विंध्य एक्सप्रेसवे पर बड़ा सरकारी फैसला : 330 किमी के राष्ट्रीय महत्व के प्रोजेक्ट का सर्वे शुरू, 2027 से पहले निर्माण की तैयारी

Update: 2026-01-11 08:27 GMT

रिपोर्ट : विजय तिवारी

लखनऊ।

प्रदेश के सड़क अवसंरचना नेटवर्क को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए सरकार ने विंध्य एक्सप्रेसवे के सर्वेक्षण का कार्य चेन्नई स्थित अलमोंडज कंपनी को सौंप दिया है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए फील्ड लेवल पर सर्वे शुरू हो चुका है और इसके पूरा होते ही डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) शासन को सौंपी जाएगी। आधिकारिक संकेतों के अनुसार, सभी प्रक्रियाएं तय समय पर पूरी होने की स्थिति में 2027 से पहले निर्माण कार्य शुरू होने की संभावना है।

राष्ट्रीय कनेक्टिविटी को मजबूती देने वाला प्रोजेक्ट

करीब 330 किलोमीटर लंबे विंध्य एक्सप्रेसवे को राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह एक्सप्रेसवे न केवल विंध्य और पूर्वांचल क्षेत्र को जोड़ने वाला प्रमुख कॉरिडोर बनेगा, बल्कि देश के पूर्वी और मध्य भारत के बीच तेज़, सुरक्षित और निर्बाध सड़क संपर्क को भी सशक्त करेगा। परियोजना का उद्देश्य दूरस्थ और पिछड़े क्षेत्रों को मुख्यधारा की आर्थिक गतिविधियों से जोड़ना है।

रूट और नेटवर्क इंटीग्रेशन

एक्सप्रेसवे का विस्तार प्रयागराज तक प्रस्तावित है।

यह वाराणसी और चंदौली होते हुए सोनभद्र को जोड़ेगा।

सोनभद्र को सीधे पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से कनेक्ट किया जाएगा, जिससे प्रदेश के साथ-साथ अंतरराज्यीय आवागमन को भी गति मिलेगी।

सर्वे की ताज़ा स्थिति

अलमोंडज कंपनी की तकनीकी टीम सोनभद्र के म्योरपुर क्षेत्र में लगातार सर्वे कर रही है।

रनटोला और मुर्धवा के वन क्षेत्रों से लेकर अंतिम छोर तक विस्तृत मैपिंग की गई है।

हर 20 किलोमीटर पर सैटेलाइट-कनेक्टिंग डिवाइस लगाकर पूरे 330 किमी कॉरिडोर का एकीकृत सर्वे पूरा किया गया है, जिससे भू-आकृति, वन क्षेत्र, जल निकासी और निर्माण व्यवहार्यता का सटीक डाटा जुटाया जा सके।

प्रस्तावित एलाइनमेंट और संरचनाएं

यह एक्सप्रेसवे वाराणसी–शक्तिनगर मार्ग के समानांतर विकसित होगा।

मार्ग में दुद्धी–हाथीनाला सड़क को क्रॉस किया जाएगा और आगे हरदी कोटा के कोन मार्ग से जोड़ा जाएगा।

सोन नदी पर नए पुल के निर्माण का प्रस्ताव है, जिसके बाद यह मार्ग नगवां के पल्हारी होते हुए चंदौली के रास्ते वाराणसी से जुड़ेगा।

वन और नदी क्षेत्रों में निर्माण के दौरान पर्यावरणीय मानकों और सुरक्षा उपायों को प्राथमिकता दी जाएगी।

DPR में शामिल प्रमुख बिंदु

कुल परियोजना लागत और चरणबद्ध वित्तीय ढांचा

भूमि अधिग्रहण की आवश्यकता और सामाजिक प्रभाव

पुल, फ्लाईओवर, अंडरपास और सर्विस रोड का विवरण

निर्माण की समयरेखा और पैकेजिंग रणनीति

भविष्य में ट्रैफिक वृद्धि को ध्यान में रखकर विस्तार की योजना

देश और क्षेत्र को होने वाले लाभ

सोनभद्र जैसे दूरस्थ और खनिज-संपन्न जिलों को राष्ट्रीय सड़क नेटवर्क से सीधा जोड़

यात्रा समय और लॉजिस्टिक्स लागत में उल्लेखनीय कमी

उद्योग, खनन, कृषि और पर्यटन को नई गति

रोजगार सृजन और क्षेत्रीय संतुलित विकास को बढ़ावा

विंध्य एक्सप्रेसवे का सर्वे शुरू होना देश की सड़क अवसंरचना के विस्तार में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। DPR के बाद निर्माण की औपचारिक प्रक्रिया तेज़ होगी और यह परियोजना पूर्वी व मध्य भारत के लिए रणनीतिक राष्ट्रीय कॉरिडोर के रूप में उभरने की दिशा में आगे

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