर करता है।

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