कोलकाता में ED की कार्रवाई के दौरान मौके पर पहुंचीं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, केंद्र सरकार पर साधा निशाना
रिपोर्ट : विजय तिवारी
कोलकाता। प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से कोलकाता में जारी छापेमारी के दौरान पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी स्वयं मौके पर पहुंच गईं। इस दौरान उन्होंने ED की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस तरह से केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल किया जा रहा है, वह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए खतरनाक संकेत है।
ED की कार्रवाई पर मुख्यमंत्री की आपत्ति
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मौके पर मौजूद अधिकारियों और मीडिया से बातचीत में कहा कि ED द्वारा बार-बार की जा रही छापेमारी राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर विपक्षी दलों को निशाना बनाया जा सकता है, तो क्या वही कार्रवाई भाजपा के कार्यालयों और नेताओं पर भी की जाएगी। उन्होंने कहा, “अगर मैं भाजपा कार्यालय पर छापा डलवाऊं तो क्या होगा?”—यह बयान उन्होंने केंद्रीय एजेंसियों की निष्पक्षता पर सवाल उठाने के संदर्भ में दिया।
कानून व्यवस्था और संवैधानिक दायरे की बात
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि वह किसी जांच से नहीं डरतीं, लेकिन जांच एजेंसियों को संविधान और कानून के दायरे में रहकर काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी कार्रवाई का उद्देश्य सच्चाई सामने लाना होना चाहिए, न कि राजनीतिक दबाव बनाना। ममता बनर्जी ने यह भी दोहराया कि उनकी सरकार कानून के शासन में विश्वास रखती है और किसी को भी कानून से ऊपर नहीं माना जा सकता।
केंद्र बनाम राज्य का टकराव
इस पूरे घटनाक्रम को केंद्र और राज्य सरकार के बीच बढ़ते टकराव के रूप में देखा जा रहा है। तृणमूल कांग्रेस का आरोप है कि प्रवर्तन निदेशालय जैसी केंद्रीय एजेंसियों का उपयोग विपक्षी शासित राज्यों को डराने और राजनीतिक रूप से कमजोर करने के लिए किया जा रहा है। वहीं भारतीय जनता पार्टी इन आरोपों को खारिज करते हुए कहती है कि एजेंसियां स्वतंत्र रूप से कानून के तहत काम कर रही हैं।
तृणमूल कांग्रेस का समर्थन
मुख्यमंत्री के मौके पर पहुंचने के बाद तृणमूल कांग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उनके समर्थन में आवाज बुलंद की। पार्टी नेताओं का कहना है कि यह कार्रवाई लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है और जनता इसका जवाब समय आने पर देगी। तृणमूल कांग्रेस ने दोहराया कि वह किसी भी तरह के राजनीतिक दबाव के आगे झुकने वाली नहीं है।
राजनीतिक हलकों में हलचल
कोलकाता में हुई इस घटना के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी है और केंद्रीय एजेंसियों की भूमिका को लेकर बहस छिड़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में यह मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति में और अधिक तूल पकड़ सकता है, खासकर चुनावी माहौल में।