कथा आयोजकों द्वारा पत्रकारों, समाजसेवियो को किया गया सम्मानित
जसवंतनगर (इटावा)। क्षेत्र के ग्राम जैनपुर नागर में आयोजित “बौद्ध भीम कथा” कार्यक्रम के दौरान कथा वाचिका प्रेमा अम्बेडकर ने डॉ. भीमराव अम्बेडकर के जीवन से जुड़ी पीड़ादायक घटनाओं का वर्णन करते हुए समाज को सामाजिक समानता और शिक्षा का संदेश दिया। कथा के दौरान उन्होंने बताया कि एक समय ऐसा भी था जब बाबा साहेब को केवल जाति के कारण एक गिलास पानी तक नसीब नहीं होता था।
कथा वाचन के दौरान प्रेमा अम्बेडकर ने कहा कि डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने बचपन से ही भेदभाव और अपमान का सामना किया। उन्होंने बताया कि जब बाबा साहेब स्कूल में पढ़ते थे तो उन्हें अन्य बच्चों से अलग बैठाया जाता था और कोई भी उन्हें पानी तक देने को तैयार नहीं होता था। कई बार उन्हें प्यासा ही रहना पड़ता था। यह घटना उस समय के सामाजिक भेदभाव और छुआछूत की कड़वी सच्चाई को दर्शाती है।
उन्होंने कहा कि इतनी कठिन परिस्थितियों के बावजूद बाबा साहेब ने हार नहीं मानी और शिक्षा को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया। कठोर परिश्रम और दृढ़ संकल्प के बल पर उन्होंने उच्च शिक्षा प्राप्त की और आगे चलकर देश के संविधान निर्माता बने। प्रेमा अम्बेडकर ने कहा कि बाबा साहेब का जीवन संघर्ष, आत्मसम्मान और समानता की लड़ाई का प्रतीक है।
कथा के दौरान उन्होंने भगवान गौतम बुद्ध के विचारों का भी उल्लेख करते हुए कहा कि बुद्ध का संदेश करुणा, समानता और मानवता पर आधारित है। बाबा साहेब ने भी बुद्ध के मार्ग को अपनाकर समाज को समानता और भाईचारे का रास्ता दिखाया।
कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु और ग्रामीण उपस्थित रहे। कथा सुनते समय कई लोग भावुक भी हो गए। अंत में प्रेमा अम्बेडकर ने लोगों से बाबा साहेब के बताए मार्ग पर चलने, शिक्षा को महत्व देने और समाज में फैले भेदभाव को समाप्त करने का आह्वान किया। बौद्ध भीम कथा का उद्देश्य बाबा साहेब और भगवान बुद्ध के विचारों को जन-जन तक पहुंचाना है, ताकि समाज में समानता, भाईचारा और जागरूकता बढ़ सके।
कार्यक्रम में इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष सुघर सिंह, मेघ सिंह वर्मा, सुबोध पाठक, यशवंत चतुर्वेदी, प्रेम कुमार शाक्य, आलोक, आशीष कुमार, मनोज कुमार, सत्य नारायण राजपूत, राजू, सुशील कांत ने कथावाचक प्रेमा अम्बेडकर का पगड़ी पहनाकर स्वागत किया। आयोजन समिति द्वारा सभी पत्रकारों को पटका पहनाकर व माला पहनाकर स्वागत किया।