नई दिल्ली: गालीकांड के बाद बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने यूपी विधानसभा चुनाव के लिए अपनी रणनीति में बदलाव किया है. सूत्रों के मुताबिक मायावती ने पिछले दो हफ्तों में अगड़ी जाति के तीस उम्मीदवारों के टिकट काटे हैं. जिन नए उम्मीदवारों को टिकट दिया गया है उनमें ज़्यादातर मुस्लिम हैं.
लखनऊ में मंच से बीएसपी के प्रदर्शन के दौरान जब दयाशंकर के परिवार के खिलाफ गाली वाले नारे लग रहे थे तब पार्टी के ब्राह्मण और ठाकुर जाति के कुछ नेताओं ने इसका विरोध किया था और ये बात मायावती को भी ये बात बताई गई थी. बीएसपी सूत्रों के मुताबिक स्वाति सिंह विवाद के बाद मायावती का अगड़ी जातियों से मोहभंग हुआ है और उन्होंने अपने जातीय समीकरण से ब्राह्मणों को दूर रखने का फैसला किया है.
सूत्रों के मुताबिक अभी जिन्हें बीएसपी का टिकट मिला है उनमें मुस्लिम उम्मीदवारों की संख्या 128 है जबकि ब्राह्मणों की संख्या महज 32 है.
गौरतलब है कि मायावती के जातीय समीकरण में दलित और मुस्लिम के साथ- साथ ब्राह्मणों को भी अहमियत देने की खबर थी लेकिन अब खबर है कि मायावती ने ब्राह्मणों को किनारे करके मुसलमानों पर दांव लगाने का फैसला किया है. मायावती को लगता है की अगर ब्राह्मण बीजेपी के साथ गए तो फिर मुसलमान हाथी की सवारी कर सकते है. इसी लिए गालीकांड के विवाद में नसीमुद्दीन सिद्दीक्की के साथ बहिनजी मजबूती के साथ खड़ी हैं.
दलित राजनीति के बल पर अपनी पहचान बनानेवाली मायावती ने साल 2007 के चुनाव में एक नया समीकऱण तैयार किया था- दलित, मुस्लिम और ब्राह्मण. राज्य में दलितों की संख्या करीब 21 फीसदी हैं जबकि मुस्लिम 20 फीसदी और ब्राह्मण करीब 12 फीसदी हैं. सूत्रों के मुताबिक सोशल इंजीनियरिंग के इसी फॉर्मूला के साथ मायावती चुनाव में उतरने का मन बना रही थी लेकिन स्वामी प्रसाद मौर्या के बगावत और स्वाति सिंह विवाद की वजह से मायावती ने अब मुस्लिमों को ज़्यादा तरहीज़ देने का फैसला किया है.