‘साइकिल बनाम डबल इंजन’ की जंग तेज: शिवपाल के हमले पर केशव मौर्य का पलटवार, यूपी की राजनीति में छिड़ी बयानबाज़ी की नई लड़ाई

Update: 2026-02-11 12:17 GMT

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की सियासत में ‘साइकिल’ और ‘डबल इंजन’ को लेकर जुबानी जंग तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता शिवपाल सिंह यादव और उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के बीच सोशल मीडिया पर तीखी बयानबाज़ी ने राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। दोनों नेताओं ने एक-दूसरे पर तंज कसते हुए विकास, बजट और जनता के मुद्दों को लेकर आरोप-प्रत्यारोप लगाए।

शिवपाल का वार: “डबल इंजन का विकास किस गड्ढे में फंसा?”

शिवपाल सिंह यादव ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार को “साइकिल पंचर” की चिंता छोड़कर प्रदेश की असली समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर ‘डबल इंजन’ सरकार का विकास किस गड्ढे में फंस गया है?

उन्होंने बजट को “वादों की बरसात” बताते हुए आरोप लगाया कि जमीन पर बेरोजगारी, महंगाई और स्वास्थ्य व सड़क व्यवस्था की बदहाली साफ दिखाई दे रही है। शिवपाल ने कहा कि 2047 के सपने दिखाने वाली सरकार 2026 की सच्चाइयों से मुंह मोड़ रही है।

उन्होंने जनता की भूमिका पर जोर देते हुए लिखा कि जनता प्रचार नहीं, प्रदर्शन देखती है और जब जनता जवाब देती है तो बड़े-बड़े सिंहासन भी ‘पंचर’ हो जाते हैं। साथ ही 2022 के चुनाव का संदर्भ देते हुए सत्तापक्ष पर तंज कसा।

केशव मौर्य का पलटवार: “सपा की साइकिल पहले ही पंचर”

शिवपाल के बयान पर उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कड़ा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि सपा की ‘साइकिल’ दमदार बजट और विकास की राजनीति के सामने पहले ही पंचर हो चुकी है।

मौर्य ने चाचा-भतीजा (अखिलेश यादव और शिवपाल सिंह यादव) की बयानबाजी को “हल्की” बताते हुए कहा कि 2027 से 2047 तक सत्ता से दूर रहने की आशंका के कारण विपक्ष में बेचैनी है। उन्होंने यह भी कहा कि “खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे” वाली कहावत सपा नेताओं पर सटीक बैठती है।

उन्होंने दावा किया कि प्रदेश की जनता समझदार है और वह विकास की राजनीति को पहचानती है। भाजपा सरकार के कामकाज का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि जनता समय आने पर सही फैसला करेगी।

चुनावी सालों की आहट और तेज होती बयानबाज़ी

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनावों और हालिया बजट घोषणाओं के मद्देनजर यह बयानबाज़ी और तेज हो सकती है। एक ओर विपक्ष सरकार की नीतियों और जमीनी मुद्दों को लेकर सवाल उठा रहा है, तो दूसरी ओर सत्तापक्ष विकास कार्यों और योजनाओं के आधार पर पलटवार कर रहा है।

उत्तर प्रदेश की राजनीति में ‘साइकिल’ (सपा का चुनाव चिन्ह) और ‘डबल इंजन’ (केंद्र और राज्य में भाजपा सरकार) का प्रतीकात्मक टकराव अब सोशल मीडिया से निकलकर व्यापक राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बनता दिख रहा है।

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