नकली सोना, असली लोन : प्रयागराज में 64 लाख का बैंक घोटाला उजागर

Update: 2026-04-11 11:39 GMT


रिपोर्ट : विजय तिवारी

प्रयागराज। संगम नगरी से बैंकिंग सिस्टम को झकझोर देने वाली बड़ी खबर सामने आई है। सिविल लाइंस स्थित केनरा बैंक शाखा में नकली सोना गिरवी रखकर लाखों रुपये का गोल्ड लोन लेने का मामला उजागर हुआ है।

विस्तृत जांच के बाद करीब 64 लाख रुपये के घोटाले की पुष्टि हुई है, जिसमें 16 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।

मामले की जांच में सामने आया कि आरोपियों ने सुनियोजित तरीके से 18 अलग-अलग गोल्ड लोन खातों के जरिए बैंक को चूना लगाया। नकली आभूषणों को असली बताकर 57 लाख से ज्यादा का लोन लिया गया, जिस पर ब्याज जुड़ते-जुड़ते रकम 64 लाख के पार पहुंच गई। इस पूरे खेल में गोल्ड अप्रेजल प्रक्रिया का दुरुपयोग किया गया, जिससे बैंक की जांच प्रणाली पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।

घोटाले का खुलासा तब हुआ जब बैंक को संदेह होने पर दोबारा सोने की जांच कराई गई। अलग-अलग चरणों में किए गए परीक्षण में गिरवी रखा गया सोना नकली पाया गया। जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि यह फर्जीवाड़ा किसी एक व्यक्ति का नहीं बल्कि संगठित गिरोह का काम हो सकता है, जिसकी जड़ें अन्य जिलों तक फैली हो सकती हैं।

केनरा बैंक के क्षेत्रीय प्रमुख पंकज वर्मा की तहरीर पर सिविल लाइंस थाने में मामला दर्ज किया गया।

प्रारंभिक शिकायत जुलाई 2025 में दी गई थी, लेकिन गहन जांच के बाद 10 अप्रैल 2026 को एफआईआर दर्ज की गई। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) के तहत केस दर्ज कर जांच तेज कर दी है।

एफआईआर में जिन प्रमुख आरोपियों को नामजद किया गया है, उनमें विष्णु वर्मा, कौशल किशोर वर्मा, महेश प्रताप सिंह, अजय कुमार, मोहम्मद अरमान, विकास कुमार, रवि कुमार, रंजना यादव, फैज खान, कुलदीप दुबे, आलोक केसरवानी, कार्तिकेय कौशिक और मृत्युंजय सिंह सहित कुल 16 लोग शामिल हैं।

पुलिस अब इस नेटवर्क की पूरी कड़ी जोड़ने में जुटी है।

इस घटना के बाद बैंकिंग सेक्टर में गोल्ड लोन की जांच प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

विशेषज्ञ मान रहे हैं कि यदि समय रहते सख्ती नहीं की गई तो ऐसे संगठित घोटाले भविष्य में और बड़े जोखिम पैदा कर सकते हैं। फिलहाल पुलिस और बैंक की संयुक्त जांच जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे संभव हैं।

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