Read latest updates about "व्यंग ही व्यंग" - Page 1

  • अथ श्रीआरक्षण कथा-४

    "मिले मुलायम कांशीराम" के बल पर अयोध्या काण्ड के खलनायक के रूप में उभरे मुलायम सिंह यादव मुख्यमंत्री तो बन गए पर उनका पाला मायावती से पड़ गया जो हर तरह की राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं में मुलायम सिंह से कहीं ज्यादा बढ़ चढ़ कर दीं। छः-छः महीने के मुख्यमंत्रित्व के जो समझौते हुए थे उसके बीतने के...

  • अथ श्री आरक्षण कथा-३

    भाजपा का कांग्रेस के राजनीतिक उत्तराधिकारी के रूप में उदय १९९१ में होने लगा जब १९९० में आडवाणी जी द्वारा अयोध्या में राममंदिर निर्माण को लेकर निकाली गई रथयात्रा को जनता ने अपार समर्थन दिया जिससे न केवल मध्य प्रदेश, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश और उत्तरप्रदेश में भाजपा की पूर्ण बहुमत की सरकारें बनीं...

  • अथ श्रीआरक्षण कथा-२

    वीपी सिंह ने इस्तीफा देने से मना कर दिया और कहा कि वह सदन में अपना बहुमत सिद्ध कर देंगे लेकिन हुआ वही जो सबको पता था वीपी का विश्वास प्रस्ताव लोकसभा में गिर गया। आम जनता को इससे कोई बहुत राहत या खुशी नहीं हुई, पूरा देश आरक्षण विरोधी आंदोलन और अयोध्या में कारसेवकों पर मुलायम सिंह और सुरक्षा बलों...

  • मड़ुआ भक्षी द्विज का राहुल के नाम पत्र

    प्रिय राहुल गाँधी जी!सादर प्रणाम। पहले यह बता दूँ कि मैं आपके बाप-दादों का चारण-भाट नहीं हूँ, न ही मुझे यह कहने में रत्ती भर हिचकिचाहट है कि आप एक सिरे से न केवल अयोग्य हैं, बल्कि इस देश के नाम पर आपके बाप-दादा तक काले धब्बे रहे हैं, इसलिए डीएनए की बात न ही करें तो बेहतर है। यह जान लीजिए, भारत का...

  • अथ श्री आरक्षण कथा-१

    १९८९ याद है? अटलजी ने सोमनाथ से रथ यात्रा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था और आडवाणी जी उसे लेकर जब अयोध्या के लिए कूच किए थे, तब दिल्ली में विश्वनाथ प्रताप सिंह कि जनता दल की सरकार भाजपा के ५६-५७ सांसदों पर बुरी तरह से आश्रित चल रही थी। १९८४ में इंदिरा जी की हत्या के बाद इस देश ने उनके...

  • मेघदूत (व्यंग्य)

    इक्कीसवीं शताब्दी के दूसरे दशक की बात है, एक मंत्री की सेवा में नियुक्त अरविन्द सिंह नामधारी एक यक्ष जब अपने कार्य से अतिरिक्त कार्य करते पकड़ा गया, तो मंत्री ने उसपर पोटा लगवा कर तड़ीपार करवा दिया। यक्ष का अपराध यह था कि उसने अपने स्वामी का वह गुप्त फेसबुक स्क्रीन शॉट 'जिसमें उसने अपनी तीसरी...

  • हुजूर! माई-बाप! यह हिस्से का बंटवारा घर के अंदर ही फरिया लीजिये

    जज साहेब कह रहे हैं कि न्यायपालिका खतरे में है। वे हाकिम हैं, हुजूर हैं, माई-बाप हैं। कह रहे हैं तो सचमुच न्यायपालिका संकट में ही होगी। मैं लोकतंत्र का एक अदना सा दास हूँ, मेरी इतनी सामर्थ्य कहाँ जो उनकी बात को काट सकूं। मुझे बस एक बात समझ में नहीं आती, कि यह लोकतंत्र तब खतरे में क्यों नहीं आया था...

  • सूर पतित को बेग उबारो...आलोक पाण्डेय

    आजकल बौद्धिक दंगाग्रस्त हूँ, बौद्धिक दंगाग्रस्त मने एक विचार आता है और विचारों का रेला भगदड़ मचाने लगता है, अब जजे साहबों को लीजिए इनका एकेडमिक बैकग्राउंड जब देखता हूँ तो दिखता है वो आवारा लड़का जो हर प्रकार से निकम्मा था, न स्कूल आता था, न टीचरों की इज्जत करता था, मेज पर छुरा गाड़ परीक्षा देता था...

  • हाल न पूछिये काका, देश तो एकदम गड्ढे में धस रहा है

    -गोड़ लागते हैं काका -जियो चेला जियो, का हाल है रामचनर?-अरे हाल न पूछिये काका, देश तो एकदम गड्ढे में धस रहा है। देखते नहीं, निर्दोष बच्चों का एनकाउंटर करा रहा है भजपइया सब।-क्यों रे, उ अनेरवा सब निर्दोष था? रै बम धमाका का दोषी तुमको निर्दोष लउकता है?- अरे काका, अगर दोषिये हो तो का अइसे ही...

  • सरकार को पोंकहवीं प्रजाति की रक्षा करनी चाहिए

    कभी कभी अच्छे कार्यों के भी कुछ बुरे प्रभाव होते हैं। जैसे भारत सरकार के स्वच्छता अभियान से भारत की एक अद्भुत प्रजाति के अस्तित्व पर संकट आन खड़ा हुआ है। यह अद्भुत प्रजाति है सांझ-सबेरे सड़क किनारे निपटान करने वाले तुर्रम खानों की। ग्रामीण क्षेत्र में नित्य ही सुबह सुबह हाथ में प्लास्टिक का डिब्बा...

  • 'रविश की रिपोर्ट' पर रिपोर्ट

    पत्रकारिता के लिए 7-स्टार स्टूडियोज और हाई डेफनिशन कैमरों के साथ थ्री पीस सूट में लाखों रूपये तनख्वाह पाने वाले पत्रकारों की बेचैनी मैं समझ रहा हूँ। पत्रकारिता के नाम पर जो ये अय्याशी(मोटी तनख्वाह, एयर कंडिसन स्टूडियोज़, बिजिनेस क्लास हवाई यात्रा) में डूबे हैं, वो अय्याशी कई कंपनियों के साथ-साथ कार...

  • पेंड़किया,गुजिया,चंद्रकला,लवंगलता,मिठा सिंघाड़ा देश का रूप—स्वरूप,मन—मिजाज इन जैसा ही है

    एक मिठाई है पेंड़ुकिया. पेंड़किया भी कहते हैं इसको. कई जगहों पर गुजिया के नाम से जाना जाता है. सूखा भी होता है, रसदार भी. कई तरह से बनता है. खोवा वाला, सूजी वाला, आंटा के हलवा वाला. आदि—अनादि प्रकार है. चीज एक ही, नाम अलग. मूल एक ही, सेप—साइज अलग, अंदर का माल अलग. इसी का थोड़ा आकार—प्रकार बदलता है...

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