कानपुर: पनकी स्थित प्राइवेट बैंक की महिला कर्मी का वीडियो वायरल, सफाई में बोलीं- गलत संदर्भ में फैलाया गया
रिपोर्ट : विजय तिवारी
कानपुर (पनकी)
कानपुर के पनकी क्षेत्र में स्थित HDFC Bank की शाखा से जुड़ा विवाद, जो सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के बाद चर्चा में आया था, अब नए तथ्यों और स्पष्टीकरण के साथ एक अलग दिशा में जाता दिखाई दे रहा है। बैंक कर्मचारी आस्था सिंह ने सोशल मीडिया पर अपना बयान जारी करते हुए और मीडिया से बातचीत में स्पष्ट किया है कि यह मामला जातिवाद से नहीं, बल्कि कथित अभद्रता, व्यवहार और कार्यस्थल की मर्यादा से जुड़ा है।
ग्राहक नहीं, सहकर्मी से जुड़ा था मामला
आस्था सिंह के अनुसार, वायरल वीडियो में जिस विवाद को ग्राहक से जोड़कर प्रस्तुत किया गया, वह तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है। उन्होंने बताया कि यह पूरा घटनाक्रम बैंक की महिला कैशियर रितु त्रिपाठी से संबंधित था, जो रिजाइन देने बैंक आई थीं। रिजाइन प्रक्रिया में समय लगने के दौरान रितु त्रिपाठी के साथ मौजूद उनकी ननद से आस्था सिंह की बहस हो गई।
परिजनों के हस्तक्षेप के बाद बढ़ा तनाव
आस्था सिंह का कहना है कि इस बहस की जानकारी रितु त्रिपाठी की ननद ने अपने भाई को दी, जिसके बाद रितु त्रिपाठी के पति ऋषि त्रिपाठी गुस्से में बैंक पहुंचे। आरोप है कि बैंक परिसर में पहुंचकर उन्होंने आस्था सिंह से अभद्र भाषा में बात की और धमकी भरे शब्दों का प्रयोग किया।
आस्था सिंह के अनुसार, उनसे कथित रूप से कहा गया—
“तुम कौन हो, इतनी अकड़ क्यों दिखा रही हो, तुम्हारी सारी हेकड़ी / गर्मी निकाल देंगे।”
भावनात्मक प्रतिक्रिया का एकतरफा वीडियो
इस तनावपूर्ण स्थिति के दौरान आस्था सिंह द्वारा दी गई प्रतिक्रिया—
“मैं ठाकुर हूं, मुझसे बकचोदी मत करना”
का केवल एक हिस्सा वीडियो में रिकॉर्ड हुआ, जिसे बाद में सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया गया।
आस्था सिंह ने कहा कि इससे पहले हुई कथित अभद्रता और उकसावे का कोई वीडियो सामने नहीं लाया गया, जिससे पूरे मामले को एकतरफा रूप में प्रस्तुत किया गया।
वीडियो की तारीख पर भी उठे सवाल
आस्था सिंह ने यह भी स्पष्ट किया कि यह वीडियो 6 जनवरी 2026 का है, जबकि इसे एक महीने बाद फरवरी में सोशल मीडिया पर वायरल किया गया। उनके अनुसार, पुराने वीडियो को वर्तमान संदर्भ में फैलाने से भ्रम और गलत धारणाएं बनीं।
सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं
वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ वर्गों ने इसे जातिगत विवाद का रूप देने की कोशिश की, जिस पर कई जागरूक नागरिकों और सामाजिक विश्लेषकों ने आपत्ति जताई।
उनका कहना है कि हर विवाद को जाति के चश्मे से देखना न केवल अनुचित है, बल्कि असली मुद्दे से ध्यान भटकाने वाला भी है।
जातिवाद नहीं, व्यवहार और न्याय का सवाल
स्थानीय स्तर पर यह राय उभरकर सामने आ रही है कि
यह मामला—
किसी जाति के पक्ष या विरोध का नहीं,
बल्कि कार्यस्थल पर सम्मान, भाषा की मर्यादा और अभद्रता से जुड़ा है।
लोगों का कहना है कि जातिवाद का जहर घोलना समाज में अनावश्यक तनाव पैदा करता है, जबकि वास्तविक मुद्दा न्याय और सही प्रक्रिया का है।
निष्पक्ष जांच की मांग
आस्था सिंह के बयान के बाद अब यह मांग तेज़ हो रही है कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष, तथ्यात्मक और पारदर्शी जांच होनी चाहिए।
आधे-अधूरे वीडियो के आधार पर किसी व्यक्ति की छवि खराब करना या निष्कर्ष निकालना न्यायसंगत नहीं माना जा रहा है।
कानपुर पनकी HDFC बैंक मामला अब सिर्फ एक वायरल वीडियो तक सीमित नहीं रह गया है। यह मामला इस बड़े सवाल को सामने लाता है कि—
क्या सोशल मीडिया के दौर में सच्चाई को पूरी तरह सामने आने का अवसर मिल पा रहा है?
स्पष्ट है कि यह विवाद जातिवाद से ऊपर उठकर न्याय, व्यवहार और प्रक्रिया से जुड़ा है।
मामले का समाधान भावनाओं या सोशल मीडिया ट्रायल से नहीं, बल्कि तथ्यों और निष्पक्ष जांच से ही संभव है।