Read latest updates about "व्यंग ही व्यंग"

  • हुजूर! माई-बाप! यह हिस्से का बंटवारा घर के अंदर ही फरिया लीजिये

    जज साहेब कह रहे हैं कि न्यायपालिका खतरे में है। वे हाकिम हैं, हुजूर हैं, माई-बाप हैं। कह रहे हैं तो सचमुच न्यायपालिका संकट में ही होगी। मैं लोकतंत्र का एक अदना सा दास हूँ, मेरी इतनी सामर्थ्य कहाँ जो उनकी बात को काट सकूं। मुझे बस एक बात समझ में नहीं आती, कि यह लोकतंत्र तब खतरे में क्यों नहीं आया था...

  • सूर पतित को बेग उबारो...आलोक पाण्डेय

    आजकल बौद्धिक दंगाग्रस्त हूँ, बौद्धिक दंगाग्रस्त मने एक विचार आता है और विचारों का रेला भगदड़ मचाने लगता है, अब जजे साहबों को लीजिए इनका एकेडमिक बैकग्राउंड जब देखता हूँ तो दिखता है वो आवारा लड़का जो हर प्रकार से निकम्मा था, न स्कूल आता था, न टीचरों की इज्जत करता था, मेज पर छुरा गाड़ परीक्षा देता था...

  • हाल न पूछिये काका, देश तो एकदम गड्ढे में धस रहा है

    -गोड़ लागते हैं काका -जियो चेला जियो, का हाल है रामचनर?-अरे हाल न पूछिये काका, देश तो एकदम गड्ढे में धस रहा है। देखते नहीं, निर्दोष बच्चों का एनकाउंटर करा रहा है भजपइया सब।-क्यों रे, उ अनेरवा सब निर्दोष था? रै बम धमाका का दोषी तुमको निर्दोष लउकता है?- अरे काका, अगर दोषिये हो तो का अइसे ही...

  • सरकार को पोंकहवीं प्रजाति की रक्षा करनी चाहिए

    कभी कभी अच्छे कार्यों के भी कुछ बुरे प्रभाव होते हैं। जैसे भारत सरकार के स्वच्छता अभियान से भारत की एक अद्भुत प्रजाति के अस्तित्व पर संकट आन खड़ा हुआ है। यह अद्भुत प्रजाति है सांझ-सबेरे सड़क किनारे निपटान करने वाले तुर्रम खानों की। ग्रामीण क्षेत्र में नित्य ही सुबह सुबह हाथ में प्लास्टिक का डिब्बा...

  • 'रविश की रिपोर्ट' पर रिपोर्ट

    पत्रकारिता के लिए 7-स्टार स्टूडियोज और हाई डेफनिशन कैमरों के साथ थ्री पीस सूट में लाखों रूपये तनख्वाह पाने वाले पत्रकारों की बेचैनी मैं समझ रहा हूँ। पत्रकारिता के नाम पर जो ये अय्याशी(मोटी तनख्वाह, एयर कंडिसन स्टूडियोज़, बिजिनेस क्लास हवाई यात्रा) में डूबे हैं, वो अय्याशी कई कंपनियों के साथ-साथ कार...

  • पेंड़किया,गुजिया,चंद्रकला,लवंगलता,मिठा सिंघाड़ा देश का रूप—स्वरूप,मन—मिजाज इन जैसा ही है

    एक मिठाई है पेंड़ुकिया. पेंड़किया भी कहते हैं इसको. कई जगहों पर गुजिया के नाम से जाना जाता है. सूखा भी होता है, रसदार भी. कई तरह से बनता है. खोवा वाला, सूजी वाला, आंटा के हलवा वाला. आदि—अनादि प्रकार है. चीज एक ही, नाम अलग. मूल एक ही, सेप—साइज अलग, अंदर का माल अलग. इसी का थोड़ा आकार—प्रकार बदलता है...

  • शिक्षामित्र..... श्रीमुख

    IDBI bank में मैनेजर के पद पर कार्यरत रहते हुए जब कुणाल नेTET का फार्म भरा तो सभी सहकर्मियों ने उसका मजाक उड़ाया ।अबे 45000 का जॉब छोड़ कर12000 पर मास्टरी करने जायेगा? तब उसने अपने एक तर्क से सबका मुह बन्द किया था कि मै बचपन से टीचर बनना चाहता था। वह सचमुच बचपन से शिक्षक बनना चाहता...

  • धाकड़ व्यंग : 'प्रसिद्ध', 'उदारवादी', 'निष्पक्ष' 'महिला' 'पत्रकार' की हत्या

    देश के किसी कोने में एक 'प्रसिद्ध', 'उदारवादी', 'निष्पक्ष' 'महिला' 'पत्रकार' की हत्या हो जाती है और देश दुनिया में तहलका मच जाता है। देश के माहौल को असहिष्णु और धार्मिक उन्माद से ग्रस्त चित्रित कर दिया जाता है। मेन स्ट्रीम मीडिया से लेकर सोशल मीडिया तक इतना शोर कि और कुछ भी सुनाई ही नहीं...

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