नीतीश कुमार ने विधान परिषद से इस्तीफा दिया, अभी मुख्यमंत्री बने रहेंगे – बिहार की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत

Update: 2026-03-30 05:44 GMT


रिपोर्ट : विजय तिवारी

बिहार की राजनीति में एक बार फिर बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार विधान परिषद (एमएलसी) की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। हालांकि उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं दिया है और वे फिलहाल मुख्यमंत्री पद पर बने हुए हैं। उनके इस फैसले के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और नेतृत्व परिवर्तन को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।

सूत्रों के अनुसार, हाल ही में नीतीश कुमार राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए हैं। संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार कोई भी व्यक्ति एक साथ संसद और राज्य विधानमंडल दोनों का सदस्य नहीं रह सकता। इसी कारण उन्हें विधान परिषद की सदस्यता छोड़नी पड़ी। निर्धारित समय सीमा के भीतर उन्होंने अपना इस्तीफा दे दिया। इसे एक संवैधानिक प्रक्रिया बताया जा रहा है, लेकिन राजनीतिक दृष्टि से इसे बिहार की राजनीति में आने वाले बड़े बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

संवैधानिक व्यवस्था के तहत मुख्यमंत्री बनने के लिए व्यक्ति का विधायक या विधान परिषद सदस्य होना आवश्यक होता है। लेकिन संविधान में यह भी प्रावधान है कि यदि कोई व्यक्ति मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए किसी सदन का सदस्य नहीं रहता है, तो वह अधिकतम छह महीने तक मुख्यमंत्री पद पर बना रह सकता है। इस दौरान उसे किसी एक सदन का सदस्य बनना होता है। इसी व्यवस्था के कारण नीतीश कुमार फिलहाल मुख्यमंत्री पद पर बने रहेंगे और उनके इस्तीफे का सरकार पर तत्काल कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

सूत्रों के मुताबिक, नीतीश कुमार वर्ष 2006 से लगातार बिहार विधान परिषद के सदस्य रहे हैं। वे कई बार परिषद के सदस्य चुने गए और हाल ही में 2024 में भी उनका कार्यकाल आगे बढ़ा था, जो वर्ष 2030 तक चलना था। लेकिन राज्यसभा सदस्य बनने के बाद उन्हें यह पद छोड़ना पड़ा। 16 मार्च 2026 को वे राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए और इसके साथ ही वे उन चुनिंदा नेताओं में शामिल हो गए जिन्होंने विधानसभा, विधान परिषद, लोकसभा और राज्यसभा — चारों सदनों में प्रतिनिधित्व किया है। इससे पहले वे 1985 में हरनौत विधानसभा सीट से विधायक बने थे और 1989 में लोकसभा के लिए भी चुने गए थे। अब वे पहली बार राज्यसभा जाएंगे और जल्द ही सदस्य के रूप में शपथ ले सकते हैं।

इस राजनीतिक घटनाक्रम के बीच मोकामा से विधायक अनंत सिंह की मुख्यमंत्री से मुलाकात ने भी राजनीतिक चर्चाओं को और तेज कर दिया। बताया जा रहा है कि यह मुलाकात सामान्य शिष्टाचार मुलाकात थी, लेकिन इसके बाद राजनीतिक हलकों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। सूत्रों के अनुसार, पार्टी के कई नेता चाहते थे कि मुख्यमंत्री विधान परिषद की सदस्यता न छोड़ें, लेकिन संवैधानिक प्रावधानों के कारण यह निर्णय लिया गया।

इसी बीच भाजपा नेता नितिन नबीन के भी विधायक पद से इस्तीफा देने की चर्चा है, क्योंकि वे भी राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए हैं। एक साथ कई नेताओं के राज्यसभा जाने से बिहार की राजनीति में नए राजनीतिक समीकरण बनने की संभावना जताई जा रही है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं बल्कि आने वाले समय की राजनीतिक रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है।

नीतीश कुमार लंबे समय से बिहार की राजनीति के केंद्र में रहे हैं और कई बार मुख्यमंत्री पद संभाल चुके हैं। उनके राज्यसभा जाने और विधान परिषद से इस्तीफा देने के बाद यह माना जा रहा है कि बिहार की राजनीति में आने वाले समय में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। सूत्रों के अनुसार, गठबंधन के भीतर नेतृत्व को लेकर मंथन चल रहा है और भविष्य की राजनीतिक रणनीति को ध्यान में रखते हुए बड़े फैसले लिए जा सकते हैं।

नीतीश कुमार का विधान परिषद से इस्तीफा केवल एक संवैधानिक प्रक्रिया नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे बिहार की राजनीति में संभावित बड़े राजनीतिक बदलाव की भूमिका के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले समय में बिहार की राजनीति किस दिशा में जाएगी, इस पर पूरे देश की नजर बनी हुई है।

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