रंगमंच, साहित्य और स्क्रीन लेखन में सृजनशील हस्ताक्षर : सम्मान और उपलब्धियों से सजी विजय पंडित की रचनात्मक यात्रा

Update: 2026-02-11 11:35 GMT


रिपोर्ट : विजय तिवारी

मुंबई / भदोही (उत्तर प्रदेश)। हिंदी रंगमंच, साहित्य और दृश्य माध्यमों में सक्रिय नाटककार, फ़िल्म पटकथा लेखक एवं रंगमंच-निर्देशक विजय पंडित पिछले तीन दशकों से निरंतर सृजन के माध्यम से अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित कर चुके हैं। संत रविदास नगर (भदोही) जनपद के जगन्नाथपुर गाँव से निकलकर उन्होंने मंचीय लेखन, निर्देशन और टीवी-डिजिटल माध्यमों में प्रभावी योगदान दिया है, जिसके लिए उन्हें विभिन्न संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया जाता रहा है।

रचनात्मक यात्रा और कार्यशैली

विजय पंडित की लेखनी सामाजिक सरोकारों, सांस्कृतिक चेतना और भारतीय परंपरा को आधुनिक दृष्टि से प्रस्तुत करने के लिए जानी जाती है। उनकी रंगमंचीय संस्था “अनुष्ठान” ने कई प्रयोगधर्मी नाट्य प्रस्तुतियों को मंच दिया, जिससे युवा कलाकारों को अवसर मिला और समकालीन विषयों पर रंगकर्म को नई गति मिली। उनकी रचना पर आधारित नाटक “जोगिया राग” का प्रतिष्ठित नाट्य आयोजनों में मंचन होना उनकी रंगमंचीय उपलब्धियों में महत्वपूर्ण माना जाता है।

टेलीविज़न और डिजिटल माध्यम में सक्रियता

रंगमंच के साथ-साथ विजय पंडित का योगदान टेलीविज़न और डिजिटल प्रोजेक्ट्स में भी उल्लेखनीय रहा है। उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी के अनुसार पौराणिक धारावाहिक “संकट मोचन हनुमान” के स्क्रीनप्ले एवं संवाद लेखन में उनका नाम उमेश उपाध्याय के साथ जुड़ा रहा है। इसके अलावा पौराणिक और सांस्कृतिक विषयों पर आधारित ऑडियो-विज़ुअल प्रोजेक्ट्स — जैसे “पंचकन्या” और “राम मंदिर गाथा” — में भी वे लेखन टीम का हिस्सा रहे हैं। संवाद प्रधान शैली और मंचीय संवेदना उनकी लेखन पहचान का प्रमुख आधार रही है।

सम्मान और उपलब्धियाँ

रचनात्मक योगदान के लिए विजय पंडित को समय-समय पर कई साहित्यिक और नाट्य सम्मानों से नवाज़ा गया है। इनमें मोहन राकेश पुरस्कार, पद्मश्री गुलाब बाई सम्मान, निराला साहित्य संगीत नाटक अकादमी सम्मान, डॉ. सुरेश चंद्र अवस्थी सम्मान और भारतेंदु नाट्य अकादमी सम्मान जैसे अलंकरण उल्लेखनीय माने जाते हैं। उनकी स्क्रिप्ट पर आधारित फिल्म की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्क्रीनिंग भी उनके

बहुआयामी सृजन का प्रमाण है।

भारतीय रंगमंच में विशेष योगदान को देखते हुए उन्हें “वाग्धारा नवरत्न सम्मान” से सम्मानित किया जाएगा। यह सम्मान समारोह 13 फरवरी 2026 को दोपहर 12 बजे चरनी रोड स्थित हिंदुस्तानी प्रचार सभा के सभागार में आयोजित होगा।

साहित्यिक दृष्टि और पहचान

विजय पंडित की रचनाओं में मंचीय भाषा की सशक्तता, सामाजिक संवेदना और संवाद की गहराई स्पष्ट दिखाई देती है। वे साहित्य और प्रदर्शन कला के बीच सेतु बनकर कार्य करते रहे हैं। मुंबई में रहकर फिल्म, रंगमंच और साहित्यिक गतिविधियों से जुड़े रहते हुए उन्होंने नई पीढ़ी के कलाकारों और लेखकों को मंच देने का निरंतर प्रयास किया है।

भदोही की सांस्कृतिक पृष्ठभूमि से राष्ट्रीय स्तर तक अपनी पहचान बनाने वाले विजय पंडित आज भी सक्रिय रचनाकार के रूप में रंगमंच, साहित्य और स्क्रीन लेखन को नई दिशा देने में लगे हैं। सम्मान और उपलब्धियों से सजी उनकी यह यात्रा हिंदी रंगमंच और सृजनात्मक जगत के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है।

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