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क्वाड लीडर्स वर्चुअल समिट: भारत की हुई जमकर तारीफ, कोरोना वैक्सीन को लेकर सभी देश एकजुट

क्वाड लीडर्स वर्चुअल समिट: भारत की हुई जमकर तारीफ, कोरोना वैक्सीन को लेकर सभी देश एकजुट
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क्वाड की पहली लीडर्स वर्चुअल समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन, जापान के पीएम योशिहिदे सुगा और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने हिस्सा लिया. इस दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडेन ने भारत की बढ़ती ताकत की तारीफ की और कहा कि हिंद प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता लाने के लिए अमेरिका क्वाड के मित्र देशों के साथ प्रतिबद्ध है और क्वॉड के सदस्य देश कोरोना वैक्सीन बनाने को लेकर आपसी सहयोग बढ़ाएंगे.

वहीं प्रधानमंत्री मोदी ने क्वाड की मीटिंग को वसुधैव कुटुंबकम के प्राचीन दर्शन का विस्तार बताया और कहा कि हम अपने साझा मूल्यों को आगे बढ़ाने और सुरक्षित, स्थिर और समृद्ध इंडो-पैसिफिक को बढ़ावा देने के लिए पहले से ज्यादा सहयोग के साथ काम करेंगे. पीएम मोदी ने ये भी कहा कि आज के हमारे एजेंडे में वैक्सीन, जलवायु परिवर्तन और उभरती हुई तकनीक है, जिसके बूते क्वाड एक ग्लोबल फोर्स बन सकता है.

कोरोना के जन्मदाता चीन ने एक नहीं दो-दो मोर्चों पर भारत को घेरने की तैयारी की. 15 जून को गलवान में खूनी झड़प के साथ LAC पर पूर्वी लद्दाख में जंग छिड़ी और दूसरे मोर्चे पर चीन ने अपने चेले पाकिस्तान को LoC पर उकसाया, लेकिन 15 जून को गलवान में ही भारत ने चीन को ऐसा ट्रेलर दिखाया कि पूर्वी लद्दाख की लड़ाई में ड्रैगन बैकफुट पर आ गया.

भारतवर्ष के पर्वतवीरों ने 20 के बदले 40 से ज्यादा चीनी सैनिकों को मौत के घाट उतार दिया और फिर उसी के स्टाइल में जवाब देकर चीन को चौंका दिया. पैंगोग इलाके में जिस रिज एरिया में PLA के सैनिकों ने टैंट तंबू गाड़ दिए. भारत के हिमवीर उसके ऊपर शीर्ष चोटियों पर जा बैठे और वो भी बोफोर्स तोप के साथ.

लद्दाख की लड़ाई में चीन की भाला-बर्छी वाली साजिश भी बेकार गई और 45 साल बाद ड्रैगन आर्मी फायरिंग वाली स्ट्रैटजी भी भारत के आगे हांफ गई. इसके बाद हिमालय की हाड़ कंपाने वाली सर्दी में चीन की लाल सेना का रक्त सफेद पड़ने लगा और जिस्म पीला पड़ने लगा, जिसके बारे में अब चीन ने भी कबूला है कि पूर्वी लद्दाख की सर्दी में उसके कई सैनिकों की मौत हो गई.

ऐसा पहली बार हुआ कि इतनी लंबी जंग में चीन के हाथ कुछ नहीं लगा, उल्टे नुकसान ही उठाना पड़ा और करीब 10 महीने बाद उसे पैंगोंग इलाके से बैरंग लौटना पड़ा. यानी कोरोना बांटकर दुनिया को झुलसाने का ख्वाब देखने वाला चीन..भारत के सामने पैर पटककर वापस हो गया. लेकिन वहीं दूसरे मोर्चे पर चीन पाकिस्तान को भी भारत के खिलाफ उकसाता रहा. LoC और इंटरनेशनल बॉर्डर पर भारत को अशांत करने के लिए बाजवा की कायर फौज को भड़काता रहा.

लेकिन LAC से लेकर LoC तक भारत ने दुश्मनों को ऐसा करारा जवाब दिया कि विश्वशक्ति का दंभ भरने वाले चीन का गुरूर चूर-चूर हो गया और उसके चेले पाकिस्तान का भ्रम भी चकनाचूर हो गया. इसे विश्व परिदृश्य में देखें तो इसी दौरान कोरोना बांटने वाला चीन अमेरिका समेत पूरी दुनिया का दुश्मन बनता जा रहा था..और लद्दाख की लड़ाई में तो अमेरिका भारत के साथ मजबूती के साथ खड़ा था. अमेरिका ने भारत को महत्वपूर्ण सूचना के साथ ही बर्फीले मौसम से बचाने वाली पोशाक विंटर गेयर और दूसरे उपकरण भी मुहैया कराए थे. अभी इस क्वाड समिट के जरिए अमेरिका ने एक बार फिर साफ कर दिया है..कि वो हमेशा से भारत के साथ था, है और रहेगा.

भारत ने जितनी सख्ती से चीन का मुकाबला किया है, दुनिया की नजर में हिंदुस्तान का कद उतना ही ऊंचा उठा है. आज चीन के मुकाबले पूरी दुनिया की नजर भारतवर्ष पर टिकी है और इसीलिए क्वाड के भी मित्र देश भारत की तरफ उम्मीद से देख रहे हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि इस वक्त हिंदुस्तान दक्षिण एशिया का सबसे बड़ा बाजार है. भारत पिछले कुछ सालों में स्वास्थ्य, रक्षा, टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में बड़ी शक्ति बनकर उभरा है और अमेरिका क्वाड की संभावनाओं को रक्षा सहयोग के अलावा आर्थिक और जलवायु परिवर्तन को लेकर भी देखता है.

पिछले साल अमेरिका ने कोरोना महामारी से निपटने के लिए क्वाड प्लस संवाद का आयोजन किया था, जिसमें ब्राजील, इजरायल, न्यूजीलैंड, साउथ कोरिया और वियतनाम को भी शामिल किया गया था और क्वाड प्लस वाले सभी देश भारत के भी दोस्त हैं. भारत ने भी क्वाड प्लस देशों को कोविड वैक्सीन मुहैया करवाई है.

यहां एक बात और बता दें कि भारत और ब्रिटेन के साथ दुनिया के 10 लोकतांत्रिक देश चीन पर निर्भरता खत्म करने या कम करने को लेकर एक गठबंधन बनाने पर विचार कर रहा है, जिसका मकसद एक सुरक्षित 5G नेटवर्क का भी निर्माण करना है. इसके साथ ही चीन पर निर्भरता कम करने के लिए भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया के साथ मिलकर मजबूत आपूर्ति श्रृंखला को विकसित करने पर काम कर रहा है. लिहाजा भारत के लिए क्वाड और क्वाड के लिए भारत बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

पिछले कुछ सालों से चीन अपने व्यापार और सैन्य ताकत को अनंत विस्तार देने में जुटा है. दूसरे देशों की जल और जमीन हड़पने पर तुला है. इसके लिए वो पड़ोसी देशों को धमकाता रहा है और समंदर में अपने नेवल बेस को मजबूत करता आ रहा है. अमेरिका, जापान समेत दुनिया के तमाम मुल्कों की फिक्र है कि चीन की इस दादागीरी पर लगाम लगाई जाए. लिहाजा पड़ोसियों के साथ अनिश्चितता भरे संबंधों के बीच भारत हिंद महासागर में क्वाड देशों के साथ मिलकर एक नई व्यवस्था की योजना बना रहा है, क्योंकि वैश्विक व्यापार के लिहाज से हिंद महासागर का समुद्री रास्ता चीन के लिए बेहद अहम है और इसलिए चीन को इस क्षेत्र में आने से रोकने के लिए क्वाड का सहयोग भारत के लिए काफी फायदेमंद होगा और दुनिया के लिए भी क्योंकि हिंद प्रशांत क्षेत्र के केन्द्र में भारत ही है.

भारत क्वाड के लिए कितना अहम है इसे ऐसे भी समझिए कि भारत इसके जरिए मानवीय सहायता, आपदा प्रबंधन, समुद्री निगरानी और इंडो पैसिफिक क्षेत्र के कमजोर देशों की सुरक्षा की जिम्मेदारी ले सकता है. अगर भारत ऐसी जिम्मेदारियां लेना स्वीकार करता है तो विश्व में भारत चीन को रोकने की दिशा में तेजी से बढ़ता जाएगा और आने वाले दिनों में वो देश जो चीन के डर से चुप हैं वो भारत के पाले में आकर खड़े हो सकते हैं. मतलब हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती चुनौती को रोकने को लेकर क्वाड के बाकी तीनों देश भारत की तरफ उम्मीद से देख रहे हैं और इसीलिए क्वाड समिट में इस पर नई रणनीति पर चर्चा हुई.

इसके अलावा जिस कोरोना को जन्म देकर चीन पूरी दुनिया का दुश्मन बन गया. भारत ने उसी वायरस के खिलाफ बहुत तेजी से दो-दो टीका बना लिया और दुनिया के करीब 40 देशों को मेड इन इंडिया कोरोना वैक्सीन पहुंचाई भी गई है. ऐसे में कोरोना महामारी से जंग में जीत के लिए भी अमेरिका समेत तमाम देशों को भारत से पूरी आस है.

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