चंदौली में भाजपा नेता पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जमीन हड़पने का आरोप,वृद्ध व अपाहिज महिला लगातार लगा रही एसपी दरबार न्याय की गुहार, एसपी ने दिए जांच के आदेश

Update: 2024-12-23 09:53 GMT


ओ पी श्रीवास्तव, चंदौली

चंदौली: खबर जनपद चंदौली से है जहां सकलडीहा थाना क्षेत्र के इटवा गांव निवासी वृद्ध और अपाहिज विद्या देवी ने सोमवार को एसपी दरबार पहुंचकर न्याय की गुहार लगाई। इस दौरान उन्होंने भाजपा के जिला उपाध्यक्ष व पूर्व सांसद के प्रतिनिधि रहे अपने दामाद हरिवंश उपाध्याय पर पैतृक मकान हड़पने और फर्जी दस्तावेज तैयार कराने का गंभीर आरोप लगाया है। हालांकि वृद्ध महिला की फरियाद सुनकर एसपी ने मामले की जांच सीओ सकलडीहा को सौंपी है।

बता दें कि मीडिया के समक्ष विद्या देवी ने आरोप लगाया कि उनके दामाद हरिवंश उपाध्याय और बेटी सुनीता ने फर्जी दान पत्र बनवाकर उनके मकान को अपने नाम करा लिया है। विद्या देवी का कहना है कि उनके दामाद उन्हें वृद्धावस्था में पैतृक मकान से बेदखल करने की साजिश कर रहे हैं। उन्होंने मांग की है कि इस फर्जी दान पत्र की जांच कराई जाए ताकि सच सामने आ सके।

विद्या देवी ने बताया कि उनकी तीन बेटियां सुषमा, सुनीता, और प्रतिमा हैं। वह अपनी छोटी बेटी प्रतिमा के साथ इटवा स्थित पक्के मकान में रहती हैं। इसी बीच सुनीता और उनके पति हरिबंश उपाध्याय ने फर्जी दस्तावेज तैयार कर मकान पर दावा किया। विद्या देवी का कहना है कि रिश्तेदार हरिबंश उपाध्याय के चरित्र और मंशा से भली-भांति परिचित हैं।विद्या देवी ने आरोप लगाया कि हरिबंश उपाध्याय बार-बार मकान खाली कराने की धमकी दे रहे हैं,जबकि वह अपने मकान की रजिस्ट्री बेटी प्रतिमा को कर चुकी हैं।उन्होंने एसपी से पूरे मामले की जांच कराने और दस्तावेज की वास्तविकता परखने की मांग की।

वहीं वृद्ध महिला के साथ पुलिस लाइन पहुंची उनकी बेटी प्रतिमा ने बताया कि सत्ता का धौंस देकर ऐसा किया जा रहा है। लाचार वृद्ध व अपाहिज मां लगातार अधिकारियों के दरबार पहुंचकर न्याय की गुहार लगा रही है,लेकिन न्याय अनसुनी कर दी जा रही है। बताया कि एसपी दरबार आज दूसरी बार पहुंचकर न्याय की गुहार लगाई गई है, लेकिन उससे पूर्व ही भाजपा नेता सत्ता पक्ष के स्थानीय नेताओं को लामबंद कर एसपी पर भी दबाव बनाने की प्रक्रिया में जुट गए हैं। हालांकि आज एसपी ने सीओ सकलडीहा को जांच की कमान सौंपी है। अब देखना लाजिमी होगा कि क्या कुछ कार्रवाई अमल में लाई जाती है, या सत्ता पक्ष के नेताओं की धौंस के आगे मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है।

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