पीएम मोदी के नेतृत्व में ऐतिहासिक ‘शौर्य यात्रा’ 108 घोड़ों के साथ वीरता, बलिदान और राष्ट्रगौरव का विराट संदेश

Update: 2026-01-11 06:28 GMT

रिपोर्ट : विजय तिवारी

गिर सोमनाथ (गुजरात)।

गुजरात के ऐतिहासिक और पवित्र तीर्थ सोमनाथ में रविवार को राष्ट्रगौरव, आस्था और इतिहास का अद्भुत संगम देखने को मिला। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में आयोजित सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के अंतर्गत भव्य और ऐतिहासिक ‘शौर्य यात्रा’ निकाली गई, जिसने वीरता, त्याग और सांस्कृतिक चेतना की जीवंत झलक प्रस्तुत की।

इस शौर्य यात्रा का उद्देश्य उन वीर योद्धाओं, रक्षकों और तपस्वियों को श्रद्धांजलि अर्पित करना रहा, जिन्होंने विभिन्न कालखंडों में सोमनाथ मंदिर की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया और भारत की सभ्यतागत चेतना को अक्षुण्ण बनाए रखा।

108 घोड़ों की सेरेमोनियल परेड बनी आकर्षण का केंद्र

शौर्य यात्रा की सबसे प्रभावशाली और प्रतीकात्मक झलक रही 108 घोड़ों की भव्य सेरेमोनियल परेड। भारतीय परंपरा में 108 का अंक आध्यात्मिक पूर्णता, शक्ति और साधना का प्रतीक माना जाता है। पारंपरिक वेशभूषा में सजे घुड़सवारों ने जब मंदिर परिसर और आसपास के मार्गों पर कदम बढ़ाए, तो इतिहास मानो जीवंत हो उठा।

शंखनाद, ढोल-नगाड़ों की गूंज और वैदिक मंत्रोच्चार ने पूरे वातावरण को वीर रस और आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। यह यात्रा केवल एक शोभायात्रा नहीं, बल्कि भारत की गौरवगाथा का जीवंत प्रदर्शन बनकर उभरी।

जनसहभागिता और राष्ट्रभक्ति का उत्साह

शौर्य यात्रा के दौरान मार्ग के दोनों ओर हजारों की संख्या में श्रद्धालु, स्थानीय नागरिक, साधु-संत और देश-विदेश से आए पर्यटक मौजूद रहे। लोगों ने तिरंगा लहराकर प्रधानमंत्री का अभिनंदन किया और “भारत माता की जय”, “वंदे मातरम्” जैसे नारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा।

प्रशासन द्वारा सुरक्षा, यातायात और व्यवस्थाओं के व्यापक इंतजाम किए गए थे, जिससे कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण, अनुशासित और गरिमामय ढंग से संपन्न हुआ।

सोमनाथ स्वाभिमान पर्व : अडिग आस्था और अस्मिता का प्रतीक

सोमनाथ स्वाभिमान पर्व केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह भारत की उस सभ्यतागत चेतना का उत्सव है जिसने बार-बार के आक्रमणों, ध्वंस और संघर्षों के बावजूद अपनी आस्था, अस्मिता और आत्मसम्मान को जीवित रखा।

यह पर्व सोमनाथ मंदिर पर हुए प्रथम ऐतिहासिक आक्रमण के लगभग 1000 वर्ष पूर्ण होने की स्मृति में आयोजित किया जा रहा है। साथ ही यह मंदिर के पुनर्निर्माण, सांस्कृतिक पुनर्जागरण और राष्ट्रीय स्वाभिमान की परंपरा को भी सशक्त रूप से रेखांकित करता है।

प्रधानमंत्री मोदी का संदेश : अतीत से प्रेरणा, भविष्य का संकल्प

कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि सोमनाथ केवल एक तीर्थ नहीं, बल्कि भारत की आत्मा, आत्मसम्मान और आत्मविश्वास का प्रतीक है। उन्होंने बलिदान देने वाले वीरों को नमन करते हुए कहा कि उनकी गाथाएं आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्रसेवा, कर्तव्यबोध और सांस्कृतिक संरक्षण की प्रेरणा देती रहेंगी।

प्रधानमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत अपनी समृद्ध विरासत पर गर्व करते हुए आधुनिकता और विकास की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहा है।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और आध्यात्मिक वातावरण

स्वाभिमान पर्व के अंतर्गत देश के विभिन्न राज्यों से आए कलाकारों ने लोकनृत्य, पारंपरिक संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से “एक भारत-श्रेष्ठ भारत” की भावना को सजीव किया। मंदिर परिसर में विशेष पूजा-अर्चना, मंत्रोच्चार और दीप प्रज्ज्वलन से आध्यात्मिक वातावरण और अधिक सघन हो गया।

विकास, पर्यटन और व्यवस्थाओं पर भी मंथन

प्रधानमंत्री के इस दौरे के दौरान श्री सोमनाथ ट्रस्ट की बैठक भी आयोजित हुई, जिसमें मंदिर परिसर के विकास, श्रद्धालुओं की सुविधाओं, बुनियादी ढांचे के उन्नयन और पर्यटन विस्तार से जुड़े विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।

इसका उद्देश्य सोमनाथ को एक आध्यात्मिक केंद्र के साथ-साथ सुव्यवस्थित और वैश्विक स्तर का पर्यटन स्थल बनाना है, ताकि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर अनुभव मिल सके।

समापन : स्वाभिमान, एकता और राष्ट्रगौरव का संदेश

सोमनाथ में आयोजित यह शौर्य यात्रा केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि इतिहास, संस्कृति और राष्ट्रगौरव का जीवंत प्रतीक बनकर सामने आई। इसने देशवासियों को अपने गौरवशाली अतीत से जुड़ने, बलिदान की परंपरा को समझने और एक सशक्त, आत्मनिर्भर भारत के निर्माण का संकल्प लेने का संदेश दिया।

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