मथुरा में सनसनी : एक कमरे में पति-पत्नी और तीन मासूम बच्चों की मौत, सामूहिक आत्महत्या की आशंका
रिपोर्ट : विजय तिवारी
उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के महावन थाना क्षेत्र अंतर्गत खप्परपुर गांव में मंगलवार सुबह उस समय हड़कंप मच गया, जब एक ही कमरे के अंदर पति-पत्नी और उनके तीन छोटे बच्चों के शव बरामद हुए। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस के साथ-साथ वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और जांच शुरू की गई।
कैसे हुआ मामले का खुलासा
ग्रामीणों के अनुसार, परिवार के सदस्य सुबह काफी देर तक घर से बाहर नहीं निकले। कई बार आवाज देने और दरवाजा खटखटाने के बावजूद कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। शक होने पर पड़ोसियों ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने दरवाजा तोड़कर अंदर प्रवेश किया, जहां कमरे के भीतर पांचों शव पड़े मिले।
मौके से क्या-क्या मिला
पुलिस जांच में कमरे के भीतर शवों के पास दूध के गिलास मिले हैं। प्राथमिक स्तर पर आशंका जताई जा रही है कि दूध में किसी जहरीले पदार्थ का इस्तेमाल किया गया हो सकता है, हालांकि इसकी पुष्टि फॉरेंसिक जांच और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के बाद ही होगी।
कमरे की दीवार पर एक सुसाइड नोट लिखा मिला, जिसमें यह उल्लेख है कि परिवार ने अपनी इच्छा से यह कदम उठाया है और पुलिस किसी को परेशान न करे।
मृतकों की पहचान
मृतकों की पहचान मनीष (लगभग 35 वर्ष), उनकी पत्नी सीमा (लगभग 32 वर्ष) और उनके तीन बच्चों के रूप में हुई है। बच्चों की उम्र ढाई वर्ष से लेकर लगभग पांच वर्ष के बीच बताई जा रही है। पूरे गांव में घटना के बाद शोक का माहौल है।
आत्महत्या या हत्या? दोनों पहलुओं पर जांच
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल मामले की जांच आत्महत्या और अन्य संभावित एंगल—दोनों को ध्यान में रखकर की जा रही है।
शवों पर किसी स्पष्ट बाहरी चोट के निशान नहीं पाए गए हैं, लेकिन कुछ तथ्यों को लेकर जांच एजेंसियां सतर्क हैं। सभी शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है और रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि की जा सकेगी।
पारिवारिक और आर्थिक पृष्ठभूमि
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, मनीष खेती-किसानी से जुड़े थे। उनके पिता का पहले निधन हो चुका है और परिवार के अन्य सदस्य गांव में ही अलग-अलग घरों में रहते हैं। कुछ ग्रामीणों ने पुलिस को बताया है कि मनीष पिछले कुछ समय से मानसिक और आर्थिक दबाव में थे, हालांकि इस पहलू की भी आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही होगी।
पुलिस का कहना
वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह मामला प्रथम दृष्टया सामूहिक आत्महत्या का प्रतीत होता है, लेकिन किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। पोस्टमॉर्टम, फॉरेंसिक रिपोर्ट और साक्ष्यों के विश्लेषण के बाद ही सच्चाई सामने आएगी।
यह घटना न केवल मथुरा बल्कि पूरे प्रदेश को झकझोर देने वाली है और एक बार फिर मानसिक तनाव, पारिवारिक दबाव और समय पर सहायता न मिलने जैसे गंभीर मुद्दों पर सवाल खड़े करती है।
महत्वपूर्ण सूचना (सार्वजनिक हित में)
आत्महत्या किसी भी समस्या का समाधान नहीं है।
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