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बच्चे का घट रहा वजन व बढ़ रहा चिड़चिड़ापन टीबी का संकेत

बच्चे का घट रहा वजन व बढ़ रहा चिड़चिड़ापन टीबी का संकेत
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शरीर में गांठ व गले में गिल्टी एक्स्ट्रा पल्मोनरी टीबी का लक्षण

• जनपद में कुल 8702 टीबी मरीजों का चल रहा इलाज

• 55 बच्चे बीते छः माह में टीबी को मात देकर हुए स्वस्थ

• 15 वर्ष से कम उम्र के 344 टीबी मरीज का चल रहा इलाज

प्रयागराज 16 अगस्त 2022 : किसी बच्चे को दो हफ्ते से अधिक लगातार खांसी, बुखार आ रहा है व बच्चा सुस्त रहने के साथ चिड़चिड़ा होता जा रहा है, उम्र के साथ वजन नहीं बढ़ रहा या शरीर के किसी हिस्से में गांठ व गिल्टी है तो यह टीबी के लक्षण हो सकते हैं। यह कहना है जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ॰ अरुण कुमार तिवारी का।

डॉ अरुण ने बताया कि "जनपद में कुल 8702 टीबी मरीजों का इलाज चल रहा है। बीते तीन महीने में 55 बच्चे टीबी का पूरा इलाज कराकर स्वस्थ हो चुके हैं। 15 वर्ष से कम उम्र के 344 टीबी मरीज बच्चों का इलाज चल रहा है। इन बच्चों में फेफड़े के टीबी (पल्मोनरी टीबी) के सबसे ज्यादा केस मिले हैं वहीं शरीर के अन्य हिस्से में (गले में गिल्टी या शरीर के अन्य हिस्सों में गांठ) से जुड़े टीबी (एक्स्ट्रा पल्मोनरी टीबी) के मरीज हैं। परिजनों में जागरूकता के अभाव के चलते बच्चों में टीबी के मामले बढ़े हैं। टीबी की पहचान के लिए इसकी सही जांच जरूरी है। अगर बच्चे के गले में गिल्टी या शरीर के किसी हिस्से में गांठ है तो यह टीबी का कारक हो सकता है।

डॉ॰ अरुण ने बताया कि "क्षय रोग (टीबी यानि ट्यूबरक्लोसिस) एक संक्रामक बीमारी है। यह एक से दूसरे व्यक्ति में फैलती है। टीबी मरीज के एक बार के खांसने पर हवा में उड़ने वाले 3500 बैक्टीरिया छह फीट की दूरी तक खड़े व्यक्ति को संक्रमित कर सकते हैं। समाज में आम धारणा है कि टीबी केवल अधिक उम्र के लोगों को होती है, लेकिन ऐसा नहीं है। बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है इस कारण कुपोषित बच्चों के साथ-साथ देखने में स्वस्थ्य लग रहा बच्चा भी टीबी संक्रमित हो सकता है। टीबी लाइलाज नहीं है लेकिन इलाज न करवाने की सूरत में यह जानलेवा हो सकता है।

लाभार्थी : मनोज ने टीबी को दी मात

कौड़िहार ब्लॉक के क्षेत्रीय निवासी (बदला हुआ नाम) मनोज विश्वकर्मा (उम्र 18 वर्ष) ने अपना टीबी का इलाज पूरा कर लिया है। अब वह स्वस्थ हैं। बातचीत में उन्होने बताया कि " मुझे दो हफ्ते से लगातार खांसी आ रही थी। एक दिन खांसी में बलगम के साथ खून दिखा। मैं तुरंत कौड़िहार के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गया। वहाँ मुझे मालूम चला की मुझे टीबी है। अस्पताल में मौजूद चिकित्सक व एसटीएस कौशल यादव ने मेरा हौसला बढ़ाया और मैंने अपना इलाज शुरू किया। टीबी का पूरा इलाज करवाकर मैं अब पूरी तरह स्वस्थ हो चुका हूँ।

भेदभाव न करें व इलाज पूरा करें

डॉ॰ अरुण ने बताया कि बीमारियाँ किसी के भी जीवन का हिस्सा बन सकती हैं। इसलिए किसी भी बीमार बच्चे या व्यक्ति से भेदभाव करना उचित नहीं है। जरूरत है तो पूरी सुरक्षा बरतते हुए उसको भावनात्मक सहयोग प्रदान करने की। फेफड़ों की टीबी से संक्रमण के फैलने का खतरा रहता है बाकी किसी अन्य टीबी से नहीं। फेफड़े के टीबी का मरीज खांसते-छींकते समय पूरी तरह के प्रोटोकाल का पालन करे और मास्क लगाकर रहे तो इसके संक्रमण की गुंजाइश भी न के बराबर रहती है।

6 माह के कोर्स से टीबी जड़ से खत्म होगी

राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के तहत समस्त सरकारी चिकित्सालयों और स्वास्थ्य केन्द्रों पर निःशुल्क जांच व उपचार की सुविधा उपलब्ध है। टीबी मरीजों के लिए 6 माह का कोर्स लेना बेहद जरूरी है। चिकित्सक के बताये अनुसार पूरा इलाज कराएँ, दवा को बीच में छोड़ने की भूल न करें। ऐसा करने से टीबी बिगड़ सकती है। बीच में दवा छोड़ने पर दवा का असर खत्म हो जाता है। मरीज को एमडीआर टीबी होने की संभावना बढ़ जाती है।

बच्चों में टीबी के शुरुवाती लक्षण

• बुखार व ठंड लगना

• भूख न लगना, चिड़चिड़ापन

• दो हफ्ते से ज्यादा खांसी

• सोते वक्त पसीना

• बार-बार खांसी होना

• गले पर गांठ

• वजन न बढ़ना

बरतें ये सावधानी

• घर में किसी को टीबी होने पर पूरा इलाज कराएं।

• एमडीआर टीबी के मरीजों से बच्चों को दूर रखें।

• अगर मां को टीबी है तो मॉस्क लगाकर बच्चे को गोद लें।

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