बिहार कांग्रेस में सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई, चुनावी हार के बाद 43 नेताओं पर गिरी गाज
रिपोर्ट विजय तिवारी
पटना।
बिहार विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद Indian National Congress की प्रदेश इकाई में बड़ा संगठनात्मक कदम उठाया गया है। चुनाव परिणाम घोषित होने के ठीक दो दिन बाद गठित राज्य स्तरीय अनुशासनात्मक समिति की सिफारिशों पर कांग्रेस ने कुल 43 नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की है। इनमें 7 नेताओं को पार्टी से निष्कासित किया गया है, जबकि 36 नेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
चुनावी प्रदर्शन के बाद तेज हुआ एक्शन
बिहार में कांग्रेस 243 सदस्यीय विधानसभा में महज 6 सीटें जीत सकी। 14 नवंबर को परिणाम आने के बाद प्रदेश नेतृत्व ने स्थिति की समीक्षा करते हुए संगठनात्मक अनुशासन पर सख्ती का फैसला लिया। इसी क्रम में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष Rajesh Kumar ने राज्य स्तरीय अनुशासनात्मक समिति का गठन किया, जिसकी अध्यक्षता वरिष्ठ नेता Kapildev Prasad Yadav को सौंपी गई।
किस पर हुई कार्रवाई
पार्टी से निकाले गए नेताओं में बिहार कांग्रेस के पूर्व उपाध्यक्ष राजकुमार राजन, शकीलुर रहमान, और बांका जिला कांग्रेस अध्यक्ष कंचना सिंह शामिल हैं।
कारण बताओ नोटिस पाने वालों में खगड़िया के पूर्व विधायक छत्रपति यादव, गजानंद शाही, पूर्व मंत्री वीणा शाही और पूर्व कांग्रेस एमएलसी अजय कुमार सिंह जैसे नाम भी हैं। पार्टी का कहना है कि इन सभी पर पार्टी विरोधी गतिविधियों और अनुशासनहीनता के आरोप हैं।
केंद्रीय नेतृत्व को भेजे गए 6 नाम
इन 43 नेताओं में से 6 नेताओं के नाम आगे की कार्रवाई के लिए केंद्रीय अनुशासनात्मक समिति को भेजे गए हैं। इनमें पूर्व विधायक सुधीर कुमार उर्फ बंटी चौधरी, बिहार कांग्रेस के पूर्व प्रवक्ता आनंद माधव, बिहार युवा कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष नागेंद्र पासवान विकल, एआईसीसी सदस्य मधुरेंद्र कुमार सिंह, पूर्व विधायक छत्रपति यादव और पूर्व मंत्री अफाक आलम शामिल हैं।
क्यों उठाया गया सख्त कदम
प्रदेश नेतृत्व के अनुसार, जिन नेताओं पर कार्रवाई हुई है, उनमें से कई ने पार्टी नेतृत्व के खिलाफ सार्वजनिक रूप से विरोध किया था। कुछ नेताओं ने टिकट वितरण में पक्षपात और रिश्वतखोरी जैसे गंभीर आरोप लगाए। मतदान से पहले 18 अक्टूबर को पटना में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इन आरोपों को सार्वजनिक किए जाने से पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचा, जिसके बाद अनुशासनात्मक कार्रवाई को अपरिहार्य माना गया।
पार्टी का संदेश
प्रदेश कांग्रेस का कहना है कि यह कार्रवाई संगठनात्मक अनुशासन मजबूत करने और भविष्य में ऐसी गतिविधियों पर रोक लगाने के उद्देश्य से की गई है। पार्टी ने स्पष्ट किया है कि अनुशासनहीनता और पार्टी विरोधी गतिविधियों पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा, चाहे नेता का पद या कद कुछ भी हो।
यह पूरी कार्रवाई चुनावी समीक्षा के साथ-साथ संगठन को फिर से मजबूत करने की दिशा में उठाया गया कदम मानी जा रही है।