यूपी के प्रोफेसर्स! एेेप्लिकेशन की स्पेलिंग और अपने विषय के सामान्य ज्ञान से महरूम है

Update: 2016-07-01 08:28 GMT
बिहार टॉपर्स स्कैम से चर्चा में आई रूबी राय ने शिक्षा प्रणाली की पोल खोलकर रख दी. खूब हो-हल्ला मचा और उसके बाद गिरफ्तारी और बर्खास्तगी के नाम पर लीपापोती जारी है. अब उत्तर प्रदेश भी पड़ोसी राज्य है. भला वह कैसे पीछे रहता. यहां तो हालात और भी दयनीय हैं. रूबी तो स्टूडेंट थी, लेकिन जब प्रोफेसर साहब ही एेेप्लिकेशन की स्पेलिंग और अपने विषय के सामान्य ज्ञान से महरूम हों तो क्या कहेंगे. अंदाजा लगाया जा सकता है कि रूबी जैसों की कितनी गलती है? यूपी के प्रोफेसर परीक्षा की कॉपियों का मूल्यांकन करते हैं, लेकिन उन्हें मूल्यांकन के इंग्लिश शब्द ‘Evaluation’ की स्पेलिंग तक लिखनी नहीं आती. इतना ही नहीं, इकोनॉमिक्स के प्रोफेसर को IMF का फुल फॉर्म तक नहीं पता. फिर सोचिए, ये कैसा मूल्यांकन करते होंगे.

आगरा की डॉ. भीमराव अंबेडकर यूनिवर्सिटी  में  उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन कार्य में लगे उत्तर प्रदेश की विभिन्न यूनिवर्सिटियों के प्रोफेसरों के शैक्षणिक स्तर का अंदाज इस एेप्लिकेशन को देखकर लगाया जा सकता है. अंग्रेजी के प्रोफेसर खुद अंग्रेजी में मूल्यांकन के लिए प्रयुक्त शब्द की सही स्पेलिंग तक नहीं लिख सके. इतना ही नहीं, अर्थशात्र के प्रोफेसर आईएमएफ का फुल फॉर्म तक नहीं लिख पाए. हालांकि मामला सामने आने के बाद अब इनके खिलाफ कार्रवाई का फैसला लिया गया है.बता दें कि आगरा की डॉ. भीमराव अंबेडकर यूनिवर्सिटी में उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन का काम चल रहा है. रुहेलखंड विवि के अंग्रेजी के प्रोफेसर डॉ. श्याम बहादुर ने छात्रों की कॉपिया जांचींं, लेकिन इनमें कई कमियां मिलींं, तो उनसे अंग्रेजी में ऐप्लिकेशन लिखने को कहा गया, पर प्रोफेसर साहब ने जो ऐप्लिकेशन लिखी, उसमें इवैल्यूएशन की स्पेलिंग गलत लिख डाली.

इसी तरह का हाल गोरखपुर यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर साहब का भी रहा. इकोनॉमिक्स के प्रोफेसर डॉ. अनिल कुमार पाल से भी जब आईएमएफ का फुल फॉर्म लिखने को कहा गया, तो वे नहीं लिख सके. अब यूनिवर्सिटी के मूल्यांकन से दोनों को हटा दिया गया है और इनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है.

दोनों प्रोफेसर दस साल से शिक्षण कार्य कर रहे हैं. डॉ. भीमराव अंबेडकर विवि के कुलसचिव ने बताया कि मूल्यांकन में दोनों प्रोफेसरों के संतोषजनक जवाब न देने के कारण उन्हें हटा दिया गया है. संबंधित विश्वविद्यालय को दोनों की रिपोर्ट भेजी जा रही है.

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