लालू परिवार को बड़ा झटका, आरोप तय : कोर्ट की सख्त टिप्पणी- “क्रिमिनल सिंडिकेट की तरह किया गया काम”

Update: 2026-01-09 09:50 GMT

रिपोर्ट : विजय तिवारी

दिल्ली की राउज एवेन्यू सीबीआई अदालत ने बहुचर्चित लैंड फॉर जॉब घोटाले में राष्ट्रीय जनता दल प्रमुख लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, पुत्र तेजस्वी यादव सहित परिवार के अन्य सदस्यों और कुल 41 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं। अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्य यह संकेत देते हैं कि रेलवे में नियुक्तियों के बदले जमीनें हासिल करने की यह प्रक्रिया एक सुनियोजित और संगठित आपराधिक साजिश का हिस्सा थी।

अदालत के सामने क्या आया

अदालत के समक्ष पेश दस्तावेजों, गवाहों के बयान और लेन-देन से जुड़े रिकॉर्ड के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला गया कि आरोपियों ने सरकारी पद और प्रभाव का दुरुपयोग कर निजी लाभ कमाया। कोर्ट ने माना कि यह केवल प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि योजनाबद्ध तरीके से बनाया गया ऐसा तंत्र था, जिसमें लाभार्थियों, बिचौलियों और परिवार से जुड़े लोगों की भूमिकाएं स्पष्ट दिखती हैं।

2004–2009 की नियुक्तियां जांच के केंद्र में

मामला उस अवधि से जुड़ा है जब रेल मंत्रालय के अंतर्गत ग्रुप-डी पदों पर भर्तियां की गईं। अभियोजन पक्ष के अनुसार, चयन सूची में शामिल कुछ उम्मीदवारों या उनके परिजनों से जमीनें ट्रांसफर कराई गईं। ये जमीनें सीधे आरोपियों के नाम न होकर परिवार से जुड़ी कंपनियों, सहयोगियों या करीबी व्यक्तियों के नाम दर्ज कराई गईं, ताकि स्वामित्व परतदार बना रहे।

बाजार मूल्य और सौदे की रकम में भारी अंतर

जांच में यह तथ्य प्रमुख रूप से सामने आया कि जिन जमीनों का वास्तविक बाजार मूल्य करोड़ों रुपये बताया गया, उनका पंजीकरण बेहद कम कीमत—कहीं लाखों, तो कहीं उससे भी कम—पर किया गया। अभियोजन का तर्क है कि यह अंतर अवैध लाभ को छिपाने और संपत्ति को वैध दिखाने के उद्देश्य से रखा गया।

नियुक्ति प्रक्रिया की तेज़ी पर सवाल

अदालत में यह भी बताया गया कि कुछ मामलों में आवेदन, चयन और नियुक्ति पत्र जारी होने की प्रक्रिया असामान्य रूप से कम समय में पूरी हुई। अभियोजन के अनुसार, इसी त्वरित प्रक्रिया के बदले जमीनों के सौदे किए गए। नियुक्ति की तारीखों और संपत्ति रजिस्ट्रेशन के समय के बीच का तालमेल जांच का अहम आधार बना।

परिवार से जुड़ी संस्थाएं भी कटघरे में

जांच एजेंसी का कहना है कि जमीनें सीधे व्यक्तिगत नामों के बजाय परिवार से जुड़ी कंपनियों और संस्थाओं के नाम ली गईं। अदालत ने टिप्पणी की कि इस तरह का ढांचा आमतौर पर लाभार्थियों की पहचान छिपाने और अवैध कमाई को वैध संपत्ति के रूप में बदलने के लिए अपनाया जाता है।

कोर्ट की अहम टिप्पणी

आरोप तय करते हुए अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया यह प्रतीत होता है कि आरोपियों ने एक क्रिमिनल सिंडिकेट की तरह मिलकर काम किया। कोर्ट के अनुसार, पद, प्रभाव और पारिवारिक नेटवर्क का उपयोग कर पूरे घटनाक्रम को अंजाम दिया गया, जिससे सार्वजनिक व्यवस्था और निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

अब आगे क्या होगा

आरोप तय होने के बाद अब मामले में नियमित ट्रायल चलेगा। इसमें गवाहों की पेशी, दस्तावेजी साक्ष्यों की जांच और दोनों पक्षों की जिरह होगी। बचाव पक्ष को भी आरोपों का खंडन करने और अपने साक्ष्य प्रस्तुत करने का पूरा अवसर मिलेगा। अंतिम फैसला ट्रायल के दौरान सामने आने वाले प्रमाणों और कानूनी बहस के आधार पर होगा।

राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल

इस मामले में आरोप तय होने को बड़ा घटनाक्रम माना जा रहा है। इससे न केवल राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हुई है, बल्कि सरकारी भर्तियों की पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर भी व्यापक चर्चा शुरू हो गई है।

लैंड फॉर जॉब मामला अब निर्णायक चरण में प्रवेश कर चुका है। अदालत की सख्त टिप्पणियों और आरोप तय होने के बाद यह साफ है कि आने वाले दिनों में ट्रायल के दौरान सामने आने वाले तथ्य और सबूत ही यह तय करेंगे कि आरोप कितने मजबूत साबित होते हैं और मामले का अंतिम परिणाम क्या

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