खुलासा : नरेंद्र मोदी को थी मारने की साजिश, किसके इशारे पर चिदंबरम ने यह सच देश से छुपाया
आरटीआई रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि 2009 में जांच एजेंसी द्वारा फाइल की गई पहली रिपोर्ट में इशरत को लश्कर का आतंकी बताया गया था. इस पर पी चिदंबरम ने अपने हस्ताक्षर भी किये थे लेकिन दो महीने बाद ही उन्होंने इस एफिडेविट में सम्पादकीय बदलाव करते हुए यह जोड़ा की इशरत के लश्कर आतंकी होने का कोई पुख्ता साक्ष्य नहीं मिलता.
अब यहां सवाल यह उठता है कि आखिर पी चिदंबरम ने किसके दबाव में यह बदलाव कराया. जब पहले एफिडेविट में जांच एजेंसी ने माना था कि इशरत और उसके साथी लश्कर के आतंकी थे और मोदी की हत्या के लिए जा रहे थे तो उसमे क्यों बदलाव किया गया. हालांकि पी चिदंबरम ने अपनी बात पर कायम रहते हुए कहा है कि बीजेपी इशरत के फर्जी एनकाउंटर में मारे जाने के मुद्दे को भटका रही है. उन्होंने कहा कि एफिडेविट में सिर्फ सम्पादकीय बदलाव किये गए थे. चिदंबरम ने कहा कि दुसरे एफिडेविट में बदलाव तत्कालीन गृह सचिव और अटॉर्नी जनरल से सलाह मशविरा के बाद किया गया था. उन्होंने कहा कि पहले एफिडेविट में जांच अधूरी थी इसलिए दुसरे एफिडेविट में उसे दुरुस्त करना उचित था..
दूसरी तरफ यूनियन मिनिस्टर निर्मला सीतारमण ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि एक संवैधानिक पद पर रहते हुए कांग्रेस और पी चिदंबरम ने एक आतंकी साजिश को नजरंदाज किया. अगर यह साजिश कामयाब हो जाती तो मोदी की जान भी जा सकती थी.
केंद्रीय मंत्री किरन रिजीजू ने भी पी चिदंबरम पर निशाना साधते हुए कहा, “पी चिदंबरम रेंज हाथों पकडे गए हैं, अब वे बाख नहीं सकते. उन्होंने न केवल अपने पद का दुरूपयोग किया बल्कि दो जांच एजेंसी सीबीआई और आईबी के बीच मतभेद भी पैदा किया. इतना ही नहीं उन्होंने आईबी के उस इनपुट को भी नजरंदाज किया जिसमे इशरत और उसके साथी जावेद शेख उर्फ़ प्रनेश पिल्लई लश्कर के आतंकी थे. इतना ही नहीं उन्होंने एक आतंकी हमले की साजिश को नाकाम करने की वारदात को भी बदनाम किया. जिससे देश की सुरक्षा में लगे पुलिस और सुरक्षा अधिकारीयों के मनोबल को भी झटका लगा.”
अब यहां सवाल यह उठता है कि आखिर पी चिदंबरम ने किसके दबाव में यह बदलाव कराया. जब पहले एफिडेविट में जांच एजेंसी ने माना था कि इशरत और उसके साथी लश्कर के आतंकी थे और मोदी की हत्या के लिए जा रहे थे तो उसमे क्यों बदलाव किया गया. हालांकि पी चिदंबरम ने अपनी बात पर कायम रहते हुए कहा है कि बीजेपी इशरत के फर्जी एनकाउंटर में मारे जाने के मुद्दे को भटका रही है. उन्होंने कहा कि एफिडेविट में सिर्फ सम्पादकीय बदलाव किये गए थे. चिदंबरम ने कहा कि दुसरे एफिडेविट में बदलाव तत्कालीन गृह सचिव और अटॉर्नी जनरल से सलाह मशविरा के बाद किया गया था. उन्होंने कहा कि पहले एफिडेविट में जांच अधूरी थी इसलिए दुसरे एफिडेविट में उसे दुरुस्त करना उचित था..
दूसरी तरफ यूनियन मिनिस्टर निर्मला सीतारमण ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि एक संवैधानिक पद पर रहते हुए कांग्रेस और पी चिदंबरम ने एक आतंकी साजिश को नजरंदाज किया. अगर यह साजिश कामयाब हो जाती तो मोदी की जान भी जा सकती थी.
केंद्रीय मंत्री किरन रिजीजू ने भी पी चिदंबरम पर निशाना साधते हुए कहा, “पी चिदंबरम रेंज हाथों पकडे गए हैं, अब वे बाख नहीं सकते. उन्होंने न केवल अपने पद का दुरूपयोग किया बल्कि दो जांच एजेंसी सीबीआई और आईबी के बीच मतभेद भी पैदा किया. इतना ही नहीं उन्होंने आईबी के उस इनपुट को भी नजरंदाज किया जिसमे इशरत और उसके साथी जावेद शेख उर्फ़ प्रनेश पिल्लई लश्कर के आतंकी थे. इतना ही नहीं उन्होंने एक आतंकी हमले की साजिश को नाकाम करने की वारदात को भी बदनाम किया. जिससे देश की सुरक्षा में लगे पुलिस और सुरक्षा अधिकारीयों के मनोबल को भी झटका लगा.”