अवैध रायफल, अवैध गाड़ी रखने, मुख्यमंत्री व पुलिस के लिए धमकी का आपत्तिजनक वीडियो बनाने वाले रंजीत यादव की दबंगई के आगे क्यों लाचार है ऊसराहार पुलिस ?
ऊसराहार पुलिस बताये ? अवैध राइफल और “भारत सरकार” लिखी गाड़ी कहाँ है, क्यों नही हुई बरामद, डीजीपी का आदेश ठेंगे पर
इटावा। अभियुक्त अवैध राइफल रखता है वह भारत सरकार लिखी गाड़ी में चलता है उसे गाड़ी से स्टंट करता है वीडियो बनाता है वह मुख्यमंत्री व पुलिस को आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग करते हुए वीडियो बनाता है और उसे सोशल मीडिया पर वायरल करता है इतना सब होने के बाद भी आखिर ऊसराहार थाने की पुलिस अभियुक्त पर क्यों मेहरबान है। अभियुक्त पूर्व में जेल भी जा चुका है लेकिन पुलिस ने उक्त मुकदमा तब लिखा जब सोशल मीडिया पर पुलिस की फजीहत हुई लेकिन अभी तक अवैध गाड़ी और अवैध राइफल पुलिस ने बरामद नही की। इस मामले में डीजीपी मुख्यालय द्वारा भी कार्रवाई का आदेश किया गया था लेकिन डीजीपी के आदेश को भी ऊसराहार पुलिस ठेंगा दिखा रही है और अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई।
इटावा जनपद के थाना ऊसराहार क्षेत्र के ग्राम नगला जलाल निवासी रंजीत यादव का मामला अब कानून व्यवस्था पर बड़ा सवाल बनता जा रहा है। आरोप है कि रंजीत यादव लंबे समय से खुद को फर्जी तरीके से विधायक और समाजवादी पार्टी का प्रदेश सचिव बताकर क्षेत्र में दबंगई करता रहा, लेकिन पुलिस कार्रवाई करने के बजाय तमाशबीन बनी रही।
बताया जाता है कि रंजीत यादव भारत सरकार लिखी अवैध गाड़ी में घूमता था और उसी गाड़ी पर खड़े होकर स्टंट करते हुए रील बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल करता था। कई वीडियो में वह अवैध राइफल लहराते हुए दिखाई देता है। हैरानी की बात यह है कि ऐसे वीडियो खुलेआम सोशल मीडिया पर पोस्ट किए जाते रहे, लेकिन पुलिस ने लंबे समय तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया। इतना ही नहीं, सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में रंजीत यादव मुख्यमंत्री और पुलिस प्रशासन के खिलाफ अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए दिखाई देता है। वीडियो में वह खुलेआम गाली-गलौज करता है और कानून व्यवस्था को चुनौती देता नजर आता है।
आखिरकार जब उसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ और मामला सुर्खियों में आया, तब पुलिस ने खुद मुकदमा दर्ज करते हुए उसे जेल भेज दिया। लेकिन सबसे बड़ा सवाल अब भी अनुत्तरित है कि जिस अवैध राइफल और भारत सरकार लिखी गाड़ी के साथ वह वीडियो बनाता था, वह कहां है। पुलिस अब तक न तो अवैध हथियार बरामद कर पाई है और न ही उस गाड़ी का कोई ठोस सुराग लगा सकी है।
क्षेत्र के लोगों का कहना है कि यदि सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल न होते तो शायद यह मामला भी ठंडे बस्ते में चला जाता। अब लोग पूछ रहे हैं कि जब आरोपी खुलेआम हथियार लहराकर वीडियो बना रहा था और पुलिस को चुनौती दे रहा था, तब पुलिस क्यों खामोश रही।वयह पूरा प्रकरण पुलिस की कार्यप्रणाली और कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। क्षेत्र में चर्चा है कि क्या ऐसे मामलों में भी कार्रवाई तभी होगी जब वीडियो वायरल होंगे, या फिर कानून का भय वास्तव में लागू होगा।
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मुख्यमंत्री और पुलिस के लिए अभद्र भाषा का प्रयोग करने वाले रंजीत यादव पर भरथना के इंस्पेक्टर क्राइम भी खूब मेहरबान रहे। एसएसपी व एसपी ग्रामीण व प्रभारी निरीक्षक भरथना को लिखित शिकायत देने के वाबजूद उन्होंने प्रार्थनापत्रों को रद्दी की टोकरी में डाल दिया। दादरपुर कांड में भी रंजीत यादव का नाम चर्चा में आया था। सूत्र बताते है कि रंजीत ने पर्दे के पीछे रहकर कि गगन यादव के इशारे पर दादरपुर में लड़कों को भेजकर पुलिस पर हमला करवाने का षड्यंत्र रचा था। इसकी शिकायत भी की गई थी लेकिन बकेवर में दर्ज उक्त मुकदमे के भरथना थाने के जांच अधिकारी इंस्पेक्टर क्राइम अरिमर्दन सिंह ने मुख्य आरोपी रंजीत यादव को बेदाग बचा लिया। जब कि रंजीत यादव के पास 500 युवा लड़को की टीम है सैकड़ो वीडियो फ़ोटो इंस्टाग्राम पर गगन यादव व टीम के साथ अपलोड है। सूत्र बताते है कि रंजीत यादव गगन यादव के एक इशारे पर आसपास के जनपदों में गगन के कार्यक्रम में भीड़ बढ़ाने के लिए युवा लड़के उपलब्ध कराता था। सूत्र बताते है कि दादरपुर कांड में भी उसने लगभग 200 युवाओं को भेजा था जिन्होंने पुलिस पर हमला किया। इस मामले की लिखित शिकायत एसएसपी व थाना भरथना को की गई सबूत भी दिए गए लेकिन इंस्पेक्टर क्राइम ने कोई जांच नही की। इस पूरे मामले में शिकायतें होने के बावजूद पुलिस की तरफ से तत्काल सख्त कार्रवाई नहीं की गई, जिससे पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।