फर्जी एटीएस अधिकारी बन साइबर ठगों ने भाजपा एमएलसी को किया कॉल, ‘डिजिटल अरेस्ट’ का डर दिखाकर डेढ़ घंटे तक दबाव; सतना से पंजीकृत नंबर आया सामने

Update: 2026-03-06 16:21 GMT


रिपोर्ट : विजय तिवारी

सुल्तानपुर, उत्तर प्रदेश। सुल्तानपुर में साइबर ठगी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें अज्ञात ठगों ने खुद को मुंबई एटीएस और क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताकर भाजपा के विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) शैलेंद्र प्रताप सिंह को फोन कर डराने की कोशिश की। आरोप है कि ठगों ने “डिजिटल अरेस्ट” का हवाला देकर उन्हें लगभग डेढ़ घंटे तक फोन पर उलझाए रखा और गंभीर कार्रवाई की चेतावनी देते हुए मानसिक दबाव बनाने का प्रयास किया। मामले की शिकायत मिलने के बाद साइबर क्राइम पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार घटना 2 मार्च की है। दोपहर करीब 12 बजकर 22 मिनट से 1 बजकर 39 मिनट के बीच एमएलसी के मोबाइल फोन पर अज्ञात नंबरों से कई कॉल आए। कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को मुंबई एटीएस क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताते हुए कहा कि एक गंभीर मामले में उनका नाम सामने आया है और इस संबंध में पूछताछ की जाएगी। बातचीत के दौरान आरोपी ने कथित “डिजिटल अरेस्ट” का जिक्र करते हुए कार्रवाई की धमकी दी और लगातार बातचीत कर उन्हें मानसिक रूप से दबाव में लेने की कोशिश करता रहा।

एमएलसी शैलेंद्र प्रताप सिंह को कुछ देर बाद कॉल की सच्चाई पर संदेह हुआ। इसके बाद उन्होंने तत्काल स्थानीय पुलिस से संपर्क किया और पूरे घटनाक्रम की जानकारी देते हुए लिखित शिकायत दी। तहरीर के आधार पर साइबर क्राइम ब्रांच थाने में अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।

जांच में सतना से जुड़ा मोबाइल नंबर

साइबर थाना प्रभारी के अनुसार शुरुआती तकनीकी जांच में यह सामने आया है कि जिस मोबाइल नंबर से कॉल की गई थी, वह मध्य प्रदेश के सतना जिले की एक महिला के नाम पर पंजीकृत है। इससे यह संकेत मिला है कि साइबर अपराधियों ने किसी दूसरे व्यक्ति के नाम पर पंजीकृत नंबर का इस्तेमाल कर खुद को जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर एमएलसी को भ्रमित करने और ठगी का प्रयास किया।

तकनीकी साक्ष्यों की जांच जारी

पुलिस ने कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच शुरू कर दी है। साइबर टीम यह पता लगाने में जुटी है कि कॉल किस स्थान से किए गए और इस पूरे नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल हो सकते हैं। संदिग्ध मोबाइल नंबरों को ट्रेस करने के साथ ही साइबर अपराधियों तक पहुंचने के लिए विशेष टीमें भी गठित की गई हैं।

डिजिटल अरेस्ट की बात को बताया झांसा

सीओ नगर सौरभ सामंत ने बताया कि एमएलसी को वास्तव में किसी प्रकार का “डिजिटल अरेस्ट” नहीं किया गया था। अज्ञात कॉल करने वालों ने उन्हें झांसे में लेने और डराने का प्रयास किया था। पुलिस का कहना है कि शिकायत के आधार पर दर्ज मुकदमे की गंभीरता से जांच की जा रही है और जल्द ही आरोपियों की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

पुलिस अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि यदि कोई खुद को पुलिस, एटीएस, सीबीआई या किसी अन्य जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर फोन पर “डिजिटल अरेस्ट” या कार्रवाई की धमकी देता है, तो घबराने के बजाय तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन या साइबर हेल्पलाइन को सूचना दें। ऐसे मामलों में सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव माना जा रहा है।

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