'राष्ट्रीय मतदाता दिवस', राष्ट्र के प्रति कर्तव्य की याद दिलाने का दिन

Update: 2018-01-25 06:59 GMT
दोस्तों ! जैसा कि आप जानते ही हैं कि हम 2018 में आ गए हैं और साल के शुरुआत में सबसे महत्वपूर्ण दिन हमारा गणतंत्र दिवस है लेकिन इसके साथ ही एक और महत्वपूर्ण दिन इसी महीने में आता है, जो है "राष्ट्रीय मतदाता दिवस"। यह भारतीय लोकतंत्र का एक बहुत ही ख़ास और महत्वपूर्ण दिन है।
इस दिन का मुख्य उद्देश्य भारतीय मतदाताओं को लोकतांत्रिक राजनीतिक प्रक्रिया में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करना है। सरकार ने वर्ष 2011 से प्रतिवर्ष 25 जनवरी को "राष्ट्रीय मतदाता दिवस" के रूप में मनाने का फैसला किया और तभी से ही 25 जनवरी को "राष्ट्रीय मतदाता दिवस" मनाया जाता है क्योंकि 25 जनवरी 1950 को गणतंत्र राष्ट्र बनने के ठीक एक दिन पहले ही चुनाव आयोग की स्थापना हुई थी।
वर्ष 2010 में "राष्ट्रीय मतदाता दिवस" का विचार एक आम वोटर "Captain Chand" ने दिया था। चुनाव आयोग ने यह सुझाव स्वीकार किया और इसमें कुछ सुधार करके 25 जनवरी को "राष्ट्रीय मतदाता दिवस" घोषित कर दिया |
"भारत निर्वाचन आयोग" का गठन 25 जनवरी, 1950 को हुआ था। भारत सरकार ने राजनीतिक प्रक्रिया में युवाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए निर्वाचन आयोग के स्थापना दिवस '25 जनवरी' को ही वर्ष 2011 से 'राष्ट्रीय मतदाता दिवस' के रूप में मनाने की शुरुआत की थी।
25 जनवरी, 2018 को 'सरल पंजीकरण और सरल सुधार' थीम के साथ आठवां 'राष्ट्रीय मतदाता दिवस' है। 'राष्ट्रीय मतदाता दिवस' के पीछे निर्वाचन आयोग का उद्देश्य अधिक मतदाता और विशेष रूप से नए मतदाता बनाना है। यह दिवस मतदाताओं में मतदान प्रक्रिया में कारगर भागीदारी व जानकारी फैलाने के रूप में भी प्रयोग किया जाता है।
राष्ट्रीय मतदाता दिवस पूरे भारत में मनाया जाता है। हर साल मतदाता पहचान पत्र प्राप्त करते हैं और उन्हें एक पुस्तिका भी दी जाती है जिसमे पंजीकरण के अलावा मतदाता सूची में शामिल किये गये इन मतदाताओं को निम्न शपथ दिलाई जाती है :-
"हम भारत के नागरिक, लोकतंत्र में आस्था रखने वाले शपथ लेते हैं कि हम देश की स्वतंत्रत, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव कराने की लोकतांत्रिक परम्परा को बरकरार रखेंगे। प्रत्येक चुनाव में धर्म, नस्ल, जाति, समुदाय, भाषा आधार पर प्रभावित हुए बिना निर्भीक होकर मतदान करेंगे।"
जो उन्हें अपने अधिकार और दायित्वों पर जानकारी देती है| ऐसे दिनों का जश्न मनाना बहुत महत्वपूर्ण है, इससे देश में लोकतंत्र की ताकत और राष्ट्र निर्माण में योगदान बढ़ेगा।
भारत में मतदान आधारित लोकतंत्र के लिए 25 जनवरी पहले से ही एक ऐतिहासिक अवसर है। सूत्रों के अनुसार 1 जनवरी, 2012 को मतदाताओं के देशभर में लगभग 3.83 करोड़ नए पंजीकरण किए गए। जिनमे से 1.11 करोड़ मतदाता 18-19 वर्ष आयु समूह के थे । यह विश्व में किसी स्थान पर एक दिन में युवाओं के सबसे बड़े सशक्तीकरण को दर्शाता है।
चुनाव में वोट देने के लिए पहले मतदाता की आयु कम से कम 21 वर्ष मान्य थी, लेकिन 1988 में इसे घटाकर 18 वर्ष कर दिया गया । इसमें बदलाव इसलिए किया गया क्योंकि दुनिया भर के कई देशों ने आधिकारिक मतदान उम्र के रूप में 18 वर्ष की सीमा को अपनाया था और उस समय भारतीय युवा साक्षर और राजनैतिक रूप से जागरूक हो रहे थे ।
भारत की 50% से अधिक आबादी 35 साल के उम्र के नीचे की है और इनमे से एक बड़ा हिस्सा 18 साल का पड़ाव पार कर रहा है। इसलिए इन्हे जागरूक करना और लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा बनाना बहुत महत्वपूर्ण है। उन्हें अपने अधिकारों और दायित्वों का एहसास कराना बहुत जरूरी है|
'राष्ट्रीय मतदाता दिवस' के लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए मतदाताओं को पंजीकृत करने के लिए देशभर में एक विशेष अभियान चलाया गया जिसमे सभी राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को आयोग ने निर्देश दिए कि अधिक से अधिक महिलाओं को मतदाता बनाने के लिए विशेष अभियान शुरू किए जाए।

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