प्रवीण पाठक ने सरकार से पूछा
उपचुनाव खत्म हो गए हैं, अब तो सरकार को जनता की समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए। चुनावी भाषणों में किए गए वादों का क्या हुआ? उत्तर प्रदेश की जनता आज बुनियादी समस्याओं से जूझ रही है, और सरकार उनकी सुध लेने के बजाय जश्न मनाने में व्यस्त है।
मुख्य समस्याएं जो तुरंत समाधान मांगती हैं:
1️⃣ रोज़गार का संकट
नौजवान रोज़गार की तलाश में भटक रहे हैं। सरकारी नौकरियों में भर्तियां धीमी हैं, और प्राइवेट सेक्टर में भी रोज़गार के अवसर घट रहे हैं। क्या यह वही डबल इंजन सरकार है, जो नौकरियां देने का वादा करती थी?
2️⃣ शिक्षा की दुर्दशा
सरकारी स्कूलों और कॉलेजों में बुनियादी सुविधाएं तक नहीं हैं। अच्छे शिक्षकों की कमी और खराब इन्फ्रास्ट्रक्चर से गरीब बच्चों का भविष्य अंधकार में जा रहा है।
3️⃣ स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली
सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर और दवाइयों की कमी से मरीजों को इलाज नहीं मिल रहा। निजी अस्पतालों के महंगे बिलों ने गरीब और मध्यम वर्ग की कमर तोड़ दी है।
4️⃣ गांव की टूटी सड़कें
गांवों की सड़कों की हालत बदतर है। टूटी सड़कों से न केवल आवागमन प्रभावित है, बल्कि दुर्घटनाएं भी बढ़ रही हैं। क्या सरकार को यह सब दिखाई नहीं देता?
जनता के हक की आवाज उठाई जाएगी
उत्तर प्रदेश की जनता इन सवालों का जवाब चाहती है। प्रवीण पाठक ने स्पष्ट किया है कि सरकार को अब काम पर लौटना होगा। अगर सरकार जनता की आवाज नहीं सुनेगी, तो विपक्ष सड़कों पर उतरकर हक दिलाने का काम करेगा।
सरकार से अपील:
रोजगार सृजन के ठोस कदम उठाए जाएं।
शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को प्राथमिकता दी जाए।
गांवों की टूटी सड़कों को ठीक किया जाए।
जनता से किए गए वादों को पूरा किया जाए।
हम जनता के साथ हैं।
जय हिंद, जय भारत।