मन्नाथु पद्मनाभन की जयंती पर पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने अर्पित की श्रद्धांजलि
रिपोर्ट : विजय तिवारी
केरल / नई दिल्ली।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आज केरल के महान समाज सुधारक मन्नाथु पद्मनाभन
की जयंती के अवसर पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर दोनों नेताओं ने सोशल मीडिया के माध्यम से मन्नाथु पद्मनाभन के सामाजिक, वैचारिक और राष्ट्रीय योगदान को स्मरण किया और उनके विचारों को आज के समय में भी प्रासंगिक बताया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संदेश में कहा कि मन्नाथु पद्मनाभन एक दूरदर्शी विचारक थे, जिनका स्पष्ट विश्वास था कि किसी भी समाज की वास्तविक और स्थायी प्रगति मानव गरिमा, समानता और सामाजिक सुधार पर आधारित होती है। प्रधानमंत्री ने कहा कि पद्मनाभन का संपूर्ण जीवन समाज को संगठित करने, सामाजिक कुरीतियों को चुनौती देने और मानव सम्मान को केंद्र में रखकर परिवर्तन लाने के लिए समर्पित रहा। उनके विचार आज भी समावेशी और न्यायपूर्ण समाज के निर्माण की दिशा दिखाते हैं।
वहीं, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मन्नाथु पद्मनाभन को एक प्रखर समाज सुधारक और राष्ट्रभक्त बताते हुए कहा कि उन्होंने केरल में सामाजिक मूल्यों को सुदृढ़ करने के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। अमित शाह ने कहा कि सामाजिक बुराइयों, भेदभाव और असमानता के विरुद्ध उनके आजीवन संघर्ष ने न्यायपूर्ण, संगठित और समतामूलक समाज की मजबूत नींव रखी, जिससे आने वाली पीढ़ियों को भी दिशा मिली।
मन्नाथु पद्मनाभन का जन्म 2 जनवरी 1878 को केरल के पथानामथिट्टा जिले में हुआ था। उन्होंने वकालत की शिक्षा प्राप्त की, लेकिन सामाजिक विषमता और जातिगत भेदभाव को देखकर उन्होंने अपना जीवन समाज सुधार के लिए समर्पित कर दिया। केरल में व्याप्त रूढ़ियों, छुआछूत और असमानता के विरुद्ध उन्होंने संगठित आंदोलन की राह अपनाई। इसी क्रम में वर्ष 1903 में उन्होंने नायर सर्विस सोसाइटी (NSS) की स्थापना की, जिसका उद्देश्य शिक्षा, सामाजिक जागरूकता, संगठन और आत्मसम्मान के माध्यम से समाज को सशक्त बनाना था।
मन्नाथु पद्मनाभन की कार्यशैली व्यावहारिक, अनुशासित और समावेशी रही। वे टकराव के बजाय संवाद और सुधार में विश्वास रखते थे। उनका मानना था कि संगठन के बिना समाज कमजोर और शिक्षा के बिना संगठन दिशाहीन हो जाता है। उन्होंने शिक्षा आधारित सुधार, आत्मसम्मान, नैतिक मूल्यों और मानवीय समानता को सामाजिक प्रगति की आधारशिला माना। उनका जीवन संदेश था कि समाज का वास्तविक उत्थान केवल अधिकारों की मांग से नहीं, बल्कि कर्तव्य, चरित्र और सामाजिक चेतना से संभव होता है।
गौरतलब है कि मन्नाथु पद्मनाभन केवल केरल तक सीमित व्यक्तित्व नहीं थे। उनकी सोच और संघर्ष राष्ट्रीय स्तर पर सामाजिक सुधार और राष्ट्रनिर्माण से जुड़े थे। उनके विचारों ने केरल में सामाजिक चेतना को नई दिशा दी और भारतीय समाज के लिए समानता, गरिमा और सुधार का स्थायी मार्ग प्रशस्त किया। आज भी उनके जीवन, विचार और कार्यशैली सामाजिक न्याय, मानव सम्मान और समरसता के लिए प्रेरणास्रोत बने हुए हैं।