भारत में एचएमपीवी वायरस का खतरा: सतर्कता बरतना अनिवार्य

Update: 2025-01-06 05:53 GMT


नई दिल्ली:

एक नए वायरस एचएमपीवी (ह्यूमन मेटाप्नीमोवायरस) ने दुनिया भर में स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। भारत में इस वायरस के प्रभाव को लेकर जागरूकता फैलाने की आवश्यकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत के लोग समय रहते सावधानी नहीं बरतते, तो यह वायरस बड़े स्तर पर जनजीवन को प्रभावित कर सकता है।

एचएमपीवी वायरस क्या है?

एचएमपीवी एक श्वसन वायरस है, जो सर्दी-जुकाम जैसे लक्षणों से लेकर गंभीर फेफड़ों की बीमारियां जैसे निमोनिया और ब्रोंकाइटिस तक का कारण बन सकता है। यह वायरस मुख्य रूप से कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले व्यक्तियों, छोटे बच्चों और बुजुर्गों को प्रभावित करता है।

एचएमपीवी का आरंभ और प्रसार

एचएमपीवी वायरस की पहचान पहली बार 2001 में नीदरलैंड में हुई थी। हालांकि, माना जाता है कि यह वायरस पिछले 50 सालों से मौजूद है। यह वायरस मुख्य रूप से संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने से फैलता है। अब तक यह वायरस विभिन्न देशों में पाया गया है और लाखों लोग इससे प्रभावित हो चुके हैं।

भारत में क्या खतरा है?

भारत की बड़ी आबादी, घनी बस्तियां, और स्वास्थ्य सेवाओं तक सीमित पहुंच इस वायरस के तेजी से फैलने के लिए अनुकूल परिस्थितियां पैदा कर सकती हैं। अगर लोग मास्क पहनने, सोशल डिस्टेंसिंग और स्वच्छता जैसे उपायों को नजरअंदाज करेंगे, तो यह वायरस तेजी से फैल सकता है।

कितने लोग प्रभावित हुए हैं?

एचएमपीवी से संबंधित डेटा विभिन्न देशों में अलग-अलग है। अमेरिका में किए गए अध्ययनों के अनुसार, प्रत्येक वर्ष लगभग 5-10% बच्चे और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले वयस्क इससे प्रभावित होते हैं। भारत में अभी तक आधिकारिक आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन बढ़ती रिपोर्टों के अनुसार, यह वायरस धीरे-धीरे फैल रहा है।

मृत्यु दर और गंभीरता

एचएमपीवी की मृत्यु दर कोरोना वायरस जितनी अधिक नहीं है। हालांकि, कमजोर व्यक्तियों में यह गंभीर रूप ले सकता है। एक अध्ययन के अनुसार, कमजोर प्रतिरक्षा वाले और गंभीर निमोनिया से ग्रस्त व्यक्तियों में यह वायरस मृत्यु का कारण बन सकता है। अब तक मृत्यु दर लगभग 2-3% बताई गई है, लेकिन यह स्थान और स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता पर निर्भर करता है।

एचएमपीवी से बचाव के उपाय:

स्वच्छता:

नियमित रूप से हाथ धोना और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर मास्क पहनना अनिवार्य है।

बीमार व्यक्तियों से दूरी बनाए रखें:

अगर किसी व्यक्ति को सर्दी-जुकाम या सांस लेने में दिक्कत हो रही है, तो उनसे दूरी बनाए रखें।

टीकाकरण:

एचएमपीवी के खिलाफ कोई विशिष्ट टीका अभी तक उपलब्ध नहीं है, लेकिन इम्युनिटी को मजबूत बनाए रखने के लिए फ्लू के टीके लगवाएं।

स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं:

पौष्टिक आहार, नियमित व्यायाम और पर्याप्त नींद आपके इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाएगी।

क्या यह कोरोना जैसा खतरनाक हो सकता है?

एचएमपीवी की गंभीरता कोरोना वायरस जितनी नहीं है, लेकिन यदि लापरवाही बरती गई तो यह बड़ी संख्या में लोगों को प्रभावित कर सकता है। कोरोना महामारी से सीखे गए सबक को ध्यान में रखते हुए, सतर्क रहना और जरूरी एहतियात बरतना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए।

निष्कर्ष:

एचएमपीवी को हल्के में लेना खतरनाक हो सकता है। समय पर सावधानियां अपनाकर और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह मानकर इस वायरस के प्रभाव को नियंत्रित किया जा सकता है। जनजागरूकता और सरकार की सख्त नीतियां भारत को इस वायरस के गंभीर प्रभाव से बचा सकती हैं।

संदर्भ: DGHS और NCDC, दिल्ली से 3 जनवरी, 2025 की सूचना

यह पत्र चीन में मानव मेटाप्न्यूमोनोवायरस (HMPV) के प्रकोप की रिपोर्ट के संबंध में है। HMPV एक प्रमुख कारण है जो तीव्र श्वसन संक्रमणों का कारण बनता है और इसे पहली बार 2001 में नीदरलैंड्स में पहचाना गया था। यह एक मौसमी वायरस है, जो आमतौर पर सर्दी के मौसम के अंत और वसंत के प्रारंभ में होता है, और यह RSV और फ्लू की तरह काम करता है।

महाराष्ट्र में अब तक HMPV के कोई मामले रिपोर्ट नहीं किए गए हैं। राज्य में श्वसन संक्रमणों का विश्लेषण यह दर्शाता है कि दिसंबर 2023 की तुलना में मामलों में कोई वृद्धि नहीं हुई है। फिर भी, सार्वजनिक स्वास्थ्य प्राधिकरणों ने श्वसन संक्रमणों को रोकने के लिए एहतियाती उपायों के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

करें:

खांसते या छींकते समय मुँह और नाक को रुमाल या टिश्यू से ढकें।

साबुन और पानी से हाथ बार-बार धोएं या एल्कोहल-आधारित सैनिटाइज़र का उपयोग करें।

बुखार, खांसी, या सर्दी के लक्षणों के दौरान भीड़-भाड़ वाली जगहों से बचें।

हाइड्रेटेड रहें और पौष्टिक आहार का सेवन करें।

सभी सार्वजनिक स्थानों में उचित वेंटिलेशन सुनिश्चित करें।

न करें:

हाथ मिलाने से बचें।

टिश्यू या रुमाल का पुनः उपयोग न करें।

बीमार व्यक्तियों से संपर्क न करें।

अपनी आँखों, नाक और मुँह को बार-बार न छुएं।

सार्वजनिक स्थानों पर थूकने से बचें।

बिना डॉक्टर से परामर्श किए स्व-चिकित्सा न करें।

सार्वजनिक को यह सलाह दी जाती है कि वे इस नए वायरस को लेकर घबराएं नहीं। आवश्यक सावधानियां बरती जा रही हैं, और बिना कारण चिंता फैलाने से बचना चाहिए। स्वास्थ्य अधिकारियों को निगरानी बढ़ाने और फ्लू और श्वसन संक्रमणों के मामलों पर नियमित रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है।

डॉ. जतिन अंबाडेकर, निदेशक, स्वास्थ्य सेवा, पुणे

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