Read latest updates about "व्यंग ही व्यंग" - Page 1

  • "बढ़े बांग्लादेशी निकाल करो बाहर" व्यंग्यात्मक कविता: कृष्णेन्द्र राय

    बढ़े बांग्लादेशी ।निकाल करो बाहर ।।ढूँढ कर निकालो ।छुपे गाँव शहर ।।हो सकते घातक ।दिमाग़ ख़ुराफ़ाती ।।भेजो इनके मुल्क ।चढ़े हमारे छाती ।।निदान है ज़रूरी ।घातक ये नासूर ।।हम क्यों झेलें..?हमारा क्या क़सूर...?व्यंग्यात्मक लेखक : कृष्णेन्द्र रायKrishnendra Rai

  • व्यंग्यात्मक कविता : कृष्णेन्द्र राय

    बदल गयी सत्ता ।आ गये इमरान ।।बंद दाना-पानी ।हाफ़िज़ ही है जान ।।रूक गयी ख़ैरात ।अमरीका ने ठोका ।।चप्पलचोर पाकिस्तान ।दिया सबको धोखा ।।सादगी का नाटक ।कर गया क्रिकेटर ।।सजग रहना भारत ।चालू किया थिएटर ।।व्यंग्यात्मक लेखक : कृष्णेन्द्र राय

  • लालकिला...

    भारत की छाती पर बना यह महल उसी गाजी शाहजहाँ का बनवाया हुआ है, जिसने जूझर सिंह के ग्यारह वर्ष के पोते को केवल इसलिए कटवा दिया क्योंकि वह हिन्दू था। जिसने ओरछा के सभी मंदिरों को अपवित्र कर तुड़वा दिया। जिसने असंख्य बुन्देला स्त्रियों को लूट कर अमीरों के हरम में भेज दिया। लालकिला का सौंदर्य...

  • अथ श्रीआरक्षण कथा-४

    'मिले मुलायम कांशीराम' के बल पर अयोध्या काण्ड के खलनायक के रूप में उभरे मुलायम सिंह यादव मुख्यमंत्री तो बन गए पर उनका पाला मायावती से पड़ गया जो हर तरह की राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं में मुलायम सिंह से कहीं ज्यादा बढ़ चढ़ कर दीं। छः-छः महीने के मुख्यमंत्रित्व के जो समझौते हुए थे उसके बीतने...

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