2027 की तैयारी में AAP तेज: अहमदाबाद–वडोदरा सम्मेलनों से केजरीवाल ने भरी हुंकार

Update: 2026-01-19 15:57 GMT

 

रिपोर्ट : विजय तिवारी

अहमदाबाद | वडोदरा (गुजरात)

गुजरात की राजनीति में आम आदमी पार्टी (AAP) ने आगामी चुनावों की तैयारी को लेकर अपनी सक्रियता तेज कर दी है। इसी कड़ी में पार्टी ने अहमदाबाद और वडोदरा में बड़े स्तर पर कार्यकर्ता सम्मेलनों का आयोजन किया, जहां पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए राज्य सरकार की नीतियों और कार्यशैली पर कड़ा प्रहार किया। इन सम्मेलनों को संगठन को मजबूत करने, जमीनी स्तर पर संवाद बढ़ाने और 2027 के विधानसभा चुनाव को केंद्र में रखकर की जा रही रणनीतिक तैयारी के रूप में देखा जा रहा है।

अपने संबोधन में अरविंद केजरीवाल ने कहा कि गुजरात में AAP का यह अभियान केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि वर्षों से चली आ रही डर, दबाव और चुप्पी की राजनीति के खिलाफ जनता की सामूहिक आवाज है। उन्होंने आरोप लगाया कि लंबे समय से सत्ता में रहने के कारण शासन व्यवस्था में जवाबदेही कमजोर हुई है और आम जनता से जुड़े मुद्दों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा। किसानों, आदिवासियों, युवाओं और सामाजिक सवाल उठाने वाले नागरिकों की समस्याएं लगातार अनदेखी का शिकार हुई हैं, लेकिन अब जनता बदलाव के लिए आगे आ रही है।

केजरीवाल ने कहा कि गुजरात में माहौल तेजी से बदल रहा है और लोग अब खुलकर सवाल पूछने लगे हैं। उन्होंने कहा, “आज लोग आवाज उठा रहे हैं। लोगों के मन से डर निकलता जा रहा है। मुझे खुशी है कि लोग खड़े हो रहे हैं। एक समय था जब गुजरात देश के सबसे समृद्ध राज्यों में गिना जाता था, लेकिन हाल के वर्षों में हालात तेजी से बदले हैं।” उनके इस बयान को सत्ता के खिलाफ बढ़ते असंतोष की ओर इशारा माना जा रहा है।

वडोदरा में आयोजित सम्मेलन के दौरान केजरीवाल ने हरनी लेक दुर्घटना का उल्लेख करते हुए सरकार और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाएं प्रशासनिक लापरवाही और जनसुरक्षा के प्रति उदासीनता को उजागर करती हैं। उन्होंने पूछा कि ऐसी घटनाओं में जिम्मेदारी किसकी तय होती है और भविष्य में इन्हें रोकने के लिए सरकार क्या ठोस कदम उठा रही है।

इसी क्रम में केजरीवाल ने सत्ताधारी दल के भीतर उभर रहे असंतोष का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह किसी से छिपा नहीं है कि वडोदरा से जुड़े भाजपा के पांच विधायकों ने अपनी ही सरकार के खिलाफ मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल को पत्र लिखा था। उनके अनुसार यह पत्र स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक उपेक्षा, संगठनात्मक अनदेखी और जनप्रतिनिधियों की बात न सुने जाने से जुड़ी शिकायतों को लेकर लिखा गया था। केजरीवाल ने इसे सत्ता पक्ष के भीतर गहराते असंतोष का संकेत बताया।

उन्होंने कहा कि जब सत्ताधारी दल के विधायक अपनी ही सरकार के खिलाफ पत्र लिखने को मजबूर हो जाएं, तो यह साफ दर्शाता है कि सरकार और संगठन के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा। ऐसे घटनाक्रमों का सीधा असर शासन व्यवस्था और जनता के भरोसे पर पड़ता है।

कार्यकर्ता सम्मेलनों में केजरीवाल ने पार्टी कार्यकर्ताओं से बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि घर-घर जाकर जनता से संवाद स्थापित करना, स्थानीय समस्याओं को उठाना और लोगों तक सच्चाई पहुंचाना हर कार्यकर्ता की जिम्मेदारी है। उनके अनुसार कार्यकर्ता ही बदलाव की इस प्रक्रिया की सबसे मजबूत कड़ी हैं।

सम्मेलनों के दौरान शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं, रोजगार, महंगाई, बिजली-पानी, किसानों की आय, आदिवासी क्षेत्रों के विकास और जनसुरक्षा जैसे अहम मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। कार्यकर्ताओं को निर्देश दिए गए कि वे अपने-अपने क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों का तथ्यात्मक संकलन करें और संगठित रूप से जनता के सामने रखें, ताकि जनसमस्याएं राजनीतिक एजेंडे का केंद्र बन सकें।

वडोदरा सम्मेलन के अंत में अरविंद केजरीवाल ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “2027 में भाजपा जाएगी और गुजरात के लोगों की सरकार बनेगी।” उन्होंने दावा किया कि आम आदमी पार्टी गुजरात में एक मजबूत, विश्वसनीय और जनहित आधारित विकल्प के रूप में तेजी से उभर रही है।

अहमदाबाद और वडोदरा में आयोजित ये कार्यकर्ता सम्मेलन न केवल आम आदमी पार्टी की बढ़ती संगठनात्मक सक्रियता और चुनावी तैयारी को दर्शाते हैं, बल्कि राज्य सरकार की कार्यशैली और सत्ताधारी दल के भीतर मौजूद असंतोष को भी राजनीतिक बहस के केंद्र में ला रहे हैं।

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